राष्ट्रगीतः वन्दे मातरम्
वर्षभर राष्ट्रीय उत्सव
(2025-2026)
150 वर्षों की गौरव-गाथा
7 नवम्बर, 1875 – यह दिन भारतीय इतिहास में स्वर्णाक्षरों से अंकित है। जब पश्चिम बंगाल के नैहाटी नगर स्थित कंधालपाड़ा गाँव में, एक आम के पेड़ के नीचे बैठकर बंकिम चन्द्र चट्टोपाध्याय ने अक्षय नवमी के पावन अवसर पर वन्दे मातरम् की रचना की, तो उन्हें शायद यह अनुमान नहीं रहा होगा कि यह गीत आने वाली सदियों में करोड़ों भारतीयों के हृदय में धड़कता रहेगा, उनकी साँसों में बसता रहेगा।
भारत सरकार ने 1 अक्टूबर, 2025 को केंद्रीय मंत्रिमंडल में देशव्यापी समारोहों को स्वीकृति दी है। 7 नवम्बर, 2025 से 7 नवम्बर, 2026 तक चलने वाले इस राष्ट्रीय स्मरणोत्सव में निम्नलिखित कार्यक्रम होंगे:
1. सामूहिक गायन: देशभर के सार्वजनिक स्थानों, विद्यालयों, महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों में ‘वन्दे मातरम्’ का सामूहिक गायन होगा।
2. साहित्यिक कार्यक्रम: इसके सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व पर चर्चाएँ और संगोष्ठियाँ होंगी।
3. प्रदर्शनियाँ: ‘आनंद मठ’ से स्वतंत्रता आंदोलन तक की यात्रा को दर्शाती डिजिटल और भौतिक प्रदर्शनियाँ आयोजित होंगी।
4. शैक्षणिक प्रतियोगिताएँ: देशभक्ति और राष्ट्रीय गौरव पर केंद्रित शैक्षणिक प्रतियोगिताएँ होंगी।
5. स्मारक सिक्का और डाक टिकट: प्रधानमंत्री द्वारा जारी किए गए हैं विशेष स्मारक चिह्न और डाक टिकट।
150 वर्षों के बाद भी, भारत का राष्ट्रगीत ‘वन्दे मातरम्’ का संदेश अमर है। न तो इसका काव्य-सौंदर्य मलिन हुआ है, न ही इसका दर्शन पुराना हुआ है। यह गीत आज भी प्रत्येक भारतीय को कहता है- “तुम्हारी मातृभूमि आह्वान कर रही है- तुम शक्ति हो, विद्या हो, धर्म हो, राष्ट्र की सेवा ही राष्ट्रधर्म है।”
वन्दे मातरम्। वन्दे मातरम्। वन्दे मातरम्।








