
कारगिल की बर्फीली चोटियों पर उस वीर ने अपने प्राण न्योछावर कर दिए, जिन्होंने बिना हवाई सहायता के अपने साथी सैनिकों के साथ मिलकर पाकिस्तानी दुश्मनों का सामना किया। पिंपल द्वितीय की चोटी पर, रॉकेट के प्रहार के बावजूद, देश के लिए युद्ध जारी रखा। उनकी वीरता उस सूर्य की तरह थी, जो तमाम अंधकार को चीरकर उदित हो जाता है। इस वीर का नाम भारतीय सैनिकों के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अंकित है।

