सब्रूम: भारत-बांग्लादेश सीमा पर इतिहास, संस्कृति और राष्ट्र-चेतना का संगम
आज आपको लिए चलते हैं भारत-बांग्लादेश सीमा पर स्थित त्रिपुरा राज्य के दक्षिणी छोर में बसे एक सुंदर, सजीव और संवेदनशील कस्बे सब्रूम की ओर। यह कोई साधारण सीमावर्ती नगर नहीं है; यहाँ का पूरा सामाजिक जीवन सीमा के साँचे में ढला हुआ है। दक्षिण त्रिपुरा जिले में फेनी नदी के किनारे बसा यह कस्बा भारत की सुदूर सीमा पर खड़े उस समाज का प्रतिनिधित्व करता है, जहाँ राष्ट्र, संस्कृति और दैनिक जीवन एक-दूसरे में घुले हुए हैं। फेनी नदी अपनी तीव्र और शक्तिशाली धारा के साथ यहाँ भारत के सब्रूम कस्बा और बांग्लादेश के रामगढ़ क्षेत्र को अलग करती है।

भारत और बांग्लादेश की सरकारों के संयुक्त प्रयास से वर्ष 2010 में निर्मित मैत्री सेतु के माध्यम से लोगों का आवागमन होता है, व्यापार फलता–फूलता है और साथ ही संस्कृति, संवेदना और मानवीय अपनत्व का आदान–प्रदान भी होता है। यह क्षेत्र राष्ट्रीय राजमार्ग–8 से जुड़कर पूरे पूर्वोत्तर के विकास को गति देता है।
अवैध घुसपैठ और तस्करी जैसी चुनौतियाँ यहाँ निरंतर बनी रहती हैं, जिनसे निपटने के लिए सीमा जागरण, सीमा सुरक्षा और सीमा सशक्तीकरण के साथ इस क्षेत्र को विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहाँ अंतरराष्ट्रीय बौद्ध विश्वविद्यालय (DDIBU) की स्थापना भी की गई है।

फोटो: सब्रूम SEZ
इतिहास की दृष्टि से भी यह भूमि समृद्ध है। 8वीं से 12वीं शताब्दी के बौद्ध–हिंदू स्थापत्य का साक्ष्य पिलक का प्राचीन मंदिर–परिसर आज भी दर्शनीय है। मिट्टी की पट्टियों पर उकेरे गए दृश्य – माता की प्रार्थना, पत्नी की कामना और बेटी के सपने हजार वर्ष पूर्व की स्त्रियों की पीड़ा, प्रेम और आस्था को आज भी जीवंत बनाए हुए हैं।सचमुच, सब्रूम सीमा पर खड़ा वह कस्बा है जहाँ अतीत, वर्तमान और राष्ट्र–चेतना एक साथ प्रवाहित होते हैं।








