सीमा समाचारिकासीमा-दृष्टि

बुद्ध की भूमि पर दो सेनाओं का शांति-संकल्प

बोधगया में भारत-श्रीलंका सैन्य सहयोग का नया अध्याय बिहार के बोधगया में भारत और श्रीलंका के बीच सीमा सुरक्षा, संस्कृति, अध्यात्म और कूटनीति पर वार्ता संपन्न हो गई। यहां 18 से 20 नवंबर 2025 तक भारत-श्रीलंका आर्मी-टू-आर्मी स्टाफ टॉक्स (AAST) का 11वां दौर संपन्न हो गया। यह बैठक श्रीलंका के छह सदस्ययों की अगुवाई में…

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सीमा-दृष्टि

वन्दे मातरम् की अनादि यात्रा

वन्दे मातरम्: भारत की आत्मचेतना कभी-कभी इतिहास ऐसे विलक्षण क्षणों से गुजरता है, जहाँ एक कलम की नोक, एक विचार की चमक और एक शब्द का स्पर्श समूचे राष्ट्र को झकझोर कर उठा देता है। ऐसा ही एक ऐतिहासिक क्षण तब उदित हुआ, जब बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय की लेखनी से ‘वन्दे मातरम्’ जैसा अमर गीत प्रस्फुटित…

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सीमा समाचारिकासीमा-दृष्टि

पहाड़ की खुशबू, परंपराओं की छांव

भारत-नेपाल की साझा विरासत को सहेजता जौलजीबी मेला उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जनपद में हर वर्ष 14 नवम्बर से 25 नवम्बर के बीच जौलजीवी मेले का आयोजन होता है। काली और गोरी नदियों के पवित्र संगम पर हर साल लगने वाला यह मेला एक बार फिर जीवंत हो उठा है। सदियों पुराना यह मेला सिर्फ़ व्यापारिक…

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सीमा-दृष्टि महारानी लक्ष्मीबाई

मां भारती की वीर पुत्री की जयंती

जिसने शौर्य को इतिहास में दर्ज कर दिया- रानी लक्ष्मीबाई भारत के ऐतिहासिक आकाश में नारी–शौर्य के अनेक सूर्य उदित हुए, पर रानी लक्ष्मीबाई की उदीप्ति तो मातृभूमि के माथे पर  अविचल वीरता का कुमकुम–चिह्न बनकर चमकी – एक ऐसी राष्ट्रात्मा के रूप में जो पीढ़ियों को संकल्प और स्वाभिमान का संदेश दे रही हैं।…

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सीमा-दृष्टि

वन्दे मातरम् – एक आध्यात्मिक शक्ति

वन्दे मातरम् – भारत की सुरक्षा की आध्यात्मिक शक्ति 7 नवंबर, 1975 की पवित्र बेला में, जब ब्रिटिश साम्राज्य की तुगलकी फरमान ‘गॉड सेव द क्वीन‘ भारतीय मस्तकों पर विदेशी पराधीनता की मुहर लगा रहा था, तब बंकिम चन्द्र चटर्जी की दिव्य कलम से निकला वह अमर नाद: ‘वन्दे मातरम्’। यह केवल गीत नहीं था,…

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सीमा-दृष्टि

वन्दे मातरम् में रस, छंद और अलंकार

वन्दे मातरम् में रस, छंद और अलंकार का संगम महान राष्ट्रकवि बंकिम चंन्द्र चटर्जी का ‘वन्दे मातरम्’ केवल एक राष्ट्रगीत नहीं है। यह भारतीय चेतना की वह काव्यात्मक अभिव्यक्ति है, जिसमें भाषा, भावानुभूति और भौगोलिक यथार्थता एक अभूतपूर्व सामंजस्य हुआ है। इस कृति की सर्वाधिक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि बंकिम ने संस्कृत के तत्सम…

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