भारत की सीमा सुरक्षा का नया अध्याय: स्मार्ट फेंसिंग
भारत की सीमा सुरक्षा को लेकर एक ऐतिहासिक परिवर्तन अब घटित हो रहा है। नियंत्रण रेखा (LoC) पर पारंपरिक तारबंदी को अब ‘स्मार्ट फेंसिंग‘ में रूपांतरित किया जा रहा है – एक ऐसी तकनीक जो सुरक्षा को नई परिभाषा देगी। ‘कॉम्प्रिहेन्सिव इंटीग्रेटेड बॉर्डर मैनेजमेंट सिस्टम (CIBMS)’ – भारत सरकार की यह महत्वाकांक्षी परियोजना – सीमा प्रहरियों को 21वीं सदी के सुरक्षा उपकरणों से सज्जित कर रही है। इस प्रणाली में सेंसर, थर्मल कैमरे, मोशन डिटेक्टर और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का एक परिपक्व समन्वय है।
स्मार्ट फेंसिंग का तकनीकी आयाम:
यह प्रणाली दिन-रात, किसी भी मौसम में, किसी भी परिस्थिति में सक्रिय रहती है। पारंपरिक बाड़ के विपरीत, यह केवल भौतिक अवरोध नहीं है, बल्कि एक बुद्धिमान निगरानी व्यवस्था है। जब भी कोई संदिग्ध गतिविधि होती है, सिस्टम तुरंत रीयल-टाइम अलर्ट जारी करता है।
AI-आधारित विश्लेषण की शक्ति:
इस प्रणाली का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है – कृत्रिम बुद्धिमत्ता द्वारा पैटर्न की पहचान। यदि किसी क्षेत्र में बार-बार एक जैसी हरकतें दर्ज होती हैं, तो सिस्टम स्वतः सतर्कता संकेत भेजेगा। इसका मतलब है कि सीमा सुरक्षा बल (BSF) और सेना को तुरंत सक्रिय जानकारी मिलती है, न कि विलम्ब से निष्क्रिय जानकारी।

सुरक्षा हेतु स्मार्ट फेंसिंग
जम्मू-कश्मीर में सफलता की कहानी:
प्रारंभिक परीक्षण जम्मू-कश्मीर के संवेदनशील इलाकों में किया गया है। परिणाम अत्यंत उत्साहजनक रहा। घुसपैठ की कोशिशें शुरुआती स्तर पर ही विफल हो गईं। अब इस सफलता के आधार पर, पूरी नियंत्रण रेखा पर इसे धीरे-धीरे विस्तारित किया जा रहा है।
भारत की विविध सीमाओं के लिए चुनौती:
स्मार्ट फेंसिंग की आवश्यकता इसलिए पड़ी है क्योंकि भारत की सीमाएँ असाधारण रूप से विविध और चुनौतीपूर्ण हैं जिनमें मुख्य हैं –
1. बर्फीली पहाड़ियाँ (हिमालय क्षेत्र)
2. घने जंगल (पूर्वोत्तर क्षेत्र)
3. दलदली भूमि (सर क्रीक)
4. नदी किनारे के इलाके (सीमावर्ती नदियों के पास)
पारंपरिक तरीकों से ऐसे वैविध्यपूर्ण भौगोलिक क्षेत्रों में सुरक्षा बनाए रखना बहुत कठिन होता था। स्मार्ट फेंसिंग इन सभी चुनौतियों का एक एकीकृत समाधान सुलभ करती है।
व्यापक सुरक्षा के दायरे:
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, आने वाले वर्षों में यह तकनीक केवल LoC तक सीमित नहीं रहेगी। भारत-पाक सीमा, भारत-बांग्लादेश सीमा सहित अन्य अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर भी इसे लागू किया जाएगा।
इसका उद्देश्य व्यापक सुरक्षा है, जैसे:
1. घुसपैठ को रोकना
2. अवैध व्यापार पर लगाम
3. ड्रग तस्करी को निरुत्साहित करना
4. आतंकवादी गतिविधियों पर नियंत्रण
5. ‘मेक इन इंडिया‘ की जीत:
यह परियोजना ‘मेक इन इंडिया‘ कार्यक्रम का एक प्रमुख उदाहरण है। भारत ने
विकसित की है, जिससे न केवल सुरक्षा में आत्मनिर्भरता आ रही है, बल्कि विश्व बाजार में भारतीय तकनीक की प्रतिष्ठा भी बढ़ रही है। सच पूछिए तो ‘स्मार्ट फेंसिंग‘ केवल एक सुरक्षा प्रणाली नहीं है, यह है भारत की सीमा-चेतना और सीमा-सुरक्षा का आधुनिकीकरण। यह एक तकनीकी क्रांति है जो भारत को एक ‘सुरक्षित राष्ट्र‘ बनाने की दिशा सफल कदम माना जा रहा है।








