राष्ट्रीय चेतना और सामूहिक दायित्व का शंखनाद
सीमा जागरण का अभिनव आयोजन: उत्तरकाशी की सीमावर्ती गाँवों में संगोष्ठी
उत्तरकाशी जनपद के भटवाड़ी प्रखंड की सीमांत धरती पर हाल ही में एक सार्थक वैचारिक संगोष्ठी का आयोजन हुआ, जहाँ सीमा जागरण मंच ने सीमावर्ती ग्रामों के जन-जीवन से प्रत्यक्ष संवाद स्थापित किया। हिमालय की शांत, किंतु सजग गोद में बसे इन गाँवों में यह आयोजन केवल एक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि राष्ट्र-चेतना के पुनर्जागरण का एक जीवंत प्रयत्न था। सीमा जागरण मंच के प्रांतीय पदाधिकारियों – गुलाब सिंह नेगी, अतुल डिमरी एवं मितेश सेमवाल के नेतृत्व में आयोजित इस क्षेत्र प्रवास एवं संवाद कार्यक्रम में आईटीबीपी के जवानों, ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों और स्थानीय नागरिकों की सक्रिय सहभागिता रही। संगोष्ठी के माध्यम से सुरक्षा, समन्वय, विकास, आंतरिक सुरक्षा, रिवर्स पलायन, आत्मनिर्भर भारत और राष्ट्र-निर्माण में युवाओं की भूमिका जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गहन विमर्श हुआ।

यह संवाद केवल वक्तव्यों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सीमांत गाँव झाला, जसपुर, सुखी, पुराली और हर्षिल के निवासियों की वास्तविक समस्याओं, आकांक्षाओं और संभावनाओं से सीधा विचार-विमर्श किया गया। चर्चा में यह स्पष्ट रूप से उभरा कि सीमावर्ती समाज केवल सीमा की रक्षा में सहभागी नहीं है, बल्कि राष्ट्र की आत्मा को जीवित रखने वाला संवेदनशील प्रहरी भी है। कार्यक्रम के दौरान सीमा जागरण मंच के उद्देश्यों और कार्यों से लोगों को अवगत कराया गया तथा यह संदेश सशक्त रूप में रखा गया कि सीमांत क्षेत्र केवल भौगोलिक सीमाएँ नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और राष्ट्रीय चेतना के प्रथम स्तंभ हैं। समाधान-केंद्रित संवाद ने यह विश्वास दृढ़ किया कि स्थानीय सहभागिता और जागरूकता के माध्यम से ही सीमांत क्षेत्रों का समग्र विकास संभव है।

फोटो: उत्तरकाशी में संगोष्ठी
इस अवसर पर उत्तरकाशी जिला संयोजक चतर सिंह, खंड संयोजक जितेंद्र सिंह सहित मोहन सिंह राणा, सौरभ राणा, संगीत राणा, अंकित रांतेला, अनिल राणा, उत्तम, दीपक राणा, सोनम, सूरज सहित अनेक युवा एवं समाजसेवी उपस्थित रहे। उनकी सहभागिता ने यह प्रमाणित किया कि सीमांत क्षेत्र का युवा आज राष्ट्र-निर्माण के उत्तरदायित्व को समझ रहा है और उसे निभाने के लिए तत्पर भी है। यह संगोष्ठी सीमांत चेतना के उस मौन स्वर को स्वर देने का प्रयास थी, जो वर्षों से पर्वतों की गोद में पलता रहा है, और आज राष्ट्र के भविष्य के लिए स्वयं को अभिव्यक्त कर रहा है।








