भारत-रूस: रक्षा, रणनीति और व्यापारिक सहयोग की नई उड़ान
भारत और रूस ने अपने रणनीतिक रिश्तों को आगे बढ़ाते हुए सीमा-शुल्क प्रक्रियाओं को तेज़ और सुरक्षित बनाने के लिए नया कदम उठाया है। जिसके तहत भारत और रूस के सीमा-शुल्क अधिकारियों ने सामान और वाहनों की आवाजाही के लिए आगमन-पूर्व सूचना देने के मसौदे पर हस्ताक्षर किए हैं। दिल्ली में आयोजित 23वें भारत–रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन से ठीक पहले इस समझौते ने दोनों देशों के बीच भरोसे और सुरक्षा के आयामों को और सुदृढ़ कर लिया है।
इस प्री-अराइवल कस्टम्स डेटा एक्सचेंज प्रणाली से सामान और वाहनों की जानकारी आगमन से पहले ही साझा की जा सकेगी, जिससे सुरक्षा एजेंसियों को जोखिम आकलन (Risk Assessment )में मदद मिलेगी और संवेदनशील वस्तुओं की निगरानी की जा सकेगी। CBIC के प्रमुख विवेक चतुर्वेदी और रूस की FCS उपप्रमुख तातियाना मर्कुशोवा द्वारा किए गए हस्ताक्षर दोनों देशों की सीमा सुरक्षा को अधिक आधुनिक और पारदर्शी बनाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम हैं।

भारत-रूस द्विपक्षीय वार्ता
रक्षा और सामरिक क्षेत्रों को लाभ
सीमा-शुल्क जोखिम आकलन तेज़ होने से रक्षा संबंधी संरक्षित सामग्री की आवाजाही अधिक सुरक्षित होगी। सीमा पर सुचारु रुप से पड़ताल होने से स्पेयर पार्ट्स, मशीनरी और रक्षा उपकरणों की सप्लाई चेन में देरी नहीं होगी। ईंधन आपूर्त पर रूस का आश्वासन भारत की सैन्य और सामरिक ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती प्रदान करेगा।एफटीए और 2030 तक व्यापार बढ़ाने के कार्यक्रम से डुअल-यूज़ टेक्नॉलॉजी, औद्योगिक सहयोग और रक्षा उत्पादन में निवेश बढ़ने की संभावनाएँ मजबूत होंगी।
कृषि- पशुपालन सहयोग और खाद्य सुरक्षा
कृषि, मत्स्य, पशुपालन और दुग्ध क्षेत्र में बढ़ते सहयोग से भारत–रूस संबंधों का नया संतुलन उभर रहा है, जो खाद्य सुरक्षा और सैन्य लॉजिस्टिक्स सपोर्ट दोनों के लिए महत्त्वपूर्ण है। विस्तृत चर्चाओं के दौरान आधुनिक खेती, नवाचार, बाजार तक पहुंच एवं निर्यात बढ़ाने पर जोर दिया गया है। यह समझौता सिर्फ व्यापार को गति देने वाला कदम नहीं, बल्कि भारत–रूस रणनीतिक साझेदारी के सुरक्षा आयामों को नई मजबूती देने वाला प्रमुख समझौता है।








