जनरल बिपिन रावत: राष्ट्र-रक्षा, नेतृत्व और पराक्रम की अमिट विरासत
आज पूरा देश भारत के प्रथम चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ,जनरल बिपिन रावत की चतुर्थ पुण्यतिथि पर उन्हें नमन कर रहा है। जनरल रावत केवल एक सैन्य अधिकारी ही नहीं थे, बल्कि मां भारती की सुरक्षा और रणनीति को नए आकार देने वाले वीर सपूत थे। उनकी राष्ट्रभक्ति, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा आगामी पीढ़ियों का सदैव मार्ग प्रशस्त करती रहेगी।
जनरल रावत के बारे में कहा जाता है कि जिनकी मौजूदगी ही दुश्मनों के लिए चेतावनी बन जाती थी। साल 2015 में नागालैंड में उनकी तैनाती के दौरान एक ऐसा क्षण आया जिसने साबित कर दिया कि जनरल रावत के लिए “कर्तव्य” ही सबसे बड़ा धर्म था। तीन फरवरी की उस सुबह वह चीता हेलीकॉप्टर में एक कर्नल और दो पायलट के साथ उड़ान भर रहे थे कि अचानक इंजन ने जवाब दे दिया। कुछ ही पलों में हेलीकॉप्टर जमीन पर गिर पड़ा। सभी को गंभीर चोटें आईं, लेकिन जनरल रावत उठ खड़े हुए और कुछ ही घंटों बाद उन्होंने तुरंत दूसरे हेलीकॉप्टर में बैठकर मिशन की कमान संभाल ली।काश! आठ दिसंबर 2021 को भी किस्मत ने वैसा ही साथ दिया होता।
सीडीएस के रूप में उनकी नियुक्ति देश के लिए भरोसे का क्षण था। सर्जिकल स्ट्राइक से लेकर सीमा-पार आतंकी हमले, हर मोर्चे पर उनकी रणनीति ने यह साफ कर दिया था कि भारत अब ‘बर्दाश्त’ की सीमा में नहीं रहेगा। उनका वह ऐतिहासिक संदेश आज भी हर सैनिक के सीने में धड़कता है-
“पहली गोली हम नहीं चलाएँगे, लेकिन जब चलाएँगे तो गिनती नहीं होगी।”

कश्मीर हो या पूर्वोत्तर, चीन हो या पाकिस्तान, दुश्मन अच्छी तरह जान चुके थे कि जनरल रावत के रहते भारत की ओर आंख उठाना, आसान नहीं है।
बतौर सीडीएस उन्होंने भारतीय सेना में व्यापक परिवर्तन की नींव रखी। चाहे महिला सैनिकों की बढ़ती भूमिका हो या तीनों सेनाओं को एकीकृत एवं अत्याआधुनिक करना, हर जगह उनकी दूरदर्शिता साफ झलकती थी। वह जानते थे कि आधुनिक युद्ध केवल हथियारों से नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और तेज़ निर्णय-शक्ति से जीते जाते हैं।
आज उनकी स्मृति केवल एक सैन्य अधिकारी की याद नहीं, बल्कि एक युग की प्रेरणा है। उनकी विदाई आंसू मांगती है, पर सैनिकों की परंपरा कहती है- वीरों को नम आँखों से नहीं, सलामी से विदा किया जाता है।
मां भारती के इस अमर सपूत को शत–शत नमन। जनरल रावत, आप सिर्फ याद नहीं किए जाएंगे। आप हमेशा जिएंगे, हर उस जवान के साहस में, जो तिरंगे की रक्षा के लिए खड़ा है।








