सीमा समाचारिकासीमा-दृष्टि

सीमा-सुदृढ़ता और ऑपरेशन ‘मेघना’ हेलि़ड्रॉप

ऑपरेशन मेघना हेलिड्रॉप : भारत की सीमाओं को अजेय बनानेवाली विजय 9 दिसंबर 1971, रात 23:30 बजे – जब पूर्वी पाकिस्तान की भूमि पाकिस्तान से आजादी के लिए कराह रही थी, आर्तनाद कर रही थी, तब भारत का आकाश गर्जन कर उठा। यह न तो मंद गूँज थी, न ही सामान्य युद्ध-घोष। यह था भारत…

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16 दिसंबर: राष्ट्र-प्रतिष्ठा का अमर पर्व

विजय दिवस: भारत के पौरुष का महानुष्ठान 16 दिसंबर केवल तिथि नहीं है, यह भारत के पौरुष की प्रतिज्ञा का उदय-दिवस है। यह वह क्षण है जब इतिहास ने भारतमाता के मस्तक पर विजय का रक्ताभ तिलक अंकित होते देखा। उस दिन सूर्य पश्चिम से नहीं, सीमाओं से उग रहा था – जहाँ भारतीय सैनिकों…

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जब भारत खड़ा हुआ, पाकिस्तान टूट गया

1971 में पाकिस्तान का विभाजन : भारत के लिए एक रणनीतिक वरदान 16 दिसंबर 1971 को जब 93,000 पाकिस्तानी सैनिकों ने भारतीय सेना के सामने अपनी बंदूकें डाल दीं, तब केवल एक सैन्य विजय हुई नहीं। हुआ था भारत के भविष्य का संरचनात्मक पुनर्निर्माण, जिसके सुदूरगामी परिणाम इस चौथाई सदी में भारत की सुरक्षा, अर्थव्यवस्था,…

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वंदे मातरम्:150 वर्षीय यात्रा के प्रेरक प्रसंग

वंदे मातरम्: इतिहास के अंतरालों में छिपे ग्यारह अनकहे सच हम सभी भारतीयों के लिए ‘वंदे मातरम्’ एक परिचित गीत है। बचपन से लेकर आज तक यह हमारी राष्ट्रीय-चेतना का एक अभिन्न अंग रहा है। इसकी धुन हमारे कानों में गूंजती है और इसके शब्द हमें देश-प्रेम की भावना से भर देते हैं। किंतु, इस…

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वन्दे मातरम्: राष्ट्रप्रेम की आत्मचेतना

वन्दे मातरम्—स्वदेश-प्रेम का वज्र-नाद भारतीय राष्ट्र-चेतना का इतिहास अप्रतिम है। जब हम उस महान राष्ट्र-चेतना को खोजते हैं तो हमारा ध्यान अवश्यमेव बंकिम चंद्र चटर्जी की ओर उन्मुख होता है और  भारत के राष्ट्रगीत ‘वन्दे मातरम्’ के प्रति हम श्रद्धावनत हो जाते हैं। ये दो शब्द संस्कृत की गहन-गरिमा से निर्मित हैं, और भारतीय जनमानस…

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त्रिशूल की छवि में शौर्य-संगीत

त्रिशूल-आकृति में वीरत्व का दिव्य प्रतीक भारतभूमि के उत्तरतम प्रांत लद्दाख की बर्फीली वादियों में, जहां देवताओं के पदचिह्न हैं, वहां गलवान घाटी की वीरभूमि पर 7 दिसम्बर 2025 को युद्ध स्मारक रूप में एक नव-मंदिर प्रतिष्ठित हुआ है। गलवान घाटी में शहीद हुए 20 भारतीय सैनिकों के सम्मान में बना यह मेमोरियल अब जनता…

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