सीमाएँ और तटरेखाएँ

भारत की अंतरराष्ट्रीय सीमा और तटरेखा
  • भारत की स्थल सीमा लगभग 15,106.7 किलोमीटर तथा तटरेखा 11,098 किलोमीटर लंबी है। यह सीमा 07 देशों– अफगानिस्तान, पाकिस्तान, बांग्लादेश, म्यांमार, चीन, नेपाल और भूटान– से लगती है। भारत की स्थल सीमा 17 राज्यों के 92 ज़िलों से होकर गुजरती है तथा तटरेखा 13 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से होकर गुजरती है।
  • भारत की अंतरराष्ट्रीय सीमा विभिन्न भौगोलिक एवं पारिस्थितिक तंत्रों से होकर गुजरती है और प्रत्येक सीमा की अपनी अलग स्थिति व चुनौतियाँ हैं। उदाहरण स्वरूप, भारत-पाकिस्तान सीमा गुजरात के दलदली क्षेत्र और राजस्थान के गर्म थार मरुस्थल से लेकर जम्मू–कश्मीर की ठंडी जलवायु तक फैली है। दूसरी ओर, भारत-म्यांमार सीमा उष्णकटिबंधीय वर्षावनों से घिरी हुई है।
भारत की अंतरराष्ट्रीय स्थल सीमाओं के प्रकार
  • अंतरराष्ट्रीय सीमा रेखा (International Boundary Line) –
    यह ऐसी सीमा है जहां दोनों पड़ोसी देश आपसी सहमति हैं और जिसे विश्व के अन्य देश भी स्वीकार करते हैं।
  • नियंत्रण रेखा (Line of Control- LOC) –
    यह वास्तविक सीमा है जो पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर को भारत के जम्मू–कश्मीर से अलग करती है।
  • वास्तविक नियंत्रण रेखा (Line of Actual Control- LOAC) –
    यह ऐसी रेखा है जो भारतीय नियंत्रित क्षेत्र को चीन के कब्ज़े वाले क्षेत्र से अलग करती है।
भारत की सीमा सुरक्षा के समक्ष चुनौतियाँ
  • भारत के पड़ोसी देश समय-समय पर आर्थिक एवं राजनीतिक अस्थिरता से गुजरते रहते हैं।
  • कई देशों के साथ भारत की सीमाएँ विवादित हैं। अनिर्धारित सीमाएँ द्विपक्षीय तनाव बढ़ाती हैं और घुसपैठ को बढ़ावा देती हैं।
  • प्रत्येक सीमा की अलग परिस्थिति है।
  • भारत-पाकिस्तान सीमा शत्रुतापूर्ण है।
  • भारत-नेपाल व भारत-भूटान की सीमाएँ खुली और झरझरी (porous) हैं, जहाँ लोगों की स्वतंत्र आवाजाही होती है।
  • भारत-म्यांमार सीमा पर विभिन्न उग्रवादी समूह सक्रिय रहते हैं।
  • सीमाओं पर अवैध प्रवासन, जाली मुद्रा, मानव तस्करी, नशीले पदार्थों की तस्करी जैसी आपराधिक गतिविधियाँ होती रहती हैं।
  • पाकिस्तान सहित अन्य सीमाओं से धार्मिक उग्रवाद पर आधारित आतंकवाद, काले धन की घुसपैठ और अस्थिरता फैलाने के प्रयास देखे जाते हैं।
  • हथियारों और गोलाबारूद की तस्करी तथा चरमपंथी विचारधारा को बढ़ावा देने के प्रयास भी किए जाते हैं।
भारत की सीमाओं की सुरक्षा करने वाले बल
  • भारत-पाकिस्तान सीमा –
    इस सीमा की सुरक्षा सीमा सुरक्षा बल (BSF) करता है। यह विश्व का सबसे बड़ा सीमा रक्षक बल है। इसके अतिरिक्त, भारतीय सेना को LOC पर तैनात किया गया है, जहाँ अक्सर दोनों देशों की सेनाओं के बीच संघर्ष होता है।
  • भारत-चीन सीमा –
    इस सीमा की सुरक्षा भारत-तिब्बत सीमा पुलिस बल (ITBP) करता है। साथ ही, रणनीतिक स्थलों पर भारतीय सेना की तैनाती भी होती है।
  • भारत-बांग्लादेश सीमा –
    लगभग 4,096 किमी लंबी इस खुली व झरझरी सीमा की सुरक्षा सीमा सुरक्षा बल (BSF) करता है।
  • भारत-नेपाल सीमा –
    1,751 किमी लंबी इस खुली सीमा की सुरक्षा सशस्त्र सीमा बल (SSB) करता है।
  • भारत-भूटान सीमा –
    699 किमी लंबी इस सीमा की सुरक्षा भी सशस्त्र सीमा बल (SSB) करता है।
  • भारत-म्यांमार सीमा –
    1,640 किमी लंबी इस सीमा की सुरक्षा वर्तमान में असम राइफल्स करता है।
भारत की तटीय सुरक्षा
  • भारत की विस्तृत तटरेखा लगभग 11,098.81 किलोमीटर लंबी है। भारत की समुद्री सीमाओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी भारतीय नौसेना, भारतीय तटरक्षक बल तथा तटीय पुलिस की होती है।

भारत की सीमाएँ, विस्तृत जानकारी

सीमावर्ती समुदाय: सांस्कृतिक एवं मनोवैज्ञानिक सुरक्षा

सीमावर्ती समुदायों में सांस्कृतिक, सामाजिक और मनोवैज्ञानिक सुरक्षा डॉ. मनीष सिंह, वैज्ञानिक ‘ई’, डीआरडीओ विश्वभर में सीमावर्ती समुदाय भौगोलिक और राजनीतिक विशिष्टताओं के कारण जटिल सामाजिक, मनोवैज्ञानिक और सांस्कृतिक चुनौतियों का सामना करते हैं। सीमाएं, चाहे भौतिक हों या रूपकात्मक, इन समुदायों के व्यक्तियों के जीवन और सामूहिक पहचान को गहराई से प्रभावित करती हैं।…

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सेना और मानसिक स्वास्थ्य की चुनौतियां

सीमा रक्षकों और सुरक्षा बलों का मनोबल: मानसिक स्वास्थ्य की चुनौतियां लेफ्टिनेंट कर्नल (डॉ.) लव तोमर “38 वर्षीय हवलदार शिवराम सिंह, भारतीय सेना में पिछले १८ वर्षों से सेवा दे रहे हैं। वर्तमान में वे जम्मू और कश्मीर में नियंत्रण रेखा (LoC) के पास एक उच्च ऊंचाई वाले पोस्ट पर तैनात हैं। वे विवाहित हैं…

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सोनार किला: राष्ट्र की पश्चिमी चौकी

सीमांत पर स्वर्ण दुर्ग: जैसलमेर का सोनार किला डॉ. ममता भाटी गढ़ दिल्ली,  गढ आगरो,  गढ़ बीकानेर। भलो चुणायो भाटीये, सिरे तो जैसलमेर।। जैसलमेर ऐतिहासिक दृष्टि से विशिष्ट महत्त्व रखता है और अपनी गौरवशाली संस्कृति के लिए प्रसिद्ध है। इस नगर की स्थापत्य कला सचमुच अद्वितीय है। जैसलमेर नगर एवं दुर्ग का निर्माण महाराणा जैसल…

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आख्यान युद्ध: एआई(AI) की रणभूमि

आख्यान युद्ध: भारत की सभ्यतागत आत्मा के लिए एक मूक संग्राम सिद्धार्थ दवे “एक झूठ पूरी दुनिया का आधा चक्कर लगा सकता है, जबकि सत्य अभी अपने जूते पहन ही रहा होता है।” यह उक्ति प्रायः मार्क ट्वेन को समर्पित की जाती है, जबकि वास्तव में यह जोनाथन स्विफ्ट की है। यह एक प्रतीकात्मक विडंबना…

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बॉर्डर 2: शौर्य की वापसी

बॉर्डर 2: भारतीय चेतना की एक महाकाव्यात्मक फिल्म भोगेन्द्र पाठक अनुराग सिंह के सधे हुए निर्देशन में निर्मित फ़िल्म ‘बॉर्डर 2’ राष्ट्रचेतना का प्रखर उद्घोष बनकर उभरती है। यह केवल एक युद्ध-कथा नहीं, बल्कि राष्ट्र की आत्मा से संवाद करती हुई एक जीवंत अभिव्यक्ति है। फ़िल्म 1971 के भारत-पाक युद्ध को मात्र स्मृति के रूप…

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सीमाओं के परे, भविष्य के संघर्ष

तकनीकी सामरिक युद्ध: सीमाओं के परे, भविष्य के संघर्ष   डॉ. आर. के. अरोड़ा (सीमा सुरक्षा, प्रौद्योगिकी, साइबर सुरक्षा तथा लोकनीति के विशेषज्ञ) आज दुनिया संघर्षों को लड़ने और प्रतिरोध को बनाए रखने के तरीके में आमूल-चूल परिवर्तन देख रही है। हाल ही में भारत-पाक के बीच जो तनाव बढ़ा, जिसमें पहलगाम आतंकी हमले के…

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जलवायु सुरक्षा और पर्यावरणीय प्रवास

जलवायु सुरक्षा और पर्यावरणीय प्रवास: 21वीं सदी में उभरती वैश्विक चुनौती मेजर जनरल वी के तिवारी (Retd) हाल के वर्षों में, जलवायु सुरक्षा और पर्यावरणीय प्रवास के अंतर्संबंध ने नीति निर्माताओं, विद्वानों और वैश्विक संगठनों का ध्यान आकर्षित किया है। जैसे-जैसे जलवायु परिवर्तन तेज़ होता जा रहा है, इसके प्रभाव पर्यावरणीय क्षरण से आगे बढ़कर…

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बॉर्डर 2: भारत की नई राष्ट्रीय चेतना

  बॉर्डर 2: भारतीय सिनेमा का नवजागरण भोगेंद्र पाठक (सीमा जागरण मंच की राष्ट्रनिष्ठ चेतना और सीमा प्रहरियों के कठोर अनुशासन में तपकर बनी जीवन-यज्ञ की ज्वाला फ़िल्म ‘बॉर्डर २’ में स्पष्ट रूप से प्रज्वलित होती दिखाई देती है। यहाँ युद्ध केवल गोलियों का शोर नहीं, बल्कि सीमांत धरती की दबाई गई पीड़ा का विस्फोट…

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पंच परिवर्तन : आत्मा से राष्ट्र तक परिवर्तन की यात्रा

एक वैज्ञानिक, व्यवहारिक और सभ्यतागत रूपांतरण की परिकल्पना   भोगेन्द्र पाठक संघ का शताब्दी वर्ष उत्सव नहीं, बल्कि राष्ट्रीय चेतना के पुनर्जागरण का उद्घोष है। ‘पंच परिवर्तन’ इसी उद्घोष का मूर्त रूप है। यह एक ऐसा अभियान है जो भारत की आत्मा, सामाजिक ढाँचे और नागरिक संस्कारों को समग्र रूप से पुनर्गठित करने का संकल्प…

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डिजिटल युद्ध और भारत की सुरक्षा

डेटा सुरक्षा, डार्क वेब और अवैध वित्तीय प्रवाह लेफ्टिनेंट जनरल आशीष रंजन प्रसाद (सेवानिवृत्त) वर्तमान युग में किसी भी राष्ट्र की सुरक्षा केवल भूमि, समुद्र, आकाश और अंतरिक्ष तक सीमित नहीं रही है। अब यह डिजिटल डोमेन में भी विस्तारित हो गई है। भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र और उभरती हुई तकनीकी महाशक्ति है।…

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पूर्वोत्तर सीमा, व्यापार और समृद्धि

भूमि सीमाएँ और आर्थिक सुरक्षा: पूर्वोत्तर भारत में सीमा व्यापार और विकास कावेरी जैन भारत सात देशों के साथ कुल 15,106.7 किलोमीटर की भूमि सीमा साझा करता है। इसमें से 5,182 किलोमीटर, लगभग एक-तिहाई, पूर्वोत्तर क्षेत्र में है, जो बांग्लादेश, चीन, भूटान और म्यांमार के साथ सीमाएं साझा करता है। यह पूर्वोत्तर क्षेत्र को न…

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मंदिर: सीमा सुरक्षा का सनातन स्तंभ   

 देवालय से दुर्ग तक : मंदिरों की राष्ट्रीय सीमा–चेतना   भोगेन्द्र पाठक (5 नवम्बर 2025 को सीमा जागरण मंच के ‘मंथन’’ कार्यक्रम में दिल्ली में संतों और आचार्यों द्वारा लिया गया यह निर्णय कि पूर्वोत्तर की अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं पर प्रथम चरण में सौ मंदिर स्थापित किए जाएँ, केवल धार्मिक गतिविधि नहीं, बल्कि सहस्राब्दियों पुराने ‘मंदिर–सीमा–सुरक्षा-तंत्र’…

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कश्मीरी हिन्दुओं का अबतक जारी संघर्ष

कश्मीरी पंडितों की सुरक्षित पुनर्वापसी: इतिहास की सीख और वर्तमान की रणनीति   अश्विनी कुमार च्रोंगू (37वीं होलोकॉस्ट दिवस (19 जनवरी, 2026) पर) उन्नीस जनवरी 1990 को, आज से छत्तीस वर्ष पहले कश्मीर की धरती पर अपने ही घर में रहने वाले मूलनिवासी कश्मीरी पंडितों ने अपने इतिहास का सबसे काला अध्याय देखा था। दस…

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जाली मुद्रा: मौन खतरा

जाली मुद्रा: अर्थव्यवस्था की जड़ों पर प्रहार, राष्ट्र की सुरक्षा पर अदृश्य खतरा आशीष केसरवानी  एक देश की राष्ट्रीय प्रगति की रीढ़ उसकी वित्तीय प्रणाली होती है। हालांकि, इस प्रणाली में जाली मुद्रा का प्रवेश एक मौन लेकिन बहुआयामी खतरा पैदा करता है जो आर्थिक स्थिरता और राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डालता है। नकली…

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समुद्र, सुरक्षा और समृद्धि

समुद्री सुरक्षा और भारत की आर्थिक प्रगति वाइस एडमिरल अजेंद्र बहादुर सिंह (सेवानिवृत्त) भारत एक ऐसा देश है जिसकी समुद्री संस्कृति 4000 वर्षों से भी अधिक पुरानी है। भारतीय लोककथाओं और प्राचीन ग्रंथों से यह स्पष्ट होता है कि मोहनजोदड़ो, लोथल और हड़प्पा की सिंधु घाटी सभ्यता ने अफ्रीका, अरब, मेसोपोटामिया और भूमध्यसागरीय देशों से…

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सीमा पार से आतंकवाद

सीमाओं के पार: आतंकवाद, मानव तस्करी और सुरक्षा की खोज के. के. शर्मा (पूर्व महानिदेशक, सीमा सुरक्षा बल (BSF) कौटिल्य ने अपने प्रसिद्ध ग्रंथ ‘अर्थशास्त्र’ में उल्लेख किया है कि किसी राष्ट्र के पड़ोसी स्वाभाविक रूप से उसके शत्रु होते हैं। अतः उनके साथ अत्यंत सावधानीपूर्वक व्यवहार किया जाना चाहिए। सीमाओं का प्रबंधन एक जटिल…

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बंगाल की लड़ाई: सत्ता नहीं, सभ्यता का प्रश्न

  चुनाव से आगे की सोच: क्यों बंगाल भारत के लिए निर्णायक है अश्वनी कुमार च्रोंगू बीते वर्ष 2025 के अंतिम सप्ताह में भाजपा के राष्ट्रीय संगठनात्मक मामलों के प्रमुख और पार्टी के अखिल भारतीय महासचिव (संगठन) बी.एल. संतोष ने नई दिल्ली से प्रकाशित पत्रिका पाञ्चजन्य  को एक विशेष साक्षात्कार दिया, जिसे मीडिया में व्यापक…

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बंगाल, विवेकानंद और सभ्यतागत संकट

    विवेकानंद दर्शन और भारत का सभ्यतागत संकट भोगेन्द्र पाठक स्वामी विवेकानंद का जन्म केवल एक महापुरुष का जन्म नहीं था, बल्कि वह क्षण था जब भारतीय चेतना ने आधुनिक युग में नई करवट ली। उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया कि अध्यात्म जीवन से पलायन नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति उत्तरदायित्व निभाने…

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सत्ता परिवर्तन का वैश्विक खेल

पहले बांग्लादेश, फिर नेपाल व वेनेजुएला; और अब ईरान…! अश्वनी कुमार च्रोंगू 5 अगस्त 2024 को बांग्लादेश में जनाक्रोश, लूटपाट, आगजनी और देशभर में अवामी लीग के नेताओं तथा उनके कार्यकर्ताओं पर अंधाधुंध हमलों के परिणामस्वरूप सत्ता परिवर्तन हुआ। देश में लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई नागरिक सरकार का अचानक अंत हो गया, जब प्रधानमंत्री…

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सोमनाथ की सभ्यतागत भविष्यवाणी

सोमनाथ की भविष्यवाणी: कौन टिकेगा, कौन इतिहास बनेगा भोगेन्द्र पाठक भारतीय उपमहाद्वीप के इतिहास को जब हम बारीकी से देखते हैं, तो एक अद्भुत दृश्य उभरकर आता है – दो रेखाएँ एक साथ चलती हुई, पर विरुद्ध दिशाओं में। एक रेखा है तलवार की जो खून से लिखी गई, क्रूरता से रंगी गई, विजय और…

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सोमनाथ मंदिर – विरासत, विध्वंस और पुनर्स्थापन

सोमनाथ: सीमा, सभ्यता और स्वाभिमान की सहस्राब्दी   – भोगेन्द्र पाठक सोमनाथ भारतीय सभ्यता की वह चेतना-धुरी है जिसके चारों ओर इतिहास की आँधियाँ घूमती रहीं, किंतु जिसकी ज्वाला कभी मंद नहीं पड़ी। सोमनाथ का नाम लेते ही भारतीय चेतना के अतल-पृष्ठों पर एक दीर्घ स्मृति-ज्योति प्रज्वलित हो उठती है, जैसे आदिगुरु शिव की ध्यान–निमीलित दृष्टि…

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अखिल भारतीय बैठक 2025

अखिल भारतीय बैठक 2025, अहमदाबाद (7-9 नवम्बर ) ‘अभेद्य सीमा, अखंड भारत’ का उद्घोष दिशा, दृष्टि और दायित्व का महाजागरण   भारत की सीमाओं पर सतत जागरण में स्थित प्रहरियों की चेतना जब समवेत होती है, तब इतिहास को नई दिशा प्राप्त होती है। इसी समवेत चेतना का विराट अनुष्ठान सीमा जागरण मंच की अखिल…

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सावलकोट: चिनाब की लहरों में नई ऊर्जा

सावलकोट: सीमा-चेतना और आत्मनिर्भरता का विद्युत-स्तंभ जिन पर्वत शृंखलाओं ने बरसों से बर्फ और बादल का बोझ सहा है, वहीं अब विकास का सूर्योदय फूट रहा है। चिनाब की अनवरत धारा जो पीढ़ियों से सीमांत जन-जीवन को पालती आई है। वहीं आज सावलकोट में ऊर्जा का नया ज्वालामुखी बनकर फूट रही है। 1856 मेगावाट की…

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सुचेतगढ़: भारत राष्ट्र की गर्जना

सुचेतगढ़: भारत का प्रथम गाँव जहाँ सीमा राष्ट्र की आत्मा है पाकिस्तान के सीमांत द्वार जम्मू की पवित्र धरती पर एक छोटा-सा गाँव सगर्व खड़ा है- नाम है सुचेतगढ़। यह केवल एक पता नहीं, एक पहचान है। केवल एक ग्राम नहीं, भारत की प्रथम राष्ट्र-धारणा है। आर.एस.पुरा की तहसील में अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर यह अतुल्य…

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गुंजी- त्रि-सीमा पर भारत की सजग आत्मा

गुंजी -तकनीक से सुरक्षा, संकल्प से संप्रभुता गुंजी – यह नाम ही एक सुर है। पिथौरागढ़ का यह छोटा-सा ग्राम है जहाँ आकाश पृथ्वी को चूमता है और यहाँ भारत की सीमा केवल राजनीति नहीं, आत्मा बन गई है। भारत-नेपाल-तिब्बत की त्रिवेदी पर अवस्थित यह ग्राम मानचित्र से कहीं अधिक महत्त्वपूर्ण है। दस हज़ार पाँच…

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रक्षा शक्ति को नई धार

  79,000 करोड़ का भारत का संकल्प राष्ट्र भारत आज एक अभूतपूर्व सुरक्षा परिस्थिति का सामना कर रहा है। उत्तर में हिमालय की सर्वोच्च चोटियों से लेकर बांग्लादेश की समतल सीमाओं तक, और पश्चिमी मरुस्थलों से पूर्वी वनक्षेत्रों तक –  भारत की 15,106 किलोमीटर की सीमाएँ अनेक सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर रही हैं। पाकिस्तान…

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किबिथू: भारत का प्रथम ग्राम

  किबिथू- भारत का प्रथम गाँव, जहाँ सीमाएँ और नदियाँ मिलती हैं जहाँ हिमालय की सर्वोच्च शिखरमालाएँ नीलाकाश का आलिंगन करती हैं, और भारत की सीमांत भूमियाँ हिमनदों से प्रवाहित सरिताओं के सहारे विश्व की भौगोलिक सीमाओं का विधान रचती हैं – वहीं एक ऐसा ग्राम स्थित है जो भारतीय राष्ट्रचेतना का अंतिम दीप-शिखर बनकर…

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गाँव–गाँव संवाद: राष्ट्र–रक्षा का संकल्प

राष्ट्रीय चेतना और सामूहिक दायित्व का शंखनाद  सीमा जागरण का अभिनव आयोजन: उत्तरकाशी की सीमावर्ती गाँवों में संगोष्ठी उत्तरकाशी जनपद के भटवाड़ी प्रखंड की सीमांत धरती पर हाल ही में एक सार्थक वैचारिक संगोष्ठी का आयोजन हुआ, जहाँ सीमा जागरण मंच ने सीमावर्ती ग्रामों के जन-जीवन से प्रत्यक्ष संवाद स्थापित किया। हिमालय की शांत, किंतु…

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भारत का सुरक्षा विवेक

सरहद पर सतर्कता: राष्ट्र-रक्षा की संरचना भारत की सीमा आज वह नहीं है जो महाभारत के समय में थी। तब सेनापति सीमा पर सतर्क रहते थे – सशस्त्र, सजग, अपराध के आने के बाद प्रतिक्रिया करने के लिए तैयार। परंतु आज, राष्ट्रीय सुरक्षा और सुरक्षा दर्शन रूपांतरित हो गए हैं। यह न केवल प्रतिक्रिया का…

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हिमालय का प्रथम गाँव करज़ोक

करज़ोक: हिमालय की छाती पर भारत का पहला गाँव हिमालय के निस्तब्ध आकाश के नीचे, जहाँ हवा प्रार्थना-ध्वजाओं से संवाद करती है, वहीं त्सो मोरीरी झील के किनारे बसा है करज़ोक, यह केवल एक गाँव नहीं, बल्कि सीमांत पर खड़े उस राष्ट्रभाव का नाम है, जो प्रतिकूल परिस्थियों में भी मुस्कुराता है और भविष्य की…

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चिकेन नेक और पूर्वोत्तर का भविष्य

चिकन नेक की छाया में भारत के पूर्वोत्तर का भविष्य   भारत राष्ट्र की सीमा केवल भौगोलिक सीमा नहीं, वह सभ्यता की भी सीमा है, क्योंकि भारतीय सीमाओं के भीतर और भारतीय सीमाओं के बाहर पाकिस्तान और बांग्लादेश में सभायता-संस्कृति का आमूल विभेद व्याप्त है। । जब सीमांत-सुरक्षा शिथिल होती है, जब विश्वास टूटता है,…

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चिकन नेक पर कड़ा सुरक्षा घेरा

चिकन नेक पर चौकसी: सिलीगुड़ी कॉरिडोर के इर्द-गिर्द भारत का नया सुरक्षा कवच भारत अपनी सबसे संवेदनशील और रणनीतिक जीवनरेखा सिलीगुड़ी कॉरिडोर (चिकन नेक) के चारों ओर सुरक्षा घेरा कसने जा रहा है। पूर्वोत्तर भारत को शेष देश से जोड़ने वाला यह महज़ 22 किलोमीटर चौड़ा गलियारा केवल भौगोलिक संपर्क नहीं, बल्कि भारत की सामरिक…

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सब्रूम– सीमा के साँचे में रचा जीवन

सब्रूम: भारत-बांग्लादेश सीमा पर इतिहास, संस्कृति और राष्ट्र-चेतना का संगम आज आपको लिए चलते हैं भारत-बांग्लादेश सीमा पर स्थित त्रिपुरा राज्य के दक्षिणी छोर में बसे एक सुंदर, सजीव और संवेदनशील कस्बे सब्रूम की ओर। यह कोई साधारण सीमावर्ती नगर नहीं है; यहाँ का पूरा सामाजिक जीवन सीमा के साँचे में ढला हुआ है। दक्षिण…

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मलारी– हिमालय की तपस्वी भूमि

मलारी: हिमालयी सीमांत पर भारत का अडिग प्रहरी उत्तराखंड के चमोली जिले में, धौली गंगा घाटी के कंधे पर जहाँ बर्फीली चोटियाँ तिब्बत सीमा पर निरंतर पहरेदारी करती हैं, वहाँ दस हजार फीट की ऊँचाई पर स्थित मलारी गाँव अविचल सूरमा की तरह खड़ा है। यह गाँव न केवल एक एक महत्वपूर्ण भौगोलिक गाँव है,…

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लहरों के बीच अंडमान,लक्षद्वीप 

द्वीपों की सीमा-संस्कृति और राष्ट्रीय अस्मिता नक्शों की रेखाओं से राष्ट्र नहीं बनते; राष्ट्र बनते हैं संकल्प से। भारत की सीमाएँ वही संकल्प हैं, जिन्हें इतिहास ने तपाया है और बलिदान ने अमर किया है। ये तो राष्ट्र–देह की वह प्रथम–दृश्यमान त्वचा है, जो किसी जीवंत शरीर की बाह्य-सीमा होती है। इससे परे सीमा का…

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ग्नाथंग : पर्वत, परंपरा और सीमा का संगम

ग्नाथंग : सीमा के सिल्क रूट पर भारत का प्रथम गाँव पूर्वोत्तर का अनमोल रत्न और हिमालय की गोद में खिला पहाड़ों का फूल सिक्किम के पूर्वी छोर पर, 13,500 फीट की विराट ऊँचाई पर अवस्थित सीमांत ग्राम ग्नाथंग भारत का वह प्रथम घर है, जहाँ सूर्यदेव अपनी स्वर्णिम रश्मियों से सबसे पहले धरती का…

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सीमा-सुदृढ़ता और ऑपरेशन ‘मेघना’ हेलि़ड्रॉप

ऑपरेशन मेघना हेलिड्रॉप : भारत की सीमाओं को अजेय बनानेवाली विजय 9 दिसंबर 1971, रात 23:30 बजे – जब पूर्वी पाकिस्तान की भूमि पाकिस्तान से आजादी के लिए कराह रही थी, आर्तनाद कर रही थी, तब भारत का आकाश गर्जन कर उठा। यह न तो मंद गूँज थी, न ही सामान्य युद्ध-घोष। यह था भारत…

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16 दिसंबर: राष्ट्र-प्रतिष्ठा का अमर पर्व

विजय दिवस: भारत के पौरुष का महानुष्ठान 16 दिसंबर केवल तिथि नहीं है, यह भारत के पौरुष की प्रतिज्ञा का उदय-दिवस है। यह वह क्षण है जब इतिहास ने भारतमाता के मस्तक पर विजय का रक्ताभ तिलक अंकित होते देखा। उस दिन सूर्य पश्चिम से नहीं, सीमाओं से उग रहा था – जहाँ भारतीय सैनिकों…

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जब भारत खड़ा हुआ, पाकिस्तान टूट गया

1971 में पाकिस्तान का विभाजन : भारत के लिए एक रणनीतिक वरदान 16 दिसंबर 1971 को जब 93,000 पाकिस्तानी सैनिकों ने भारतीय सेना के सामने अपनी बंदूकें डाल दीं, तब केवल एक सैन्य विजय हुई नहीं। हुआ था भारत के भविष्य का संरचनात्मक पुनर्निर्माण, जिसके सुदूरगामी परिणाम इस चौथाई सदी में भारत की सुरक्षा, अर्थव्यवस्था,…

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फील्ड मार्शल मानेकशॉ की शौर्य-गाथा

सैम बहादुर: जिनके निर्णयों ने बदल दिया इतिहास का भूगोल शस्त्र उठा, शौर्य जगा, जयघोष गगन में छाया, जहाँ डटे सैम बहादुर, वहाँ विजयी ध्वज लहराया!” आज हम उस महानायक का स्मरण कर रहे हैं, जिसकी मुस्कान में आत्मविश्वास का वसंत था, और वाणी में तर्क का वज्र। जिसके नेत्रों में रण-चंडी का तेज था,…

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‘धुरंधर’: राष्ट्र-चेतना का शंखनाद

  ‘धुरंधर’: नैरेटिव के मोर्चे पर भारत की सांस्कृतिक स्वाधीनता सिनेमा केवल मनोरंजन नहीं, एक वैचारिक अस्त्र है। जिसे हम ‘सॉफ्ट पावर’ कहते हैं, उसका सबसे प्रभावी माध्यम है सिनेमा। लेकिन दशकों तक भारतीय सिनेमा ने इस शक्ति का उपयोग भारत की ही जड़ों को खोदने में किया। महर्षि अरविन्द ने जिसे ‘चिन्मय शक्ति’ कहा…

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‘धुरंधर’: राष्ट्र-संघर्ष का स्वर

फिल्म ‘धुरंधर’: सीमा-जागरण और राष्ट्र-संघर्ष के आख्यान धुरंधर वह पुरुषार्थी है जो युग का सबसे बड़ा बोझ अपने कंधों पर लेता है, विषम समय में झुकता नहीं, टूटता नहीं, वरन् ज्वालामुखी की भाँति भीतर से दहकते हुए भी बाहर से हिमालय की तरह स्थिर दिखाई देता है। इस शब्द की व्यंजना में बल, बुद्धि, दक्षता,…

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वंदे मातरम्:150 वर्षीय यात्रा के प्रेरक प्रसंग

वंदे मातरम्: इतिहास के अंतरालों में छिपे ग्यारह अनकहे सच हम सभी भारतीयों के लिए ‘वंदे मातरम्’ एक परिचित गीत है। बचपन से लेकर आज तक यह हमारी राष्ट्रीय-चेतना का एक अभिन्न अंग रहा है। इसकी धुन हमारे कानों में गूंजती है और इसके शब्द हमें देश-प्रेम की भावना से भर देते हैं। किंतु, इस…

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सीमा की सांसें, उम्मीदों के घर

जम्मू–कश्मीर में सुरक्षा और पुनर्वास की नई कहानी जम्मू–कश्मीर प्रशासन ने सीमांत क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों की सुरक्षा और बाढ़–प्रभावित परिवारों के पुनर्वास को लेकर दो महत्वपूर्ण प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजे हैं। पहला प्रस्ताव सीमा पर दुश्मनों की गोलाबारी से बचाने के लिए नए बंकरों के निर्माण से जुड़ा है, जबकि दूसरा प्रस्ताव…

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वन्दे मातरम्: राष्ट्रप्रेम की आत्मचेतना

वन्दे मातरम्—स्वदेश-प्रेम का वज्र-नाद भारतीय राष्ट्र-चेतना का इतिहास अप्रतिम है। जब हम उस महान राष्ट्र-चेतना को खोजते हैं तो हमारा ध्यान अवश्यमेव बंकिम चंद्र चटर्जी की ओर उन्मुख होता है और  भारत के राष्ट्रगीत ‘वन्दे मातरम्’ के प्रति हम श्रद्धावनत हो जाते हैं। ये दो शब्द संस्कृत की गहन-गरिमा से निर्मित हैं, और भारतीय जनमानस…

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भारत का प्रथम सीमा गाँव मागो

प्रथम गाँव मागो – सीमांत का संरक्षक आपने कभी सोचा है कि भारत के सबसे दुर्गम सीमावर्ती क्षेत्रों में क्या होता है? इसे जानने के लिए चलते हैं हिमालय की उन दुर्गम शृंखलाओं में, जहाँ पृथ्वी का स्पर्श मानो आकाश से होता है।  वहीं ग्यारह हजार पाँच सौ फीट की अतुलनीय ऊँचाई पर, अरुणाचल प्रदेश…

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त्रिशूल की छवि में शौर्य-संगीत

त्रिशूल-आकृति में वीरत्व का दिव्य प्रतीक भारतभूमि के उत्तरतम प्रांत लद्दाख की बर्फीली वादियों में, जहां देवताओं के पदचिह्न हैं, वहां गलवान घाटी की वीरभूमि पर 7 दिसम्बर 2025 को युद्ध स्मारक रूप में एक नव-मंदिर प्रतिष्ठित हुआ है। गलवान घाटी में शहीद हुए 20 भारतीय सैनिकों के सम्मान में बना यह मेमोरियल अब जनता…

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मातृभूमि की सीमाओं का संरक्षण

माता का आंचल: सीमाएँ, संस्कृति और राष्ट्र-रक्षा मानव-सभ्यता के उषाकाल से लेकर आज के इस आधुनिक काल तक, मानवता की समस्त संस्कृतियों के हृदय में एक ऐसा अमर सत्य निहित रहा है, जो कालातीत है, सीमाहीन है, और जिसकी गहराई अथाह है। वह सत्य यह है कि धरती को माता के रूप में पूजने की…

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कश्मीर: प्राचीन सभ्यताओं का धरोहर-स्थल

कश्मीर: प्राचीन संस्कृति, व्यापारिक मार्गों और ऐतिहासिक उत्खननों का अद्भुत संगम उत्तरी कश्मीर के बारामूला ज़िले के शांत और सुंदर पहाड़ियों के बीच स्थित ज़ेहनपोरा गाँव में इन दिनों चर्चे में है। यहां शोधकर्ताओं और पुरातत्वविदों ने एक बौद्ध परिसर के अवशेषों का पता लगाया है, जो कश्मीर के प्राचीन सांस्कृतिक परिदृश्य को नया आयाम…

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एक अमर सपूत की अदम्य गाथा

जनरल बिपिन रावत: राष्ट्र-रक्षा, नेतृत्व और पराक्रम की अमिट विरासत आज पूरा देश भारत के प्रथम चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ,जनरल बिपिन रावत की चतुर्थ पुण्यतिथि पर उन्हें नमन कर रहा है। जनरल रावत केवल एक सैन्य अधिकारी ही नहीं थे, बल्कि मां भारती की सुरक्षा और रणनीति को नए आकार देने वाले वीर सपूत थे।…

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सुरक्षित व्यापार का नया अध्याय

  भारत-रूस: रक्षा, रणनीति और व्यापारिक सहयोग की नई उड़ान भारत और रूस ने अपने रणनीतिक रिश्तों को आगे बढ़ाते हुए सीमा-शुल्क प्रक्रियाओं को तेज़ और सुरक्षित बनाने के लिए नया कदम उठाया है। जिसके तहत भारत और रूस के सीमा-शुल्क अधिकारियों ने सामान और वाहनों की आवाजाही के लिए आगमन-पूर्व सूचना देने के मसौदे पर…

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माड धरा जैसलमेर : सामरिक पहलू

माड़ धरा जैसलमेर: रेगिस्तान और भारत की रणनीतिक शक्ति का सामरिक महत्व डॉ ममता भाटी प्राचीन साहित्य में थार प्रदेश को मरू , मरुमंडल , मरूदेश , मरूस्थल , मरुधन्व , मरूकान्तार  आदि शब्दों से सम्बोधित किया गया है, जिसका शाब्दिक अर्थ निर्जल प्रदेश से है। इस मरुधरा की ऐतिहासिकता इस प्रदेश में उपलब्ध पैलियोजोइक,…

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रोहिंग्या घुसपैठियों पर सुप्रीम प्रहार

घुसपैठिए आएँ और हम लाल क़ालीन बिछाएँ? सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को रोहिंग्या घुसपैठियों के मुद्दे पर राष्ट्रहित का ऐसा सख़्त रुख अपनाया, जो सीमाओं को सबल और संबर्धित करेगा। मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जॉयमल्य बागची की पीठ ने स्पष्ट प्रश्न रखा कि जब हमारे करोड़ों नागरिक गरीबी, बेरोज़गारी और बुनियादी ज़रूरतों के…

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सागर के प्रहरी को नमन (नौसेना दिवस 2025 )

ऑपरेशन ट्राइडेंट: शांत जलराशि पर भारतीय प्रचंडता की गूँज 4 दिसंबर… भारतीय नौसेना दिवस… वह तिथि है, जब समुद्र की अतल धारा पर भारतीय वीरता बिजली की तरह कड़क उठी थी। यह एक ऐसी तारीख है जब स्वयं समुद्र अपनी लहरों पर दीप सजाकर उन वीर भारतीय नौसैनिकों को प्रणाम करता है जिन्होंने राष्ट्र की…

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करिमगंज: भारत की पूर्वी सीमा-चेतना

करिमगंज: सीमा की धड़कन, व्यापार का द्वार, पर्यटन का नया उजाला असम के दक्षिणी सीमांत पर स्थित करिमगंज  भारत की पूर्वी सीमा-चेतना की धड़कन, भारतीय अस्मिता के अंतिम पहरेदार की पोस्ट और उस अनंत संघर्ष का जीवंत प्रतीक है जो निरंतर अपने आप को नई परिस्थितियों के साथ अनुकूलित करता रहता है। हिमालय की पवित्र…

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मातृभूमि की अखंडता के प्रहरी को नमन

सीमा सुरक्षा बल: सीमा का कवच, संस्कृति का तपस्वी (BSF का 60वां स्थापना दिवस) थार की ज्वाला में तपकर निखरता साहस, कच्छ के दलदलों में चमकता शौर्य, कश्मीर की बर्फीली चोटियों पर कठोर होता संकल्प, और बांग्लादेश की हरियाली से भरी संवेदनशील सीमाओं पर चौकस सतर्कता का एक पर्यायवाची है सीमा सुरक्षा बल। सीमा सुरक्षा…

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आईएनएस विशाल और समुद्री वर्चस्व

आईएनएस विशाल: तीसरे स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर की तैयारी हमारे समुद्र केवल हमारी देश की सीमाएँ नहीं हैं, ये राष्ट्र की शक्ति हैं। हम समुद्र-शक्ति से जितना सम्पन्न होंगे, उतनी ही सुरक्षित होंगी हमारी समुद्री सीमाएँ। समुद्र पर नियंत्रण का अर्थ है दुनिया की राजनीति पर नियंत्रण। हमारा हिंद महासागर भारत की सुरक्षा का विस्तारित प्रहरी…

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सीमा प्रहरी गिपु की गर्जना

गिपु की गर्जना: सीमांत शक्ति की कहानी हिमालय की गोद में, हिमाचल प्रदेश की स्पीति घाटी में – जहाँ बर्फ़ की सफ़ेदी और पत्थर की कठोरता एक साथ अप्रतिम प्राकृतिक छटा बिखेरती हैं – वहाँ एक गाँव है: गिपु। नाम छोटा है, लेकिन इसका महत्व बहुत बड़ा है। भारत–चीन सीमा पर स्थित यह गाँव अब…

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भारत के सीमा-रक्षक गांव-कुनु-चारंग

हिमालय की गोद में भारत का अभेद्य किला – कुनु-चारंग कुनु-चारंग, भारत-तिब्बत सीमा के ऐसे जुड़वाँ गाँव हैं जहाँ जड़ें संस्कृति की हैं, शाखाएँ साहस की और फल देशभक्ति के। ये गाँव, कुनु और चारंग, न सिर्फ़ प्राकृतिक क़िले हैं, बल्कि भारतीय सीमा की सुरक्षा के पहले प्रहरी भी हैं। यहाँ हिमालय की चुनौतियाँ और…

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ध्वजारोहण: राष्ट्र की आत्मा का पुनरुत्थान

  शिखर ध्वजारोहण: 500 वर्षों की प्रतीक्षा एक पल में पूर्ण                                 भोगेन्द्र पाठक, वरिष्ठ पत्रकार जब भारत-भूमि के हृदय अयोध्या में पंचशतकीय प्रताड़नाओं की विभीषिका को झेलते हुए एक मंदिर का शिखर आकाश को छूने लगता है, तब उस…

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वन्दे मातरम्: भारत की स्वाधीनता का मंत्र

वन्दे मातरम्: ब्रिटिश दमन से लेकर भारत की सीमा-रक्षा तक   -भोगेन्द्र पाठक, वरिष्ठ पत्रकार जब किसी राष्ट्र की चेतना पर विदेशी सत्ता की हथकड़ी बैठती है, तब कभी-कभी किसी संत के हृदय से ऐसी कविता फूट पड़ती है, जो इतिहास के सर्वाधिक क्रांतिकारी परिवर्तन का कारण बन जाती है। ‘वन्दे मातरम्’ ऐसा ही महामंत्र…

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शौर्य और श्रम की नई गाथा खाजूवाला

श्रम और साहस से संवरता खाजूवाला का सीमांत जीवन बीकानेर की मरुभूमि के हृदय में, सीमा से तेईस किमी दूर खाजूवाला स्थित है। कभी बेड़ियावाली कहा जाने वाला यह इलाक़ा, इंदिरा गांधी नहर की एक धार से ऐसा बदला कि अब राजस्थान के कृषि–औद्योगिक नक़्शे में यह चमकता सितारा बन गया है। नहर का संबल…

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रामध्वज के साए में जागती भारतीय अस्मिता

अयोध्या के आकाश पर रामध्वज: राष्ट्रचेतना, आस्था और सनातन पुनर्जागरण का घोष     – भोगेन्द्र पाठक, वरिष्ठ पत्रकार अयोध्या के श्रीराम मंदिर में मार्गशीर्ष की शुक्ल पंचमी यानी विवाह पंचमी, तदनुसार 25 नवम्बर 2025 को होने वाला ध्वजारोहण केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि राष्ट्रचेतना, धर्मनिष्ठा और सनातन संस्कृति की पुनर्पुष्टि का घोष है।…

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भारत-नेपाल के बीच ‘सूर्यकिरण’

भारत और नेपाल के बीच 25 नवम्बर से 19वां ‘सूर्यकिरण’ सैन्य अभ्यास  भारत और नेपाल, दो ऐसे पड़ोसी देश हैं जिनके बीच इतिहास, संस्कृति, धर्म और परंपराओं के अनगिनत सूत्र जुड़े हुए हैं। यही कारण है कि दोनों देशों की सेनाएँ जब भी एक साथ प्रशिक्षण करती हैं, उसे केवल एक सैन्य अभ्यास नहीं माना…

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‘वंदे मातरम्’ साम्राज्यवाद के खिलाफ बिगुल

वंदे मातरम्: जब एक गीत ने ब्रिटिश साम्राज्य को थरथराय भारत की शताब्दियों पुरानी संस्कृति में सदैव एक न एक दीपक जलता रहा है। उसे ही कहते हैं राष्ट्र-चेतना। परंतु जब यह दीपक गीत बनकर देशभक्ति के स्वर में सामने आया, तब ब्रिटिश शासकों के हृदय में वह भय की लपट बन उठा। यह गीत…

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बुद्ध की भूमि पर दो सेनाओं का शांति-संकल्प

बोधगया में भारत-श्रीलंका सैन्य सहयोग का नया अध्याय बिहार के बोधगया में भारत और श्रीलंका के बीच सीमा सुरक्षा, संस्कृति, अध्यात्म और कूटनीति पर वार्ता संपन्न हो गई। यहां 18 से 20 नवंबर 2025 तक भारत-श्रीलंका आर्मी-टू-आर्मी स्टाफ टॉक्स (AAST) का 11वां दौर संपन्न हो गया। यह बैठक श्रीलंका के छह सदस्ययों की अगुवाई में…

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बिशिंग : 70 जन 140 करोड़ की सुरक्षा

ब्रह्मपुत्र की प्रथम हुंकार और भारत सीमा का जीवित प्रहरी अरुणाचल प्रदेश का बड़ा हिस्सा चीन सीमा से लगा है। यहां की ऊपरी सियांग जनपद के सुदूरतम भाग में अवस्थित ‘बिशिंग’ एक ऐसा ग्राम है जहाँ भारत का एक छोर समाप्त होता है और चीन की सीमाएँ  आरम्भ होती हैं। यहाँ केवल 22 घर और…

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वन्दे मातरम् की अनादि यात्रा

वन्दे मातरम्: भारत की आत्मचेतना कभी-कभी इतिहास ऐसे विलक्षण क्षणों से गुजरता है, जहाँ एक कलम की नोक, एक विचार की चमक और एक शब्द का स्पर्श समूचे राष्ट्र को झकझोर कर उठा देता है। ऐसा ही एक ऐतिहासिक क्षण तब उदित हुआ, जब बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय की लेखनी से ‘वन्दे मातरम्’ जैसा अमर गीत प्रस्फुटित…

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पहाड़ की खुशबू, परंपराओं की छांव

भारत-नेपाल की साझा विरासत को सहेजता जौलजीबी मेला उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जनपद में हर वर्ष 14 नवम्बर से 25 नवम्बर के बीच जौलजीवी मेले का आयोजन होता है। काली और गोरी नदियों के पवित्र संगम पर हर साल लगने वाला यह मेला एक बार फिर जीवंत हो उठा है। सदियों पुराना यह मेला सिर्फ़ व्यापारिक…

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अगरतला-अखौरा ICP: पूर्वोत्तर का नया द्वार

 हरियाली, भरोसा और पूर्वोत्तर के भविष्य का नया द्वार त्रिपुरा की शांत, घनी हरियाली और सीमा के उस पार फैली बांग्लादेश की उपजाऊ धरती के बीच स्थित अगरतला–अखौरा एकीकृत चेक पोस्ट (ICP) पूर्वी सीमा का वह सशक्त द्वार बन चुका है, जहाँ व्यापार, विश्वास और पड़ोसी सहयोग एक नई राह तैयार कर रहे हैं। 2013…

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क्यों युग-धर्म की हुंकार लक्ष्मीबाई

क्यों लक्ष्मीबाई केवल इतिहास नहीं -भोगेन्द्र पाठक, वरिष्ठ पत्रकार इतिहास के विराट गगन में अनेक नारी–दीप्तियाँ उदित हुईं, जिनकी प्रकाश–रेखाएँ भारत–पथ को आलोकित करती रहीं। पर झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई का प्राकट्य तो ऐसा था, जैसे भारत–माता के ललाट पर गौरव का उज्ज्वल सिंदूर–चिह्न स्वयं उतर आया हो। वह एक ऐसा अदम्य व्यक्तित्व थीं जिनमें…

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हिंदुमलकोट-पश्चिमी मोर्चे का रणक्षेत्र

हिंदुमलकोट: जहाँ से शुरू होती है भारत–पाक सीमा की कहानी राजस्थान के श्रीगंगानगर ज़िले में स्थित हिंदुमलकोट वह भौगोलिक बिंदु है जहाँ से भारत–पाकिस्तान की 1,070 किमी लंबी अंतर्राष्ट्रीय सीमा की शुरुआत होती है। अरावली से दूर, थार की धरती पर बसे इस शांत कस्बे ने भारत के इतिहास, सुरक्षा और कृषि—तीनों ही क्षेत्रों में…

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महारानी लक्ष्मीबाई

मां भारती की वीर पुत्री की जयंती

जिसने शौर्य को इतिहास में दर्ज कर दिया- रानी लक्ष्मीबाई भारत के ऐतिहासिक आकाश में नारी–शौर्य के अनेक सूर्य उदित हुए, पर रानी लक्ष्मीबाई की उदीप्ति तो मातृभूमि के माथे पर  अविचल वीरता का कुमकुम–चिह्न बनकर चमकी – एक ऐसी राष्ट्रात्मा के रूप में जो पीढ़ियों को संकल्प और स्वाभिमान का संदेश दे रही हैं।…

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अवैध प्रवासन और स्लीपर सेल्स

मूक विध्वंसकः अवैध प्रवासन और स्लीपर सेल्स – ले. जन. (रि.) डॉ. नितिन कोहली,अध्यक्ष, सीमा जागरण मंच, दिल्ली प्रांत भारत का विशाल भू-भाग, उसकी विस्तीर्ण सीमाएँ और विविध सांस्कृतिक विरासत एक अद्भुत संगम के समान हैं, जहाँ अनेक रंगों, भाषाओं और परंपराओं का मिलन हुआ है। इस पावन भूमि की सीमाएँ केवल भौतिक रेखाएँ नहीं,…

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वन्दे मातरम् – एक आध्यात्मिक शक्ति

वन्दे मातरम् – भारत की सुरक्षा की आध्यात्मिक शक्ति 7 नवंबर, 1975 की पवित्र बेला में, जब ब्रिटिश साम्राज्य की तुगलकी फरमान ‘गॉड सेव द क्वीन‘ भारतीय मस्तकों पर विदेशी पराधीनता की मुहर लगा रहा था, तब बंकिम चन्द्र चटर्जी की दिव्य कलम से निकला वह अमर नाद: ‘वन्दे मातरम्’। यह केवल गीत नहीं था,…

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सीमाएं टूटीं तो टूटे मंदिर

  सीमाएं टूटीं तो टूटे मंदिर – भोगेन्द्र पाठक, वरिष्ठ पत्रकार सीमाएँ किसी राष्ट्र की संप्रभुता की परिभाषा हैं। ये केवल भौगोलिक विभाजन नहीं हैं, बल्कि देश के अस्तित्व, सांस्कृतिक पहचान और राजनीतिक स्वतंत्रता के प्रतीक हैं। एक सुरक्षित सीमा के अभाव में राष्ट्र अपनी सार्वभौमिकता खो देता है। सीमा सुरक्षा में कोई समझौता राष्ट्रीय…

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वन्दे मातरम् में रस, छंद और अलंकार

वन्दे मातरम् में रस, छंद और अलंकार का संगम महान राष्ट्रकवि बंकिम चंन्द्र चटर्जी का ‘वन्दे मातरम्’ केवल एक राष्ट्रगीत नहीं है। यह भारतीय चेतना की वह काव्यात्मक अभिव्यक्ति है, जिसमें भाषा, भावानुभूति और भौगोलिक यथार्थता एक अभूतपूर्व सामंजस्य हुआ है। इस कृति की सर्वाधिक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि बंकिम ने संस्कृत के तत्सम…

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सीमा सुरक्षा का आह्वान

भारत की सीमाओं को सुरक्षित करने में आपकी भूमिका:हर भारतीय को आह्वान   लेफ्टिनेंट जनरल विष्णु कांत चतुर्वेदी पीवीएसएम, एवीएसएम, एसएम (सेवानिवृत्त) राष्ट्रीय अध्यक्ष, अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद्   प्रिय साथी नागरिकों, भारत की सीमाएं केवल मानचित्र पर खींची गई रेखाएं नहीं हैं, बल्कि हमारी राष्ट्रीय पहचान, एकता और गौरव के जीवंत किनारे…

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धुबरी: सीमा-सुरक्षा के नये आयाम

धुबरी: भारत की सीमा-सुरक्षा के नये आयाम राष्ट्रीय सीमाओं की रक्षा करना, एक जीवंत और स्वाभिमानी राष्ट्र की पहचान है। यह केवल सेना का कर्तव्य नहीं, बल्कि प्रत्येक देशवासी का पवित्र अधिकार और महान दायित्व है। असम के धुबरी जिले में जो नई सैन्य छावनी स्थापित की जा रही है, वह केवल एक सामरिक निर्णय…

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वन्दे मातरम्: वर्षभर राष्ट्रीय उत्सव

राष्ट्रगीतः वन्दे मातरम् वर्षभर राष्ट्रीय उत्सव (2025-2026) 150 वर्षों की गौरव-गाथा 7 नवम्बर, 1875 – यह दिन भारतीय इतिहास में स्वर्णाक्षरों से अंकित है। जब पश्चिम बंगाल के नैहाटी नगर स्थित कंधालपाड़ा गाँव में, एक आम के पेड़ के नीचे बैठकर बंकिम चन्द्र चट्टोपाध्याय ने अक्षय नवमी के पावन अवसर पर वन्दे मातरम् की रचना…

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वन्दे मातरम् : एक अनूठा गीत

वन्दे मातरम् : विश्व-इतिहास में एक अनूठा गीत बंकिम चन्द्र चटर्जी की अमर रचना का वैश्विक महत्व  जब हम विश्व के इतिहास में झाँकते हैं, तब हमें अनेक राष्ट्रगीत, देशभक्ति-गीत और क्रांतिकारी गान मिलते हैं। फ्रांस का La Marseillaise, अमेरिका का The Star-Spangled Banner, ब्रिटेन का God Save the King –  ये सब अपने-अपने देशों…

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सीमा सुरक्षा और पर्यावरण संतुलन

लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश में रक्षा परियोजनाओं को राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की स्वीकृति :  हाल ही में राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति की 86वीं बैठक में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया, जिसके तहत लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश में 13 प्रमुख रक्षा परियोजनाओं को मंजूरी दी गई। यह निर्णय देश की सामरिक आवश्यकताओं को सुदृढ़…

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अमर राष्ट्रगीत के 150 वर्ष

वन्दे मातरम् : भारत की अमर चेतना का शाश्वत गीत सात नवम्बर, अठारह सौ पचहत्तर। यह तिथि, यह दिन, यह पल भारतीय चेतना के लिए कोई साधारण क्षण नहीं था। यह दिन भारतीय इतिहास में स्वर्णाक्षरों से अंकित है। पश्चिम बंगाल के नैहाटी नगर में, एक छोटे से गाँव कंधालपाड़ा में, एक आम के पेड़…

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मंथन-2025, सीमा से सेवा तक

मंथन- 2025-मालवीय स्मृति भवन, नई दिल्ली, तिथि: 5 नवम्बर, 2025 मंदिर निर्माण से राष्ट्र निर्माण का संकल्प विस्तृत कार्यक्रम रिपोर्ट आयोजक: सीमा जागरण मंच सीमा जागरण मंच द्वारा आयोजित मंथन–3  एक ऐतिहासिक और विचारोत्तेजक आयोजन रहा, जिसका मुख्य उद्देश्य भारत की सीमाओं पर सांस्कृतिक पुनर्जागरण, आध्यात्मिक चेतना और राष्ट्रीय एकता को सशक्त बनाना है। इस वर्ष…

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‘जिगना’ – सीमा संस्कृति का संगम

जिगना – संस्कृति और प्रकृति का संगीत पश्चिमी चंपारण की धरती पर, मैनाटांड़ के अंचल में बसा है एक गाँव – जिगना। यह नाम नहीं, यह एक पुकार है – उन परंपराओं की, उन रीति-रिवाजों की, जो सदियों से इस मिट्टी में रची-बसी हैं। जहाँ लोकजीवन की सरलता, मेलों का उत्साह, और त्योहारों की रंगीनियाँ…

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सुरक्षा का नया उदघोष ‘इक्षक’

समुद्री सीमा सुरक्षा का नया उद्घोष ‘इक्षक‘ 6 नवंबर, 2025 – यह दिन भारतीय नौसेना के गौरव का नया प्रभात लेकर आएगा। कोच्चि के नौसैनिक तट पर, जहाँ समुद्र की लहरें राष्ट्र को प्रणाम करती हैं, वहाँ ‘इक्षक‘ नामक एक नया जहाज़ नौसेना के बेड़े में सम्मिलित होगा। यह केवल एक सर्वे वेसल नहीं –…

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सैन्य शक्ति का नया सूर्योदय

भारत की सशस्त्र शक्ति का नया सूर्योदय जिस दिन देश की सीमाओं पर नए ब्रह्मास्त्रों की गूँज सुनाई देती है, समझ लीजिए कि भारत की आत्मा एक बार फिर जग चुकी है। रक्षा अधिग्रहण परिषद् द्वारा हाल ही में ₹79,000 करोड़ के पूंजीगत अधिग्रहण प्रस्तावों को मिली स्वीकृति मात्र कोई वित्तीय आंकड़ा नहीं, बल्कि आने…

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ड्रोन, ड्रग्स, और भारत के युवा

पाकिस्तान की नई जंग – ड्रोन, ड्रग्स, और भारत के युवा अब दुश्मन गोली से नहीं, नशे से वार करता है। भारत-पाकिस्तान के बीच 1947 से अब तक चार बड़े युद्ध हुए हैं। लेकिन आज भी पाकिस्तान हमसे यानी भारत से एक नई जंग लड़ रहा है – और इस जंग में गोलियाँ नहीं, नशा…

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सीमा पर स्मार्ट फेंसिंग

भारत की सीमा सुरक्षा का नया अध्याय: स्मार्ट फेंसिंग भारत की सीमा सुरक्षा को लेकर एक ऐतिहासिक परिवर्तन अब घटित हो रहा है। नियंत्रण रेखा (LoC) पर पारंपरिक तारबंदी को अब ‘स्मार्ट फेंसिंग‘ में रूपांतरित किया जा रहा है – एक ऐसी तकनीक जो सुरक्षा को नई परिभाषा देगी। ‘कॉम्प्रिहेन्सिव इंटीग्रेटेड बॉर्डर मैनेजमेंट सिस्टम (CIBMS)’…

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सीमा पर अभ्यास ‘त्रिशूल’

सर क्रीक का विजय-नाद: अभ्यास त्रिशूल कच्छ के सर क्रीक की दलदली भूमि – जहाँ समुद्र, धरती और आकाश एक अद्भुत संयोग में मिलते हैं – वहाँ आज भारत की सैन्य चेतना का एक नया अध्याय लिखा जाने वाला है। यह है ‘अभ्यास त्रिशूल‘ – भारत के सेना, नौसेना और वायु सेना का एक विराट…

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382 इन्फैंट्री बटालियन का पूर्ण आधुनिकीकरण

कार्बाइन से एआई तक: 382 इन्फैंट्री बटालियन का परिवर्तनकाल भारतीय सेना ने एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है। 382 इन्फैंट्री बटालियन का संपूर्ण रूपांतरण हो रहा है – और यह केवल एक सैन्य-प्रयास नहीं, यह है राष्ट्र-रक्षा की रणनीति में एक आमूल, ऐतिहासिक परिवर्तन। क्योंकि भारत की सीमाओं पर धमकियाँ बढ़ रही हैं, चुनौतियाँ गहरी हो…

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CQB कार्बाइन

सेना के लिए 4.25 लाख स्वदेशी कार्बाइन

₹2770 करोड़ की डील तय,सेना को मिलेंगे 4.25 लाख देशी CQB कार्बाइन  भारतीय सीमा की सुरक्षा के लिए रक्षा मंत्रालय ने एक अहम फैसला लिया है। अब भारतीय सीमा पर तैनात जवानों के लिए स्वदेशी निर्मित CBQ कार्बाइन मिलने का रास्ता साफ हो गया है। भारतीय सेना अब बंदूक की जगह विशेष स्वदेशी CQB कार्बाइन…

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पूर्वोत्तर में नई आर्थिक क्रांति

पूर्वोत्तर भारत में डिजिटल और औद्योगिक विकास भारत में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के पंजीकरण की यात्रा किसी आर्थिक क्रांति से कम नहीं रही है। बीते दो दशकों में यह तंत्र काग़जी दौर से निकलकर पूरी तरह डिजिटल स्वरूप में ढल चुका है – एम- II से उद्योग आधार तक और अब ‘उद्यम…

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ड्रोन और भारतीय तकनीक

ड्रोन बनाम भारत: सीमा पर भारतीय तकनीक की जीत पंजाब की भारत-पाकिस्तान सीमा एक अदृश्य युद्ध का केंद्र बन चुकी है। यह युद्ध न तो पारंपरिक शस्त्रों का है, न ही मानवीय घुसपैठ का, बल्कि आकाशीय यंत्रों – ड्रोन का है। इस तकनीकी संघर्ष के पीछे छुपा है एक गहरा षड्यंत्र: भारत की युवा पीढ़ी…

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पूर्वोत्तर भारत: रोजगार के बढ़ते कदम

पूर्वोत्तर भारत: नई डिजिटल अर्थव्यवस्था के आयाम भारतीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, जो सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में लगभग एक-तिहाई का योगदान देता है और लगभग 11 करोड़ लोगों को रोजगार प्रदान करता है। वर्षों से केंद्र सरकार ने छोटे व्यवसायों के पंजीकरण, संचालन और सरकारी…

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श्रीनगर के लाल चौक पर दीपोत्सव

दीयों से रौशन हुआ लाल चौक

“सीमाओं पर देशभक्ति का दीपक जलता रहे”-सीमा जागरण मंच जम्मू-कश्मीर की राजधानी श्रीनगर के लाल चौक पर कई वर्षों के बाद दीपोत्सव का त्योहार हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। यहां भव्य दीपोत्सव के साथ महाआरती का आयोजन भी किया गया। स्थानीय लोगों ने दीयों से ‘ऑपरेशन सिंदूर’ लिखा।दीयों की रौशनी में पूरा शहर जगमगा उठा।…

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वायु-शक्ति का नया शिखर भारत

चीन से आगे भारत: वायु-शक्ति का नया शिखर विश्व के आसमान पर भारत का परचम अब और ऊँचा हो गया है। WDMMA की नवीनतम ग्लोबल एयर पावर रैंकिंग में भारतीय वायुसेना तीसरे स्थान पर प्रतिष्ठित हुई है – अमेरिका प्रथम, रूस द्वितीय, भारत तृतीय, और चीन चतुर्थ स्थान। यह क्रम मात्र गणना नहीं, बल्कि वीरत्व,…

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नागालैंड-मणिपुर सीमा का गांव केन्दुंग

नागालैंड–मणिपुर सीमा का दूरस्थ गाँव केन्दुंग असम राइफल्स अपनी शानदार पहल से यहाँ सुरक्षा के नए ‘मॉडल‘ की बुनियाद रख रही है। जवान पहुँचे, बुज़ुर्गों से संवाद किया, युवाओं को शिक्षा और खेल की ताकत समझाई, बच्चों में जोश भरा—यह सिर्फ सामुदायिक कार्यक्रम नहीं, यह ‘360-डिग्री सिक्योरिटी‘ का भारतीय संस्करण है। सीमा पर तैनात फौज…

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सीमा पर शांति का प्रहरी

सीमा पर शांति का प्रहरी-गुंजी ग्राम एक छोटा-सा गाँव – पर भूमिका इतनी बड़ी कि मानचित्र भी छोटा पड़ जाए। सीमांत गाँव गुंजी, पिथौरागढ़ का वह मोर्चा है, जहाँ भारत-नेपाल-तिब्बत की सीमाएं एक धुरी बनाती हैं। यहाँ आकर सद्यः अनुभूति होती है कि हिमालय-हृदय की कंदरा में बसा यह ग्राम गुंजी राष्ट्र-प्राण का अनुनाद है।…

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पूर्वी द्वार की शान: चम्फाई

पूर्वी द्वार की शान: चम्फाई – संस्कृति, सीमा और अन्न का संगम आज मैं आपको ले चलता हूँ उस स्थान पर जहाँ से हमारा भारत शुरू होता है। मिज़ोरम के चम्फाई में, जहाँ सबसे पहले सूरज की किरणें भारत की धरती को छूती हैं। यह नगर हमारी सीमा का प्रहरी है, हमारी संस्कृति का संरक्षक…

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सीमा पर स्थित असम का सत्रसाल

सत्रसाल: असम की सीमाओं पर स्थित पहला गाँव असम एक सांस्कृतिक विविधता वाला राज्य है। जहां की सीमाओं पर लोक संगीत की प्रतिध्वनि सुनाई पड़ती है। असम का सत्रसाल गाँव अपनी सांस्कृतिक और भौगोलिक विविधता के लिए लोकप्रिय है। अन्तर्राष्ट्रीय सीमा पर होने के कारण यहां की एक अलग सांस्कृतिक पहचान है। यह राज्य अपनी…

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समस्त सीमाओं की गौरवगाथा

समस्त सीमाओं की गौरवगाथा: राष्ट्र का अभिमान, सुरक्षा का संकल्प भारत की सीमाएँ केवल रेखाएँ नहीं, अपितु हमारे स्वतंत्रता संग्राम का ऐश्वर्य, समर्पित वीरों की शौर्यगाथा और अखण्डता की प्रतिमूर्ति हैं। जब इन सीमाओं की रक्षा अटूट होती है, तब देश की राजधानी से लेकर सबसे सुदूर ग्राम-धुरी तक आत्मविश्वास की लहर दौड़ जाती है।…

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भैरबकुंडा: संस्कृतियों का संगम

भैरबकुंडा: सीमाओं से आगे, संस्कृतियों का संगम भूटान की सीमाओं पर भारत की सीमाएँ केवल मानचित्र की रेखाएं नहीं हैं, वे तो संस्कृतियों, इतिहास और आत्मीयता के जीवंत संगम स्थल हैं। असम के उदलगुड़ी जिले में वसे भैरबकुंडा इसी वक्तव्य का सर्वोत्तम उदाहरण है। यह भारत का ऐसा प्रथम गाँव है, जहां बँटवारे की कथा…

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भारत का पहला हरित युद्धपोत

भारत का पहला इलेक्ट्रिक वॉरशिप भारतीय नौसेना ने रणनीतिक साझेदारी के एक नए अध्याय की ओर कदम बढ़ाया है। रोल्स-रॉयस के साथ मिलकर भारत का पहला इलेक्ट्रिक वॉरशिप विकसित करने की योजना न केवल एक तकनीकी उपलब्धि है, बल्कि हमारी हरित ऊर्जा के प्रति अनवरत प्रतिबद्धता का सबूत भी है। इस पोत में लगे इलेक्ट्रिक…

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भारत का नया अदृश्य कवच

भारत का नया अदृश्य कवच – सीमाओं पर विश्वास की अमिट छाप रक्षा तकनीक के क्षेत्र में एक नया युग आरंभ हो चुका है, और इसका नाम है Passive Coherent Location Radar (PCLR)। यह साधन Low Observable Detection Network का प्रमुख अंग है—एक ‘एंटी-स्टील्थ रडार ग्रिड’ जो पारंपरिक रडारों की कमजोरियों पर प्रहार करता है।…

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विकसित भारत का द्वार

उत्तर–पूर्व भारत: विकसित भारत का द्वार भारत की पावन भूमि पर उदीयमान सूर्य का प्रथम स्पर्श जहाँ होता है, वह उत्तर–पूर्व का यह दिव्य प्रांत आज राष्ट्र की नवीन आशाओं का केंद्र बन गया है। जो कभी केवल ‘फ्रंटियर रीजन’ कहा जाता था, वह आज विकास की ‘फ्रंट रनर’ बनने की दिशा में अग्रसर है।…

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तक्सिंग, अरुणाचल प्रदेश

आत्मनिर्भरता की मिसाल

तक्सिंग गाँव: सीमांत विकास से आत्मनिर्भरता की मिसाल अरुणाचल प्रदेश के तवांग ज़िले में स्थित तक्सिंग गाँव, सागरस्तर से लगभग 3,200 मीटर की ऊँचाई पर बसा एक छोटा सा कस्बा है। चीन की अक्साई चिन या दक्षिण तकलाकोटी सीमा रेखा से मात्र 8 किलोमीटर दूर रहने के कारण यह क्षेत्र सदैव सैन्य व सामरिक परिदृश्य…

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अमृत सागर, अमर राष्ट्र

अमृत सागर, अमर राष्ट्र: भारत का समुद्री सुरक्षा मंत्र अमृत सागर, अमर राष्ट्र: भारत का समुद्री सुरक्षा मंत्र जल की लहरों पर टिकी हमारी समुद्री सीमाएँ न सिर्फ भारत के भौगोलिक विस्तार को प्रमाणित करती हैं, बल्कि आर्थिक, पर्यावरणीय एवं सुरक्षा के विविध आयामों में हमारी राष्ट्रीय संप्रभुता की आधारशिला भी हैं। 11,098 किलोमीटर की…

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अक्षय सीमा, अखंड राष्ट्र

अक्षय सीमा, अखंड राष्ट्र: भू-सीमा-सुरक्षा के सूत्र भारत की भू-सीमाओं का प्रबंधन राष्ट्रीय सुरक्षा की आधारशिला है। 15,106 किलोमीटर भूमि सीमा और 11,098 किलोमीटर तटीय सीमा के साथ भारत की सीमा प्रबंधन व्यवस्था में निहित जटिलताओं, चुनौतियों और समसामयिक समाधानों का विस्तृत विवरण जानना आवश्यक है। ‘एक सीमा, एक बल’ के सिद्धांत पर आधारित वर्तमान…

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सीमाओं पर विश्वास की अमिट छाप

भारत का अदृश्य कवच: स्टील्थ युग का अंत निकट भारत की रक्षा तकनीक अब एक नए आयाम में प्रवेश कर चुकी है। ‘भारत का अदृश्य कवच’  –  यह कोई मिथक नहीं, बल्कि हकीकत बनता विज्ञान है। भारतीय रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने हाल ही में Passive Coherent Location Radar (PCLR) प्रणाली का सफल…

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जाग्रत सीमा, उज्ज्वल राष्ट्र

               जाग्रत सीमा, उज्ज्वल राष्ट्र: सुरक्षित सीमा, सजग नागरिक भारत की छब्बीस हज़ार दो सौ निन्यानवे दशमलव आठ किलोमीटर लंबी सीमा-रेखा केवल मानचित्र पर उठी कोई सूखी रेखा नहीं, वह तो मानो माता की देह पर स्नेह से डला हुआ एक वस्त्र है – जैसे माँ अपने आँचल से…

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सीमाओं पर सीमाहीन नवाचार

सीमावर्ती क्षेत्रों में नवाचार से अभिप्राय उन क्रियात्मक और तकनीकी उपायों, प्रक्रियाओं तथा स्थानीय-आधारित समाधानों से है जो सीमाओं की समग्र सुरक्षा, सतर्कता एवं सामाजिक-आर्थिक समृद्धि को बल प्रदान करते हैं। इनमें अग्रणी उदाहरण हैं: ड्रोन एवं AI तंत्र द्वारा सीमा निगरानी, वाइब्रेंट विलेज मॉडल के माध्यम से स्थानीय उद्योगों का डिजिटलीकरण, अल्पाइन पर्यटन के…

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सेमिनार – भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा

डॉ. अम्बेडकर इंटरनेशनल सेंटर (DAIC) में 27 अक्टूबर 2024 को “भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा” पर एक विशिष्ट सेमिनार का आयोजन किया गया। अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद (ABPSSP) और सीमा जागरण मंच द्वारा आयोजित इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में राष्ट्रीय सुरक्षा के विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत चर्चा की गई। कार्यक्रम का उद्देश्य पारंपरिक और गैर-पारंपरिक…

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मंथन 2024

मंथन 2024 मंथन विवरणिका / Manthan Brochure in Hindi and English कार्यक्रम सूची / Program Schedule ( View ) मंथन मार्गदर्शिका / Manthan Margdarshika in Bilingual ( View ) सीमा जागरण मंच विवरणिका / Seema Jagran Manch Brochure ( View ) सीमा संघोष पत्रिका ( प्रथम गाँव ) / Seema Sanghosh Magazine ( Pratham Gaon…

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उद्घाटन – सीमा संघोष विशेषांक 2024

दिल्ली विश्वविद्यालय के दिल्ली कॉलेज ऑफ आर्ट्स एंड कॉमर्स कॉलेज में शुक्रवार 8 मार्च को ‘सीमा संघोष विशेषांक 2024’ का विमोचन किया गया। वहीं, सीमा जागरण मंच की आधिकारिक वेबसाइट को भी लॉन्च किया गया। इस दौरान श्री आर वेंकटरामनी जी (अटॉर्नी जनरल ऑफ इंडिया), श्री केपी महादेवस्वामी जी (अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक, एनबीसीसी), श्री…

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पोस्टर विमोचन कार्यक्रम

आज सीमा जागरण मंच,दिल्ली प्रांत के झंडेवालान विभाग द्वारा दिल्ली विश्वविद्यालय में पोस्टर विमोचन कार्यक्रम का आयोजन किया गया।इस कार्यक्रम में दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर ए.के.भागी, विभागाध्यक्ष प्रोफेसर संगीत रागी एवं प्रोफेसर श्रीप्रकाश सिंह जी ने पोस्टर विमोचन किया।

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