₹2770 करोड़ की डील तय,सेना को मिलेंगे 4.25 लाख देशी CQB कार्बाइन
भारतीय सीमा की सुरक्षा के लिए रक्षा मंत्रालय ने एक अहम फैसला लिया है। अब भारतीय सीमा पर तैनात जवानों के लिए स्वदेशी निर्मित CBQ कार्बाइन मिलने का रास्ता साफ हो गया है। भारतीय सेना अब बंदूक की जगह विशेष स्वदेशी CQB कार्बाइन जवानों को सौपेंगी। रक्षा मंत्रालय ने हाल ही में कल्याणी स्ट्रैटजिक सिस्टम और अडानी समूह की रक्षा इकाई PLR Systems के साथ कुल 4.25 लाख CQB (Close Quarter Battle) कार्बाइनों के करारों का ऐलान किया। ये हल्के, तेज़ और शहरी युद्ध परिस्थितियों के लिए उपयुक्त हथियार देश की आंतरिक सुरक्षा और सीमा क्षेत्रों में तैनात जवानों की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए विकसित किए गए हैं।अब सेना को पहली खेप में देशी सीक्यूबी कार्बाइन (Close Quarter Battle Carbine) मिलेगी जो छोटी दूरी की लड़ाई के लिए बेहतर मानी जा रही है। भारतीय सेना को ₹2,770 करोड़ के सौदे में 4.25 लाख देशी सीक्यूबी कार्बाइन मिलेंगी…भारत फोर्ज 60 प्रतिशत और पीएलआर 40 % कार्बाइन बनाएगी। जिसके बाद देश की सुरक्षा में इस्तेमाल हो रहे पुराने स्टर्लिंग कार्बाइन को बदला जाएगा।
क्या है CQB कार्बाइन?
CQB कार्बाइन को खासतौर पर उस समय के लिए डिजाइन किया गया है, जब सैनिकों को नजदीकी मुकाबला करना पड़ता है। जैसे आतंकवाद विरोधी अभियान या शहरों या संकरे गलियों में ऑपरेशन। इसके अलावा CQB कार्बाइन का वजन करीब 3.3 किलो है और इसकी फायरिंग रेंज 200 मीटर तक है। इसमें 30 राउंड की मैगजीन होती है और यह आधुनिक ऑप्टिकल डिवाइस टॉर्च या साइलेंसर जैसे अटैचमेंट के साथ इस्तेमाल की जा सकती है।
यह कार्बाइन DRDO की आर्मामेंट्स रिसर्च एंड डेवलपमेंट ईस्टैब्लिशमेंट (ARDE), पुणे द्वारा डिजाइन किया गया है और India Forge के साथ साझेदारी में विकसित किया गया है। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि पूरी प्रक्रिया ने देश की रक्षा उत्पादन श्रृंखला को मजबूती दी है और ‘मेक इन इंडिया’ के लक्ष्यों को साकार करने में मदद करेगी। अधिकारियों के अनुसार ये हथियार पारंपरिक राइफलों की तुलना में कम वजन रखते हैं, तेजी से लक्ष्यों पर निशाना लगाने की क्षमता प्रदान करते हैं और बंदी-क्षेत्रीय मुकाबलों के लिये अनुकूल हैं।
जबकि आधिकारिक सूत्रों ने अभी तक सार्वजनिक तौर पर वितरण की विस्तृत समयसीमा साझा नहीं की है, रक्षा निरीक्षणों और फील्ड परीक्षणों के सकारात्मक परिणामों के बाद उम्मीद है कि अगले कुछ महीनों में सीमावर्ती फोर्सेज और आंतरिक सुरक्षा विंग को प्राथमिकता के साथ आपूर्ति शुरू हो जाएगी। सेना के अधिकारियों ने बताया कि आधुनिक और भरोसेमंद कार्बाइन से जवानों की जीतने की क्षमता और ऑपरेशनल मुक्ति दोनों बढ़ेंगी।
CQB कार्बाइन आत्मनिर्भर भारत की दिशा में नया कदम
माना जा रहा है कि इस डील से सेना को न सिर्फ अधुनिक हथियार मिलेंगे, बल्कि भारत की रक्षा निर्माण क्षमता भी मजबूत होगी। अब तक कार्बाइन जैसे हथियारों के लिए सेना को विदेशी कंपनियों पर निर्भर रहना पड़ता था, अब देश में बनी यह CQB कार्बाइन इस जरूर को भी पूरा करेगी. एक्सपर्ट्स के अनुसार, यह कार्बाइन सैनिकों की गति और सटीकता दोनों बढ़ाएगी। हल्का वजन होने की वजह से इसे लंबे ऑपरेशन में आसानी से संभाल जा सकेगा। साथ ही इसका कम रिकॉइल जवानों को तेजी से दोबारा निशाना साधने में मदद करेगा।
विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम न केवल सक्षम घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देगा, बल्कि विदेशी निर्माताओं पर निर्भरता घटाकर रणनीतिक स्वतंत्रता भी प्रदान करेगा। इसके अलावा, बड़े पैमाने पर उत्पादन से स्थानिक इकाइयों, मेंटेनेंस और लॉजिस्टिक्स में भी सुधार की संभावना है, जिससे मरम्मत और स्पेयर पार्ट्स उपलब्धता आसान होगी। घरेलू उत्पादन श्रृंखला में शामिल कंपनियों के लिए यह बड़े आदेश के साथ कौशल और रोजगार के अवसर भी बढ़ाएगा।
सुरक्षा मामलों के जानकारों ने यह भी कहा कि शहरी लड़ाई और सीक्वेंशियल रैपिड ऑपरेशंस में CQB कार्बाइन का महत्व बढ़ा है, इसलिए इसकी समय पर प्राप्ति सेना की तैनाती योजनाओं के लिहाज़ से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। पॉलिसी विशेषज्ञों के अनुसार, यह अनुबंध रक्षा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है और दीर्घकालीन रणनीतिक बचत के साथ साथ तकनीकी आत्मानुभव का माध्यम भी बनेगा। सरकार ने बताया है कि प्रशिक्षण कार्यक्रम और लॉजिस्टिकल सपोर्ट बढ़ाया जाएगा ताकि बलों को इन हथियारों का पूरा लाभ मिल सके, भविष्य में इसका निर्यात संभावनाओं पर काम किया जाएगा।








