चिकन नेक पर चौकसी: सिलीगुड़ी कॉरिडोर के इर्द-गिर्द भारत का नया सुरक्षा कवच
भारत अपनी सबसे संवेदनशील और रणनीतिक जीवनरेखा सिलीगुड़ी कॉरिडोर (चिकन नेक) के चारों ओर सुरक्षा घेरा कसने जा रहा है। पूर्वोत्तर भारत को शेष देश से जोड़ने वाला यह महज़ 22 किलोमीटर चौड़ा गलियारा केवल भौगोलिक संपर्क नहीं, बल्कि भारत की सामरिक एकता की धुरी है। बदलते क्षेत्रीय समीकरणों, बांग्लादेश-म्यांमार सीमा पर तनाव और चीन के दीर्घकालिक रणनीतिक दबाव के बीच इस कॉरिडोर की सुरक्षा राष्ट्रीय प्राथमिकता बनती जा रही है।
मिज़ोरम में चौथे आर्मी बेस की तैयारी
मिज़ोरम में भारत-बांग्लादेश सीमा के निकट चौथे सैन्य अड्डे की स्थापना पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, पूर्वी आर्मी कमांड के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल आर. सी. तिवारी ने 19 दिसंबर 2025 को मिज़ोरम के संभावित इलाकों का दौरा किया। इस दौरान परवा और सिलसुरी को थर्ड कॉर्प्स की एक बटालियन की तैनाती के लिहाज़ से महत्वपूर्ण माना गया है।इस प्रस्ताव की समीक्षा 17 माउंटेन स्ट्राइक कॉर्प्स कर रही है, जिसका उद्देश्य सीमावर्ती इलाकों में निगरानी और जवाबी कार्रवाई की क्षमता को बढ़ाना है।

चिकेन नेक का सैन्य महत्व
तीन नए गैरीसन, एक सुरक्षा घेरा
भारतकीय सेना की ओर से यह कोई पहला पहला नही है। इससे पहले पश्चिम बंगाल के चोपड़ा, बिहार के किशनगंज और असम के धुबरी में तीन नए सैन्य गैरीसन स्थापित कर चुकी है। इन ठिकानों के साथ सिलीगुड़ी कॉरिडोर के चारों ओर एक बहु-स्तरीय सुरक्षा घेरा को लेकर गहन मंथन चल रहा है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यह तैनाती पूर्वोत्तर को अलग-थलग करने की किसी भी साजिश को निष्फल करने की रणनीति का हिस्सा है।
बांग्लादेश फैक्टर और बदलते हालात

फोटो: सिलीगुड़ी कॉरिडोर
नवंबर 2025 की रक्षा रिपोर्टों के मुताबिक, बांग्लादेश और चीन से उत्पन्न संभावित चुनौतियों ने इस क्षेत्र को और संवेदनशील बना दिया है। शेख हसीना के बाद बांग्लादेश में बदले राजनीतिक-सामाजिक हालात और वहां सक्रिय भारत-विरोधी तत्वों द्वारा ‘चिकन नेक’ को निशाना बनाने की धमकियां भारतीय सेना के लिए गंभीर चिंता का विषय रही हैं। ऐसे में सिलीगुड़ी कॉरिडोर के आसपास सैन्य मौजूदगी बढ़ाना एक आवश्यक कदम माना जा रहा है।
BSF की समानांतर तैयारी
सेना के साथ-साथ सीमा सुरक्षा बल (BSF) भी पूर्वी सीमा पर बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे को मजबूत कर रहा है। BSF 85 बॉर्डर आउट पोस्ट्स को आधुनिक कंपोजिट हब में अपग्रेड कर रहा है। इसके अलावा अगले पांच वर्षों में मिज़ोरम और कछार सेक्टर में 100 से अधिक बंकर, ब्लास्ट-प्रूफ शेल्टर और अन्य रक्षा ढांचे बनाए जाने की योजना है। इन उपायों का उद्देश्य राज्य और गैर-राज्य दोनों तरह के खतरों से प्रभावी ढंग से निपटना है।
रणनीति का व्यापक संदेश
सेना और BSF की इन संयुक्त तैयारियों को केवल सीमावर्ती सुरक्षा के तौर पर नहीं, बल्कि एक स्पष्ट रणनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है। भारत अपनी भौगोलिक एकता, पूर्वोत्तर से अटूट संपर्क और राष्ट्रीय संप्रभुता पर किसी भी तरह का जोखिम स्वीकार नहीं करेगा। सिलीगुड़ी कॉरिडोर के चारों ओर कसता यह सुरक्षा कवच आने वाले वर्षों में पूर्वी भारत की रणनीतिक स्थिरता का आधार बनने जा रहा है।








