विशद विमर्श

आख्यान युद्ध: एआई(AI) की रणभूमि

आख्यान युद्ध: भारत की सभ्यतागत आत्मा के लिए एक मूक संग्राम सिद्धार्थ दवे “एक झूठ पूरी दुनिया का आधा चक्कर लगा सकता है, जबकि सत्य अभी अपने जूते पहन ही रहा होता है।” यह उक्ति प्रायः मार्क ट्वेन को समर्पित की जाती है, जबकि वास्तव में यह जोनाथन स्विफ्ट की है। यह एक प्रतीकात्मक विडंबना…

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सीमा समाचारिका

बॉर्डर 2: शौर्य की वापसी

बॉर्डर 2: भारतीय चेतना की एक महाकाव्यात्मक फिल्म भोगेन्द्र पाठक अनुराग सिंह के सधे हुए निर्देशन में निर्मित फ़िल्म ‘बॉर्डर 2’ राष्ट्रचेतना का प्रखर उद्घोष बनकर उभरती है। यह केवल एक युद्ध-कथा नहीं, बल्कि राष्ट्र की आत्मा से संवाद करती हुई एक जीवंत अभिव्यक्ति है। फ़िल्म 1971 के भारत-पाक युद्ध को मात्र स्मृति के रूप…

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