1971 में पाकिस्तान का विभाजन : भारत के लिए एक रणनीतिक वरदान
16 दिसंबर 1971 को जब 93,000 पाकिस्तानी सैनिकों ने भारतीय सेना के सामने अपनी बंदूकें डाल दीं, तब केवल एक सैन्य विजय हुई नहीं। हुआ था भारत के भविष्य का संरचनात्मक पुनर्निर्माण, जिसके सुदूरगामी परिणाम इस चौथाई सदी में भारत की सुरक्षा, अर्थव्यवस्था, और भू-राजनीतिक स्थिति को मौलिक रूप से रूपांतरित कर गए हैं।
रणनीतिक विश्लेषण

फोटो: भारत पाक युद्ध
अगर 1971 में विभाजन न होता तो भारतीय सीमा पर संकट की भयानक संभावना थी। यदि पूर्वी पाकिस्तान स्वतंत्र न होता, तो 4,096.7 किलोमीटर की पूर्वोत्तर सीमा पर शत्रुपक्षी पाकिस्तान का सीधा नियंत्रण होता। सीमावर्ती राज्य पश्चिम बंगाल, असम, मेघालय, मिजोरम और त्रिपुरा दुश्मन से घिरे होते। सिलीगुड़ी कॉरिडोर (भारत की पूर्वोत्तर की जीवनरेखा) को पाकिस्तानी सेना द्वारा सीधा खतरा होता। सैन्य दबाव की विभीषिका होती। पाकिस्तान ने 1971 में पूर्वी पाकिस्तान यानी अब के बांग्लादेश में 55,000 सैनिक तैनात किए थे। अगर पाकिस्तान का विभाजन नहीं होता, तो भारत को 80,000-100,000 अतिरिक्त सैनिक इसी क्षेत्र में स्थायी रूप से तैनात रखने पड़ते। यह भारत के रक्षा बजट को 15,000-20,000 करोड़ रुपये वार्षिक अतिरिक्त खर्च करने के लिए बाध्य करता।
भारत के रक्षा बजट पर प्रभाव पड़ता। 2024-2025 में भारत का रक्षा बजट 86.1 बिलियन अमेरिकी डॉलर है, पाकिस्तान का मात्र 10.2 बिलियन डॉलर, अर्थात् लगभग 8.5 गुना अंतर। यदि 1971 में विभाजन न होता तो पाकिस्तान की कुल सीमा 7,000 किलोमीटर से अधिक होती। जनसंख्या 380-400 मिलियन होती। पूर्वी पाकिस्तान का कोयला, प्राकृतिक गैस, कृषि संसाधन पाकिस्तान को अधिक आर्थिक शक्ति देते। इससे पाकिस्तान का रक्षा बजट 20-25 बिलियन डॉलर हो सकता था। तब भारत को अतिरिक्त 30,000-50,000 करोड़ रुपये वार्षिक रक्षा खर्च करना पड़ता। यह कुल रक्षा बजट को 15-20% तक बढ़ा देता। शिक्षा, स्वास्थ्य, बुनियादी ढाँचे पर कम खर्च होता। भारत की आर्थिक विकास दर 1-1.5% धीमी हो जाती। भारत को 1971-2024 के बीच 53 वर्षों में 425-530 बिलियन अमेरिकी डॉलर अतिरिक्त खर्च करना पड़ता।
आर्थिक लाभ: भारत-बांग्लादेश व्यापार में विस्फोट
| वर्ष | व्यापार मूल्य अमेरिकी डॉलर | मील का पत्थर |
| 1971 | 0 | युद्ध के तुरंत बाद |
| 1980 | 100 मिलियन | सामान्यकरण शुरू |
| 2000 | 1.5 बिलियन | 15x वृद्धि |
| 2010 | 5 बिलियन | वैश्विक एकीकरण |
| 2024 | 13.51 बिलियन | 135x वृद्धि |
53 वर्षों में कुल व्यापार मूल्य लगभग 150 बिलियन डॉलर रहा। भारत का व्यापारिक अधिशेष 50-60 बिलियन डॉलर (भारत को लाभ) रहा। यदि विभाजन न होता तो पूर्वी पाकिस्तान के कपड़ा-उद्योग और अन्य संसाधनों पर पश्चिमी पाकिस्तान का नियंत्रण होता। भारत का बांग्लादेश व्यापारिक साझेदार नहीं होता। सीमावर्ती राज्यों को व्यापार के द्वारा सुदृढ़ता नहीं मिलती।
सीमा सुरक्षा और सीमांतजन कल्याण
घुसपैठ और तस्करी में जो परिवर्तन हुआ, वह नहीं होता। यह समस्या और जटिल होती। वर्तमान परिस्थिति (1971 के बाद) पाकिस्तानी घुसपैठ में 90% से अधिक की कमी हुई है। बांग्लादेशी घुसपैठ का नियंत्रण कानूनी तंत्र से निपटा जाता है। सीमा घटनाओं में 2011 के बाद 95% से अधिक की कमी हुई है।

फोटो: 1971 भारत पाक सेना एक तुलना
सीमावर्ती जनों की आय में विस्फोट
| वर्ष | प्रति व्यक्ति आय अमेरिकी डॉलर में | वृद्धि |
| 1971 | 200/वर्ष | — |
| 1985 | 500/वर्ष | 2.5x |
| 2000 | 1,500/वर्ष | 7.5x |
| 2012 | 3,000/वर्ष | 15x |
| 2024 | 6,500/वर्ष | 32x |
यदि विभाजन न होता तो 40-50 मिलियन पूर्वी पाकिस्तानी (बांग्लाभाषी) भारत की ओर उत्पीड़न से भाग सकते थे। भारत की जनसांख्यिकीय संरचना कहीं अधिक परिवर्तित होती।
वैश्विक राजनीति में भारत की स्थिति
1971 के बाद की भारत दक्षिण एशिया की सर्वप्रथम शक्ति के रूप में स्थापित हुआ। अमेरिका, सोवियत संघ जैसी वैश्विक शक्तियाँ भारत की क्षमता को स्वीकार करने लगीं। बांग्लादेश, भूटान, नेपाल के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध में प्रगाढ़ता आई।
आर्थिक विकास में परिणाम:
| मेट्रिक | 1971 | 2024 | वृद्धि |
| जीडीपी | 36 बिलियन डॉलर | $3.7 ट्रिलियन | 102x |
| रक्षा बजट | 2,500 करोड़ रुपये | 6.81 ट्रिलियन | 2,724x |
| विश्व में रैंक (जीडीपी) | 16वाँ | 5वाँ | — |
यदि अतिरिक्त रक्षा खर्च होता तो भारत की जीडीपी अनुमानित 2.8-3.0 ट्रिलियन डॉलर रह जाती यानी 600-700 बिलियन डॉलर कम।
मानवतावादी और सांस्कृतिक लाभ
10 मिलियन शरणार्थियों का भारत में संरक्षण देने में 1971 में व्यय 700 मिलियन डॉलर (तत्कालीन मूल्य) हुआ था। उसका आज का मूल्य 5.5 बिलियन डॉलर होता है। भारत की मानवतावादी नेतृत्व की पहचान इससे हुई। भारत ने अंतरराष्ट्रीय कानून के प्रति प्रतिबद्धता दिखाई। बांग्लादेश के साथ जीवन भर की मैत्री का सद्भाव बना। हाँलाकि अभी इस्लामिक सत्तावाद की क्रूर चपेट में बांग्लादेश के पड़ने के कारण बांग्लादेश के साथ मैत्री दुश्मनी में बदली हुई है। 1971 के बाद भारत-बांग्लादेश के बीच सांस्कृतिक समरसता के युग का आरम्भ हुआ था। बंगाली साहित्य, संगीत फिर से भारतीय मूलधारा में समाहित हुई थी। रवींद्रनाथ ठाकुर की रचना बांग्लादेश का राष्ट्रगीत बनी।
कुल आर्थिक संतुलन (1971-2024)
लाभ की ओर:
| पहलू | राशि (बिलियन अमेरिकी डॉलर) |
| व्यापार लाभ | +50-60 |
| विकास में बचत | +150-200 |
| शरणार्थी पुनर्वास सफलता | अमूल्य |
| वैश्विक प्रभाव में वृद्धि | अमूल्य |
| कुल | +200-260 |
व्यय की ओर:
| पहलू | राशि (बिलियन अमेरिकी डॉलर) |
| सीमा प्रबंधन | -30-40 |
| शरणार्थी पुनर्वास अतिरिक्त | -20-25 |
| सीमा बाड़ निर्माण | -10-15 |
| कुल | -60-80 |
शुद्ध लाभ: 1971-2024 में लगभग 120-200 बिलियन अमेरिकी डॉलर का लाभ। परंतु सामरिक, राजनीतिक और मानवतावादी लाभ अमूल्य हैं, स्तुत्य हैं।
1971 में पाकिस्तान का विभाजन होने से भारत के लिए लाभ
| रणनीतिक लाभ | तीन मोर्चों से मुक्ति, दो मोर्चों पर केंद्रित रक्षा |
| आर्थिक लाभ | 200+ बिलियन डॉलर का शुद्ध लाभ |
| सैन्य लाभ | सीमित बजट में अधिक प्रभावी आवंटन |
| वैश्विक लाभ | दक्षिण एशिया में प्रथम शक्ति की स्थापना |
| मानवतावादी लाभ | 10 मिलियन शरणार्थियों को संरक्षण |
यदि विभाजन न होता तो भारत का जीडीपी 600-700 बिलियन डॉलर कम होता, रक्षा व्यय 30-50% अधिक होता, सीमावर्ती क्षेत्रों में निरंतर सैन्य तनाव बना रहता और दक्षिण एशिया में भारत के नेतृत्व की स्थिति कमजोर होती। इस तरह निष्कर्षतः जब राष्ट्र सही समय पर सही निर्णय लेता है, तब इतिहास उसके पक्ष में खड़ा हो जाता है। 1971 में भारत ने न केवल एक युद्ध जीता, बल्कि एक सदी के लिए अपनी सुरक्षा, समृद्धि और सम्मान को सुनिश्चित किया।
जय हिन्द! विजय दिवस की बधाइयाँ!








