विशद विमर्शसीमा समाचारिका

बंगाल की लड़ाई: सत्ता नहीं, सभ्यता का प्रश्न

  चुनाव से आगे की सोच: क्यों बंगाल भारत के लिए निर्णायक है अश्वनी कुमार च्रोंगू बीते वर्ष 2025 के अंतिम सप्ताह में भाजपा के राष्ट्रीय संगठनात्मक मामलों के प्रमुख और पार्टी के अखिल भारतीय महासचिव (संगठन) बी.एल. संतोष ने नई दिल्ली से प्रकाशित पत्रिका पाञ्चजन्य  को एक विशेष साक्षात्कार दिया, जिसे मीडिया में व्यापक…

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विशद विमर्शसीमा समाचारिका

बंगाल, विवेकानंद और सभ्यतागत संकट

    विवेकानंद दर्शन और भारत का सभ्यतागत संकट भोगेन्द्र पाठक स्वामी विवेकानंद का जन्म केवल एक महापुरुष का जन्म नहीं था, बल्कि वह क्षण था जब भारतीय चेतना ने आधुनिक युग में नई करवट ली। उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया कि अध्यात्म जीवन से पलायन नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति उत्तरदायित्व निभाने…

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