नई दिल्ली, 5 मई 2026: किरोड़ी मल कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय ने सीमा जागरण मंच, दिल्ली के सहयोग से अकादमिक ऑडिटोरियम में “Know Our Borders” कार्यक्रम का आयोजन किया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य भारत की सीमा सुरक्षा, विवादों एवं उभरती चुनौतियों पर सार्थक एवं सूचित संवाद को प्रोत्साहित करना था।

कार्यक्रम की अध्यक्षता किरोड़ी मल कॉलेज के प्राचार्य प्रो. दिनेश खट्टर ने की। मुख्य अतिथि लेफ्टिनेंट जनरल संजय कुलकर्णी (सेवानिवृत्त) ने भारत की सीमाओं की संरचना पर विस्तृत व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने पाकिस्तान के साथ पश्चिमी सीमा, चीन के साथ उत्तरी सीमा तथा नेपाल, भूटान, बांग्लादेश और म्यांमार के साथ पूर्वी सीमाओं पर विशेष प्रकाश डाला। उन्होंने नियंत्रण रेखा (LoC) पर सीमा-पार आतंकवाद, वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर तनाव एवं विवाद, तथा पूर्वी सीमाओं की संवेदनशीलता जैसे क्षेत्र-विशिष्ट चुनौतियों को रेखांकित किया। साथ ही, उन्होंने समेकित सीमा प्रबंधन, उन्नत निगरानी तकनीकों, आधारभूत संरचना के विकास एवं सुदृढ़ नागरिक-सैन्य समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया।
दिल्ली विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. निहार आर. नायक ने अपने मुख्य वक्तव्य में सीमा-पार आतंकवाद, अवैध आव्रजन और घुसपैठ जैसी प्रमुख चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने घुसपैठ के प्रयासों के रुझानों का विश्लेषण करते हुए बताया कि कड़ी निगरानी और प्रभावी उपायों के कारण इनमें समय-समय पर उतार-चढ़ाव देखा गया है।

उन्होंने सरकार द्वारा उठाए गए कदमों जैसे स्मार्ट फेंसिंग, सीमा अवसंरचना का विस्तार, बेहतर खुफिया समन्वय एवं कूटनीतिक प्रयासों का उल्लेख किया। डॉ. नायक ने अवैध आव्रजन के सामाजिक-आर्थिक और सुरक्षा संबंधी प्रभावों का भी विश्लेषण करते हुए ऐसी नीतियों की आवश्यकता बताई जो सख्त होने के साथ-साथ मानवीय भी हों।
कार्यक्रम में उपस्थित सीमा जागरण मंच के सदस्यों में राजेंद्र गोयल, श्याम नारायण पांडेय, सुमन दास, जगदीश बिश्नोई, राहुल वर्मा, आलोक सिंह, अमन राय, सिद्धार्थ, लव कुमार, रितिक, आर्यन, श्याम आदि शामिल थे। कार्यक्रम में दिल्ली विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के छात्र-छात्राओं ने भाग लिया और सक्रिय रूप से चर्चा में सहभागिता की।
वक्ताओं ने नागरिकों, विशेषकर युवाओं के बीच सीमावर्ती क्षेत्रों की रणनीतिक महत्ता के प्रति जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। कार्यक्रम का समापन एक संवादात्मक सत्र के साथ हुआ, जिसमें छात्रों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े विषयों पर अपने विचार प्रस्तुत किए। इस संवाद ने उन्हें इन मुद्दों पर गंभीर चिंतन और सार्थक विमर्श के लिए प्रेरित किया।




