सरहद को प्रणाम: सीमा जागरण मंच की भावांजलि

भारतीय संस्कृति में सीमा केवल विभाजक रेखा नहीं, वरन् संरक्षक प्राचीर है। सीमा जागरण मंच का संकल्प है कि सीमांत प्रदेशों की समस्याओं के प्रति समाज में जागृति आवश्यक है। सीमा जागरण मंच की भावांजलि है – “सरहद को प्रणाम”! इस पावन भावना से प्रेरित यह संस्था सीमावासियों और रक्षकों के त्याग-तप का उचित मान करने में संलग्न है। सामाजिक, आर्थिक एवं सांस्कृतिक विषमताओं का समाधान खोजना तथा सीमांत जनता को राष्ट्रीय मुख्यधारा से संयुक्त करना इसका लक्ष्य है। “सरहद को प्रणाम” निवेदन मात्र नहीं, प्रतिज्ञा है: सीमारक्षकों के गौरव-गान की, सीमांत क्षेत्रों के कल्याण की, और राष्ट्रीय एकता के संवर्धन की। सीमा ही संस्कृति का प्रारंभ है, सुरक्षा ही सभ्यता का आधार है।
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