जम्मू–कश्मीर में सुरक्षा और पुनर्वास की नई कहानी
जम्मू–कश्मीर प्रशासन ने सीमांत क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों की सुरक्षा और बाढ़–प्रभावित परिवारों के पुनर्वास को लेकर दो महत्वपूर्ण प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजे हैं। पहला प्रस्ताव सीमा पर दुश्मनों की गोलाबारी से बचाने के लिए नए बंकरों के निर्माण से जुड़ा है, जबकि दूसरा प्रस्ताव बाढ़ और सीमा पार से पाक गोलाबारी में क्षतिग्रस्त घरों के पुनर्निर्माण एवं मुआवज़े से संबंधित है। यह निर्णय सीमा पर रहने वाले लोगों की समस्याओं को देखते हुए लिया गया है। क्योंकि सीमांत गांव राष्ट्र की पहली सुरक्षा–ढाल हैं।
सीमांत नागरिकों का जीवन खतरे में
जम्मू–कश्मीर के लगभग 200 से अधिक गाँव पाकिस्तान की ओर से होने वाली गोलाबारी की चपेट में आते रहे हैं। तलपट, अरनिया, सुचेतगढ़, कठुआ और पुंछ–राजौरी की पट्टियाँ वर्षों से गोलीबारी से प्रभावित रहे हैं। सीमा पार से दागे गए मोर्टार,शेल और मशीन–गन फायरिंग से आम नागरिकों के जीवन को खतरा रहता है।ऐसे में बंकर केवल सैन्य आवश्यकता नहीं, बल्कि मानवीय सुरक्षा का अनिवार्य आधार हैं।

बंकर का प्रतीकात्मक फोटो
बताया जा रहा है कि कश्मीर में अब तक 1,177 व्यक्तिगत और 129 सामुदायिक बंकर बनाए गए हैं, लेकिन लगातार बढ़ती गोलाबारी और नए खतरों को देखते हुए बंकर निर्माण की आवश्यकता अधिक महसूस हो रही है। प्रशासन ने नए बंकरों के निर्माण और मरम्मत का विस्तृत प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा है।ताकि कोई भी परिवार बिना सुरक्षा विकल्पों के गोलाबारी का सामना न करे।
ऑपरेशन सिंदूर: पुनर्वास का नया अध्याय
पिछले महीनों में पाकिस्तान की तरफ से हुई भारी गोलाबारी में सीमा पर कई घर क्षतिग्रस्त हुए, जबकि कुछ पूरी तरह ढह गए। इस संकट को देखते हुए उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के अंतर्गत एक बड़ा पुनर्वास अभियान शुरू किया है। इसके पहले चरण में 350 नए घरों का निर्माण शुरू कर दिया गया है।
इन घरों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इन्हें आधुनिक मानकों पर तैयार किया जा रहा है–
- तीन बेडरूम
- रसोई और शौचालय सहित सभी मूलभूत सुविधाएँ
- भूकंपरोधी निर्माण
- सीमा–क्षेत्रों की जलवायु के अनुरूप संरचना

बंकर का प्रतीकात्मक फोटो
इस परियोजना के लिए 35 करोड़ रुपये की सहायता दी जा रही है। प्रशासन ने कहा है कि यह केवल घरों का निर्माण नहीं, बल्कि सीमांत परिवारों के लिए जीवन को फिर से पटरी पर लाने की दिशा में ठोस प्रयास है।
बाढ़ पीड़ितों को मुआवज़ा
गोलाबारी के अलावा इस वर्ष कई क्षेत्रों में बाढ़ ने किसानों और ग्रामीणों को भारी नुकसान पहुँचाया है। कई परिवारों के खेतों के फसल डूब गए, पशुधन नष्ट हुआ और आवास असुरक्षित हो गए। प्रशासन ने मुआवज़े का प्रस्ताव केंद्र को भेजा है। जिसके बाद पुनर्वास की व्यवस्था हो सके।
उपराज्यपाल ने कहा कि जम्मू–कश्मीर प्रशासन का लक्ष्य ‘न कोई बेघर; (Zero homelessness) को साकार करना है ताकि आपदा और गोलीबारी के समय लोगों की सुरक्षा की जा सके।
स्थानीय जनता को राहत
सीमावर्ती क्षेत्रों में रह रहे लोगों को इन निर्णयों के बाद राहत की किरण नजर आ रही है। कई परिवारों का मानना है कि कि बंकरों की उपलब्धता और नए घरों का निर्माण उनके बच्चों की भविष्य के लिए महत्वपूर्ण कदम है। केंद्र सरकार से स्वीकृति मिलते ही बंकर निर्माण और मुआवज़ा राशि मिलने की उम्मीद है, जो सीमावर्ती इलाके में रह रहे लोगों के लिए नई रैाशनी लेकर आएगा।








