अक्षय सीमा, अखंड राष्ट्र: भू-सीमा-सुरक्षा के सूत्र
भारत की भू-सीमाओं का प्रबंधन राष्ट्रीय सुरक्षा की आधारशिला है। 15,106 किलोमीटर भूमि सीमा और 11,098 किलोमीटर तटीय सीमा के साथ भारत की सीमा प्रबंधन व्यवस्था में निहित जटिलताओं, चुनौतियों और समसामयिक समाधानों का विस्तृत विवरण जानना आवश्यक है। ‘एक सीमा, एक बल’ के सिद्धांत पर आधारित वर्तमान प्रबंधन संरचना, तकनीकी नवाचारों का समावेश, और सीमावर्ती विकास कार्यक्रमों की समीक्षा के साथ-साथ भविष्य की रणनीति का मार्गदर्शन इस अध्ययन का मूल उद्देश्य है।
जब हम भारत की भौगोलिक महत्ता पर दृष्टि डालते हैं, तो पाते हैं कि यह देश न केवल अपनी सांस्कृतिक विविधता के लिए प्रसिद्ध है, अपितु अपनी विस्तृत सीमाओं के कारण भी विश्व मानचित्र पर एक अनूठा स्थान रखता है। स्वतंत्रता के पश्चात् जिन नीतिगत निर्णयों ने भारत की सुरक्षा व्यवस्था को आकार दिया, उनमें सीमा प्रबंधन की भूमिका सर्वोपरि रही है। वर्तमान संदर्भ में जब वैश्विक आतंकवाद, सीमा पार घुसपैठ, और द्विपक्षीय संबंधों की जटिलताएँ निरंतर चुनौती बनी हुई हैं, तब सीमा प्रबंधन की समग्र समीक्षा अत्यंत आवश्यक हो जाती है।
भारत की सीमा संरचना: एक विहंगम दृश्य
भौगोलिक विस्तार और पड़ोसी राष्ट्र
भारत की सीमाएँ सात देशों – अफगानिस्तान, पाकिस्तान, चीन, नेपाल, भूटान, बांग्लादेश और म्यांमार के साथ लगती हैं। यह विविधता न केवल भौगोलिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, अपितु प्रत्येक सीमा की अपनी विशिष्ट चुनौतियाँ और आवश्यकताएँ हैं। थार के मरुस्थल से लेकर हिमालय के हिमाच्छादित शिखरों तक, दलदली क्षेत्रों से उष्णकटिबंधीय वनों तक फैली यह सीमा रेखा भारतीय सुरक्षा व्यवस्था के समक्ष अनगिनत चुनौतियाँ प्रस्तुत करती है।
समुद्री सीमा का महत्व
भारत की 11,098 किलोमीटर तटीय सीमा तीन वर्गों में विभाजित है:
1. प्रादेशिक जल (12 समुद्री मील): संपूर्ण संप्रभुता क्षेत्र
2. सन्निहित क्षेत्र (24 समुद्री मील): निगरानी और नियंत्रण क्षेत्र
3. विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र (200 समुद्री मील): संसाधन अधिकार क्षेत्र
“एक सीमा, एक बल” का सिद्धांत
वर्तमान संगठनात्मक संरचना
भारत सरकार द्वारा अपनाया गया ‘एक सीमा, एक सीमा सुरक्षा बल’ का सिद्धांत आधुनिक सीमा प्रबंधन की आधारशिला है। इस व्यवस्था के अंतर्गत हैं:
1. सीमा सुरक्षा बल (BSF): पाकिस्तान और बांग्लादेश सीमा की सुरक्षा में संलग्न यह बल भारत का सबसे बड़ा सीमा सुरक्षा संगठन है। 1965 में स्थापित इस बल का उद्देश्य शांतिकाल में सीमा सुरक्षा और युद्धकाल में सेना के साथ सहयोग है।
2. भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP): 1962 के चीन युद्ध के पश्चात् स्थापित यह बल चीन सीमा की सुरक्षा का दायित्व संभालता है। उच्च हिमालयी क्षेत्रों में इसकी तैनाती विशेष प्रशिक्षण और उपकरणों की माँग करती है।
3. सशस्त्र सीमा बल (SSB): नेपाल और भूटान की मित्र देशों के साथ सीमा प्रबंधन में यह बल महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। खुली सीमा की नीति के कारण यहाँ चुनौती सुरक्षा और मित्रता के बीच संतुलन स्थापित करने की है।
4. असम राइफल्स: भारत का सबसे पुराना अर्धसैनिक बल, जो म्यांमार सीमा की सुरक्षा के साथ-साथ पूर्वोत्तर राज्यों में आंतरिक सुरक्षा की जिम्मेदारी भी संभालता है।
समकालीन चुनौतियाँ: एक बहुआयामी विश्लेषण
पाकिस्तान सीमा की जटिलताएँ
पाकिस्तान के साथ सीमा भारत की सबसे संवेदनशील और चुनौतीपूर्ण सीमा है। यहाँ की प्रमुख समस्याओं में हैं:
1. सीमा पार आतंकवाद: पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद भारत की सुरक्षा के लिए निरंतर खतरा बना हुआ है। कारगिल युद्ध (1999) से लेकर पुलवामा हमले (2019) तक की घटनाएँ इस चुनौती की गंभीरता को दर्शाती हैं।¹
2. मादक पदार्थों की तस्करी: अफगानिस्तान से आने वाले हेरोइन के लिए पंजाब सीमा मुख्य मार्ग बन गई है। इससे न केवल सुरक्षा बल्कि सामाजिक समस्याएँ भी उत्पन्न हो रही हैं।
3. नकली मुद्रा प्रचलन: ISI द्वारा संचालित नकली भारतीय मुद्रा का प्रचलन भारतीय अर्थव्यवस्था को हानि पहुँचाने का एक सुनियोजित प्रयास है।
चीन सीमा की रणनीतिक चुनौती
चीन के साथ 3,488 किलोमीटर लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) भारत की सबसे जटिल सीमा है:
1. क्षेत्रीय विवाद: अक्साई चिन और अरुणाचल प्रदेश के कुछ भागों पर चीन के दावे निरंतर तनाव का कारण हैं। गलवान घाटी की घटना (2020) इस समस्या की गंभीरता को दर्शाती है।
2. अवसंरचना की कमी: चीन की तुलना में भारत की सीमावर्ती अवसंरचना अपेक्षाकृत कम विकसित है, जो सुरक्षा दृष्टि से चुनौती है।
3. उच्च ऊंचाई की कठिनाइयाँ: 14,000 फीट से अधिक ऊंचाई पर तैनात सैनिकों के लिए विशेष चिकित्सा सुविधाएँ और उपकरण आवश्यक होते हैं।
बांग्लादेश सीमा की सामाजिक समस्याएँ
4,096 किलोमीटर लंबी यह सीमा भारत की सबसे लंबी सीमा है। समस्याएँ हैं:
1. अवैध प्रवासन: जनसांख्यिकीय दबाव के कारण बांग्लादेश से निरंतर अवैध प्रवासन होता रहता है, जो असम और पश्चिम बंगाल में विशेष समस्या है।¹⁶
2. मानव तस्करी: महिलाओं और बच्चों की तस्करी इस सीमा की गंभीर समस्या है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आँकड़ों के अनुसार सबसे अधिक मानव तस्करी के मामले इसी सीमा से आते हैं।
तकनीकी नवाचार और आधुनिकीकरण
व्यापक एकीकृत सीमा प्रबंधन प्रणाली (CIBMS)
आधुनिक सीमा प्रबंधन में तकनीक की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है। CIBMS के अंतर्गत आते हैं:
1. स्मार्ट सेंसर नेटवर्क: भूमिगत सेंसर, कंपन संवेदक, और ऑप्टिकल फाइबर सेंसर घुसपैठियों की पहचान में सहायक हैं।
2. ड्रोन निगरानी: BSF का पहला समर्पित ड्रोन स्क्वाड्रन 2020 में स्थापित किया गया, जो 24×7 निगरानी प्रदान करता है।
3. कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI): संदिग्ध गतिविधियों की पहचान और विश्लेषण के लिए AI तकनीक का प्रयोग किया जा रहा है।
एकीकृत चेक पोस्ट (ICP) की आधुनिकता
पेट्रापोल, अटारी, और अगरतला जैसे ICP में उन्नत स्कैनिंग उपकरण, बायोमेट्रिक पहचान प्रणाली, और डिजिटल दस्तावेज़ सत्यापन व्यवस्था स्थापित की गई है।
सीमावर्ती विकास कार्यक्रम
सीमा क्षेत्र विकास कार्यक्रम (BADP)
1987 में प्रारंभ किया गया यह कार्यक्रम सीमावर्ती जिलों के समग्र विकास का लक्ष्य रखता है:
मुख्य उद्देश्य:
1. बुनियादी ढाँचे का विकास (सड़क, बिजली, दूरसंचार)
2. स्वास्थ्य और शिक्षा सुविधाओं का विस्तार
3. कृषि उत्पादकता में वृद्धि
4. रोजगार के अवसर सृजन
5. वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम (VVP)
2023 में प्रारंभ इस महत्वाकांक्षी योजना का उद्देश्य चीन सीमा के निकटवर्ती 8,500 से 9,000 गाँवों का विकास हुआ है। प्रमुख घटक:
1. अत्याधुनिक अवसंरचना निर्माण
2. डिजिटल कनेक्टिविटी
3. पर्यावरण संरक्षण
4. पर्यटन विकास
5. स्थानीय उद्योग प्रोत्साहन
भविष्य की रणनीति और सुधार की दिशा
संस्थागत सुधार
एकीकृत कमांड संरचना: सभी सीमा सुरक्षा बलों के लिए समान मानव संसाधन नीति, प्रशिक्षण पद्धति, और उपकरण मानकीकरण आवश्यक है। इसकी शुरुआत हो गई है:
क्षमता निर्माण: अत्याधुनिक हथियार प्रणाली, साइबर सुरक्षा, और खुफिया तंत्र में निवेश बढ़ाना होगा।
द्विपक्षीय सहयोग
सूचना साझाकरण: पड़ोसी देशों के साथ आतंकवाद, तस्करी, और अन्य अपराधों की रोकथाम हेतु खुफिया जानकारी का आदान-प्रदान।
संयुक्त गश्त: विशिष्ट परिस्थितियों में पड़ोसी देशों के सुरक्षा बलों के साथ संयुक्त अभियान।
तकनीकी उन्नयन
1. 5G कनेक्टिविटी: सीमावर्ती क्षेत्रों में तीव्र इंटरनेट सेवा सुरक्षा संचार को मजबूत बनाएगी।
2. सैटेलाइट निगरानी: ISRO के उपग्रह नेटवर्क का व्यापक उपयोग सीमा निगरानी में किया जाना चाहिए।
आर्थिक आयाम और व्यापारिक सुरक्षा
कस्टम्स आधुनिकीकरण
1. डिजिटल प्लेटफॉर्म: ICEGATE और SWIFT जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म से व्यापारिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता आई है।
2. रिस्क असेसमेंट: AI आधारित जोखिम मूल्यांकन से संदिग्ध कार्गो की पहचान में सुधार हुआ है।
रोजगार सृजन
सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा बलों की तैनाती से प्रत्यक्ष रोजगार के साथ-साथ स्थानीय व्यापार, कृषि, और सेवा क्षेत्र में अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर बढ़े हैं।
समस्या समाधान के सुझाव
तत्काल आवश्यकताएँ
1. मानव संसाधन वृद्धि: सभी सीमा सुरक्षा बलों में रिक्त पदों की शीघ्र भर्ती
2. उपकरण आधुनिकीकरण: नाइट विजन, थर्मल इमेजिंग, और संचार उपकरणों का उन्नयन
3. प्रशिक्षण सुधार: साइबर सिक्यूरिटी और आधुनिक युद्ध तकनीकों का प्रशिक्षण
दीर्घकालिक योजना
1. अनुसंधान एवं विकास: DRDO और निजी क्षेत्र के सहयोग से स्वदेशी सुरक्षा तकनीक विकास
2. शिक्षा और स्वास्थ्य: सीमावर्ती क्षेत्रों में विश्वस्तरीय शैक्षणिक और चिकित्सा संस्थानों की स्थापना
3. पर्यावरण संरक्षण: जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को ध्यान में रखते हुए सतत विकास योजना
भारत की सीमा प्रबंधन व्यवस्था एक जटिल और बहुआयामी चुनौती है, जिसमें सुरक्षा, आर्थिक, सामाजिक, और तकनीकी सभी पहलू समाहित हैं। जैसे किसी वृक्ष की जड़ें मजबूत हों तो वह तूफानों का सामना कर सकता है, वैसे ही मजबूत सीमा प्रबंधन राष्ट्र की सुरक्षा की जड़ है। वर्तमान में भारत “एक सीमा, एक बल” के सिद्धांत पर आधारित प्रभावी प्रणाली विकसित कर रहा है। आधुनिक तकनीक का उपयोग, सीमावर्ती क्षेत्रों का विकास, और पड़ोसी देशों के साथ सहयोग भारत की भावी सीमा प्रबंधन रणनीति के मुख्य स्तंभ हैं। वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम और BADP जैसी योजनाओं से न केवल सुरक्षा मजबूत होती है बल्कि सीमावर्ती समुदायों का कल्याण भी सुनिश्चित होता है।
भविष्य में भारत को चीन और पाकिस्तान जैसे प्रतिद्वंद्वी देशों की बढ़ती चुनौतियों का सामना करने के लिए अपनी सीमा प्रबंधन क्षमताओं को और भी मजबूत बनाना होगा। इसके लिए निरंतर नवाचार, तकनीकी उन्नयन और राष्ट्रीय सुरक्षा में निवेश आवश्यक है। वस्तुतः भारत की सच्ची स्वतंत्रता तब होगी जब हमारी सीमाएँ सुरक्षित होंगी और हमारे नागरिक निर्भय होकर जी सकेंगे। यही भावना भारत की आधुनिक सीमा प्रबंधन नीति की आत्मा है।








