सीमा रक्षकों और सुरक्षा बलों का मनोबल: मानसिक स्वास्थ्य की चुनौतियां
लेफ्टिनेंट कर्नल (डॉ.) लव तोमर
“38 वर्षीय हवलदार शिवराम सिंह, भारतीय सेना में पिछले १८ वर्षों से सेवा दे रहे हैं। वर्तमान में वे जम्मू और कश्मीर में नियंत्रण रेखा (LoC) के पास एक उच्च ऊंचाई वाले पोस्ट पर तैनात हैं। वे विवाहित हैं और उनके दो बच्चे हैं, जो राजस्थान स्थित उनके गाँव में उनकी पत्नी के साथ रहते हैं। यह उनकी तीसरी ऐसी पोस्टिंग है जो संघर्ष-प्रवण क्षेत्र में है। ऑपरेशनल परिस्थितियों के कारण उन्हें छुट्टी मिलने में देरी हो रही है, जिस वजह से वे लंबे समय से अपने गाँव नहीं जा पाए हैं। पिछले कुछ महीनों से, शिवराम को नींद से संबंधित समस्याएं हो रही हैं। वे हर रात सिर्फ 2-3 घंटे ही टुकड़ों में सो पाते हैं। उन्हें हाल ही में हुए एक सीमा-पार घात (ambush) की बार-बार यादें और बुरे सपने आते हैं, जिसमें उनके दो साथी जवान शहीद हो गए थे। वह छोटी-छोटी बातों पर चिड़चिड़े हो जाते हैं और अक्सर गुस्सा हो जाते हैं। उनका मन अब अधिकतर उदास रहता है और वह अपने परिवार से फोन पर बात करने से बचते हैं। पहले जिन गतिविधियों में आनंद लेते थे, जैसे खेलना और किताबें पढ़ना, उनमें अब रुचि नहीं लेते। वह अक्सर भावुक हो जाते हैं और उस घात से जीवित बच जाने के लिए स्वयं को दोषी मानते हैं। ये लक्षण धीरे-धीरे उनकी ऑपरेशनल दक्षता और उनके साथियों और वरिष्ठों के साथ सामाजिक संपर्क को प्रभावित कर रहे हैं। वे अपने मन की बात किसी से साझा नहीं कर पा रहे हैं, क्योंकि उन्हें मानसिक परेशानी की वजह से कलंकित होने का डर है।”
यह केस स्पष्ट रूप से हमारे सीमा प्रहरियों के मानसिक स्वास्थ्य की चुनौतियों को दर्शाता है। सीमा रक्षक और सुरक्षा बल राष्ट्र के अभिन्न और महत्वपूर्ण अंग होते हैं जो सदैव प्रथम पंक्ति में विद्यमान हो कर राष्ट्रीय सुरक्षा की अहम जिम्मेदारी उठाते हैं। सीमा सुरक्षा बलों के लिए मनोबल का बहुत अधिक महत्व है। उच्च मनोबल न केवल एक सैनिक की कार्य क्षमता को बढ़ाता है अपितु राष्ट्रीय सुरक्षा को सुदृढ़ करता है। उच्च मनोबल एक सैनिक में कर्तव्य के प्रति निष्ठा और गहरे देशप्रेम का भाव जगाता है। देश के प्रति समर्पण और सर्वोच्च बलिदान की भावना प्रबल होती है। सकारात्मक मनोबल नैतिक मूल्यों और अनुशासन को बनाए रखने में सहायता करता है जिससे बल की छवि सराहनीय बनी रहती है। अच्छे मनोबल वाले सुरक्षाकर्मी दूसरे सैनिकों के लिए प्रेरणास्रोत होते हैं और सुरक्षादल को अच्छा नेतृत्व प्रदान करते हैं। संकट और युद्ध की घड़ी में उच्च मनोबल ही एक सैनिक का सच्चा साथी होता है। सकारात्मक और उच्च मनोबल वाले और दल में आपसी सहयोग और एकता लगातार बनी रहती है जो प्रत्येक सैनिक की कार्यक्षमता में वृद्धि करती है और राष्ट की सुरक्षा को मजबूत करती है।
देश की सुरक्षा हमारे सुरक्षा बलों की शारीरिक और मानसिक शक्ति पर निर्भर करती है। दुर्लभ भौगोलिक परिस्थितियां, शत्रु के आक्रमण का तनाव, प्रतिकूल मौसम, पारिवारिक और सामाजिक वातावरण से दूरी इत्यादि ऐसे कई कारण हैं जो सुरक्षा बलों के मनोबल को हानि पहुंचा सकते हैं और उनके मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं। अधिकतर हम शारीरिक स्वास्थ्य की बात करते हैं और मानसिक स्वास्थ्य को अनदेखा कर देते है। मगर एक मजबूत सुरक्षा पंक्ति के लिए मानसिक प्रबलता और सुदृढ़ मनोबल का होना अति आवश्यक है।
अब हम यह जानने का प्रयास करते हैं कि सीमा रक्षकों और सुरक्षा बलों को अपने मनोबल को बनाए रखने में किस तरह की मानसिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है:
तनाव (Stress)
यह सबसे महत्वपूर्ण कारण है जो अनेकों मानसिक रोगों को जन्म देता है और सुरक्षा बलों के मनोबल को हानि पहुंचाता है। सुरक्षा बलों के संदर्भ में तनाव के कई कारण हैं जो एक साधारण नागरिक के जीवन से पूर्णतया अलग हैं। यह कारण निम्न प्रकार के हो सकते हैं:
A) कठिन कार्यशैली और प्रतिकूल परिस्थितियां
B) नींद का पूरा ना होना
C) अकेलापन और पारिवारिक एवं सामाजिक अलगाव
D) चौबीसों घंटे सतर्कता और नीरस दिनचर्या
E) दुर्घटना, विस्फोट और हमले का लगातार खतरा बने रहना
F) साथियों का बीमार और दुर्घटनाग्रस्त हो जाना
G) बहु-कार्य प्रणाली
H) युद्ध और सुरक्षा अभियानों में परिणामों का स्पष्ट ना होना
I) हथियारों और सैन्य उपकरणों का अभाव हो जाना इत्यादि
अवसाद और चिंता (Depression and Anxiety)
डिप्रेशन यानी मन की उदासी। यह एक महत्वपूर्ण रोग है जो हमारे मन को निर्बल करता है। जब एक सैनिक अवसाद से ग्रस्त होता है तब उसका प्रतिकूल प्रभाव उसकी दिनचर्या और मनोबल पर पड़ता है। सैनिक की कार्य क्षमता में कमी आ जाती है, जो सुरक्षा क्षेत्र में हानिकारक सिद्ध हो सकती है।
आत्महत्या की प्रवृत्ति ( Suicide)
आत्महत्या मनुष्य के अंदर पनप रही एक मानसिक बीमारी का दुष्परिणाम है। इस स्थिति में सैनिक की जीवन जीने की इच्छा पूर्ण रूप से खत्म हो जाती है और वह आत्मघाती कदम उठा लेता है। एक सैनिक के पास हथियारों की उपलब्धता इस कार्य को ओर सरल बना देती है। हाल के कुछ वर्षों कई आंकड़े सामने आयें हैं जहां सुरक्षा कर्मियों के द्वारा आत्महत्या के मामलों में वृद्धि हुई है।
पोस्ट ट्रामेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (PTSD): आघातोत्तर तनाव विकार
यह एक प्रकार का मानसिक रोग है जो किसी अत्याधिक तनावपूर्ण, भयावह या दर्दनाक घटना के बाद हो सकता है। हमारे सैनिक और सुरक्षा बल अक्सर कठिन समावेश और दुर्घटनाओं से जूझते हैं। ऐसे में इस रोग का खतरा उत्पन्न हो जाता है जो एक सैनिक के मन और मनोबल को विपरीत रूप से प्रभावित करता है। कई प्रकार के लक्षण इस रोग में देखे जा सकते हैं, जैसे नींद ना आना या बार बार डर कर जाग जाना, फ्लैशबैक और बुरे सपने आना, हमेशा घबराहट,डर, गुस्सा और चिड़चिड़ाहट का बने रहना और साथ ही उस घटना से जुड़ी चीज़ों और परिस्थितियों से दूर भागना इत्यादि। इसलिए इस मानसिक रोग को पहचानना और मनोचिकित्सक के द्वारा यथाशीघ्र उपचार करवाना अनिवार्य है।
नशे की लत और नशीले पदार्थों का सेवन (Drug Addiction)
तनावपूर्ण और एकांत वातावरण में लंबे समय से कार्यरत होने के कारण सुरक्षा बल एवं सीमा प्रहरी अपने मानसिक तनाव के निदान के लिए नशीले पदार्थों का सेवन प्रारंभ कर देते हैं। शुरुआत में यह प्रयोग मनोरंजन के रूप में होता है परंतु धीरे धीरे यह नशे की लत बन जाती है। सैनिक का मन और तन दोनों ही उसके गिरफ्त में आ जाता है। आमतौर पर प्रयोग किए जाने वाले पदार्थ हैं – तंबाकू, शराब, गांजा, चरस, अफीम, हीरोइन, नींद की गोलियाँ इत्यादि। इनके सेवन से सैनिक के मनोबल और मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर पड़ता है। आज के समय में नशे की लत से सुरक्षा बलों को बाहर निकालना एक बहुत बड़ी चुनौती है, जिसके लिए नशामुक्ति सेवाएं प्रदान करना अति आवश्यक है।
मानसिक सेवाओं का अभाव और अवधारणाएं
आज हमारे देश में मानसिक रोग लगातार बढ़ रहे हैं। परंतु मनोचिकित्सक और ज़रूरी मानसिक सेवाओं का अभाव है। हमारे सीमा सुरक्षा बल दूर दराज के इलाकों में काम करते हैं, जहां पर सही समय और उपयुक्त मानसिक सेवाएं नहीं पहुंच पाती। फलस्वरूप छोटी-छोटी मानसिक अड़चनें धीरे-धीरे विशालकाय बीमारी का रूप ले लेती हैं और एक सैनिक के मन और तन को प्रभावित करतीं हैं। साथ ही आज भी हमारे समाज में मानसिक रोगों को लेकर अनेकों अवधारणाएं हैं जिसके कारण लोग इसे निरंतर छिपाते रहते हैं और सामने आ कर इलाज नहीं कराते। एक सैनिक के अंदर कमज़ोर मनोबल का यह एक महत्वपूर्ण कारण है। इनके अलावा कई ऐसे कारण हैं जो हमारे सुरक्षा बलों के मनोबल और मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करते हैं, जैसे छुट्टी का अभाव, तैनाती और प्रोमोशन की अनिश्चितता, रिटायरमेंट की चिंता, वरिष्ठों का दवाब और कठोर अनुशासन की जीवन शैली, परिवार और समाज से अलगाव, सीमित मनोरंजन के साधन एवं व्यक्तिगत जीवन।
सीमा बलों का मनोबल और राष्ट्रीय सुरक्षा
सीमा सुरक्षा बल देश की सुरक्षा में एक महत्वपूर्ण स्तंभ होते हैं। देश को बाहरी खतरों से बचाकर सबको सुरक्षित रखना इनका मूलभूत कर्तव्य है। यदि इन सैनिकों का मनोबल गिरता है या वे मानसिक रोगों से ग्रसित होते हैं, तो इसका सीधा प्रभाव राष्ट्रीय सुरक्षा पर पड़ता है, जैसे –
I. सतर्कता में कमी
मनोबल गिरने और मानसिक तनाव के कारण सुरक्षा बलों में सतर्कता कम हो जाती है। परिणामस्वरूप सीमा रक्षा में चूक हो सकती है और दुश्मन या कोई आतंकी संगठन घुसपैठ करने में सफल हो सकते हैं।
II. निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित
मानसिक रोग (जैसे – डिप्रेशन, एंजाइटी एवं पी टी एस डी) से पीड़ित सैनिक समय पर सही निर्णय लेने में सक्षम नहीं हो पाते हैं जिससे संकटकाल में खतरा बढ़ जाता है
III. आत्मघाती प्रवृत्तियां एवं तनाव
मनोबल के अभाव में आपसी तनाव में वृद्धि होती है और आत्महत्या की सोच जन्म ले सकती है। जो एक सुरक्षा दल को कमजोर बनाती है।
IV. घटनाओं का दुष्प्रभाव: मीडिया और जनविश्वास
अनुशासनहीनता,आपसी मतभेद, आत्महत्या इत्यादि जैसी घटनाएं जब सैनिकों में होती हैं और जनसाधारण के सामने आती हैं तो इससे सुरक्षा बलों की छवि पर नकारात्मक असर पड़ता है। इससे आम जनता का विश्वास डगमगा सकता है जिसका फायदा दुश्मन देश भली भांति उठा सकता है।
सीमा रक्षकों के मनोबल संवर्धन एवं मानसिक चुनौतियों के समाधान
I. नियमित मानसिक स्वास्थ्य जांच और काउंसलिंग सत्र का प्रबंध होना चाहिए जिसके द्वारा पनप रही मानसिक बीमारी को जल्द ही पहचाना जा सके और समय से उसका सही उपचार किया जा सके।
II. मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता अभियान चलाया जाना चाहिए। सीमा रक्षकों के लिए पर्याप्त मनोचिकित्सकों की नियुक्ति हो और साथ ही सीमा पर दूर दराज क्षेत्रों में तैनात सैनिकों के लिए टेली काउन्सलिंग सेवा सुचारू रूप से अग्रसर होनी चाहिए।
III. परिवार से संवाद के लिए बेहतर संचार सुविधाएं हों एवं नियमित रूप से सभी सुरक्षा कर्मियों को अवकाश का अवसर मिलना चाहिए।
IV. सभी सुरक्षा बलों को समय समय पर सार्वजनिक प्रशंसा और सराहना मिलनी चाहिए, जैसे – मौखिक और लिखित प्रशंसा, पुरस्कार एवं पदक इत्यादि।
V. निरंतर प्रशिक्षण और विशेष नियुक्तियों – जैसे, विशेष इकाइयां, टास्क फोर्स, विदेश मिशन एवं स्पष्ट पदोन्नति मार्ग सैनिकों के मनोबल को उच्च बनाए रखते हैं।
VI. बेहतर मनोरंजन सुविधाएं एवं खेल गतिविधियों का नियमित आयोजन तनाव को कम करता है और सैनिक की कार्य क्षमता एवं कार्य कुशलता को बनाए रखता है।
VII. कार्य और व्यक्तिगत जीवन में संतुलन, परिवार सहयोग और कल्याणकारी योजनाएं एवं बच्चों की शिक्षा सहायता जैसे प्रयास सीमा रक्षकों और सुरक्षा बलों के उच्च मनोबल को बनाए रखने में अत्यंत कारगर सिद्ध हो सकते हैं।
VIII. मजबूत नेतृत्व, टीम भावना, वरिष्ठों द्वारा सही मार्गदर्शन, संयुक्त प्रशिक्षण एवं आपसी भाईचारा सीमा सुरक्षा बलों के मनोबल को बढ़ाने का मूल मंत्र है।
सीमा रक्षकों और सुरक्षा बलों का मनोबल देश की सुरक्षा के लिए एक अदृश्य कवज की तरह है। जब सैनिकों का मनोबल ऊंचा होता है, तब वे अपने कर्तव्यों को पूरी निष्ठा, साहस और समर्पण से निभाते हैं। सीमा पर तैनात सैनिकों का मानसिक स्वास्थ्य और उच्च मनोबल उतना ही महत्वपूर्ण है जितना उनके हथियार और प्रशिक्षण। यदि हमारे सीमा सुरक्षा बलों का मनोबल सकारात्मक और ऊंचा रहेगा एवं उनका मानसिक स्वास्थ्य मजबूत रहेगा तभी हमारे देश की सीमाएं सुरक्षित रहेंगी और राष्ट्रीय सुरक्षा अक्षुण्ण बनी रहेगी। इसलिए सरकार, समाज और भारतवर्ष के प्रत्येक नागरिक का यह कर्तव्य बनता है कि अपने देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले वीर पराक्रमी सीमा रक्षक और सीमा सुरक्षा बल सदैव स्वस्थ रहें और अपने उच्च मनोबल को बनाए रखें ताकि हमारा राष्ट पूर्णरूप से सुरक्षित हो और विश्वगुरू की उपाधि की तरफ अग्रसर हो।








