सीमा-दृष्टि

वंदे मातरम्:150 वर्षीय यात्रा के प्रेरक प्रसंग

वंदे मातरम्: इतिहास के अंतरालों में छिपे ग्यारह अनकहे सच हम सभी भारतीयों के लिए ‘वंदे मातरम्’ एक परिचित गीत है। बचपन से लेकर आज तक यह हमारी राष्ट्रीय-चेतना का एक अभिन्न अंग रहा है। इसकी धुन हमारे कानों में गूंजती है और इसके शब्द हमें देश-प्रेम की भावना से भर देते हैं। किंतु, इस…

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वन्दे मातरम्: राष्ट्रप्रेम की आत्मचेतना

वन्दे मातरम्—स्वदेश-प्रेम का वज्र-नाद भारतीय राष्ट्र-चेतना का इतिहास अप्रतिम है। जब हम उस महान राष्ट्र-चेतना को खोजते हैं तो हमारा ध्यान अवश्यमेव बंकिम चंद्र चटर्जी की ओर उन्मुख होता है और  भारत के राष्ट्रगीत ‘वन्दे मातरम्’ के प्रति हम श्रद्धावनत हो जाते हैं। ये दो शब्द संस्कृत की गहन-गरिमा से निर्मित हैं, और भारतीय जनमानस…

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त्रिशूल की छवि में शौर्य-संगीत

त्रिशूल-आकृति में वीरत्व का दिव्य प्रतीक भारतभूमि के उत्तरतम प्रांत लद्दाख की बर्फीली वादियों में, जहां देवताओं के पदचिह्न हैं, वहां गलवान घाटी की वीरभूमि पर 7 दिसम्बर 2025 को युद्ध स्मारक रूप में एक नव-मंदिर प्रतिष्ठित हुआ है। गलवान घाटी में शहीद हुए 20 भारतीय सैनिकों के सम्मान में बना यह मेमोरियल अब जनता…

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मातृभूमि की सीमाओं का संरक्षण

माता का आंचल: सीमाएँ, संस्कृति और राष्ट्र-रक्षा मानव-सभ्यता के उषाकाल से लेकर आज के इस आधुनिक काल तक, मानवता की समस्त संस्कृतियों के हृदय में एक ऐसा अमर सत्य निहित रहा है, जो कालातीत है, सीमाहीन है, और जिसकी गहराई अथाह है। वह सत्य यह है कि धरती को माता के रूप में पूजने की…

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वन्दे मातरम्: भारत की स्वाधीनता का मंत्र

वन्दे मातरम्: ब्रिटिश दमन से लेकर भारत की सीमा-रक्षा तक   -भोगेन्द्र पाठक, वरिष्ठ पत्रकार जब किसी राष्ट्र की चेतना पर विदेशी सत्ता की हथकड़ी बैठती है, तब कभी-कभी किसी संत के हृदय से ऐसी कविता फूट पड़ती है, जो इतिहास के सर्वाधिक क्रांतिकारी परिवर्तन का कारण बन जाती है। ‘वन्दे मातरम्’ ऐसा ही महामंत्र…

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‘वंदे मातरम्’ साम्राज्यवाद के खिलाफ बिगुल

वंदे मातरम्: जब एक गीत ने ब्रिटिश साम्राज्य को थरथराय भारत की शताब्दियों पुरानी संस्कृति में सदैव एक न एक दीपक जलता रहा है। उसे ही कहते हैं राष्ट्र-चेतना। परंतु जब यह दीपक गीत बनकर देशभक्ति के स्वर में सामने आया, तब ब्रिटिश शासकों के हृदय में वह भय की लपट बन उठा। यह गीत…

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