ऑपरेशन ट्राइडेंट: शांत जलराशि पर भारतीय प्रचंडता की गूँज
4 दिसंबर… भारतीय नौसेना दिवस… वह तिथि है, जब समुद्र की अतल धारा पर भारतीय वीरता बिजली की तरह कड़क उठी थी। यह एक ऐसी तारीख है जब स्वयं समुद्र अपनी लहरों पर दीप सजाकर उन वीर भारतीय नौसैनिकों को प्रणाम करता है जिन्होंने राष्ट्र की मर्यादा को बुझने नहीं दिया था। तब माँ भारती स्वयं भारतपुत्रों से गर्व-स्वरों में कह रही थीं—
असंख्य कीर्ति-रश्मियाँ विकीर्ण दिव्य दाह-सी,
सपूत मातृभूमि के – रुको न, शूर साहसी!
अराति-सैन्य-सिंधु में, सुवाडवाग्नि से जलो,
प्रवीर हो, जयी बनो – बढ़े चलो, बढ़े चलो!
1971 की वह संध्या स्मृति में ताज़ा है जब पाकिस्तान की कायरता ने 3 दिसंबर की रात हमारे वायु-सैनिक अड्डों पर आक्रमण किया था। प्रत्युत्तर में समुद्र के सीने में सोए हुए शेर जाग उठे; भारत की समुद्री शक्ति जाग उठी; और उसी रात जन्म हुआ – ऑपरेशन ट्राइडेंट का।
तीन सुकुमार-सी, परंतु प्रचंड शक्ति से भरी मिसाइल नौकाएँ – वीर, निपट और निर्घात – समुद्र को चीरती हुई उस अँधेरे में बढ़ीं, जहाँ शत्रु को विश्वास तक नहीं था कि प्रलय आने वाली थी। और जब प्रहार हुआ… कराची के क्षितिज पर उठती अग्नि-रेखाएँ केवल शत्रु की पराजय नहीं थीं; वे थीं भारत की जल-शक्ति के जागरण की अग्नि-शिखाएँ।
इतिहास गवाह है कि कराची की उन लपटों में वह नापाक अभिमान जल उठा था, जिसे पाकिस्तान ने पाल रखा था। पाकिस्तान का पीएनएस खैबर ध्वस्त हो गया था; उसके तीन युद्धपोत राख में तब्दील हो गए थे। दुनिया ने देखा – भारत का समुद्र केवल शांत नहीं, प्रचंड भी है।
कमोडोर गोपाल राव की कमान में भारतीय नौसेना ने शत्रु को वही उत्तर दिया, जो सिंह अपने शिकार को देता है – सीधी चोट, अचूक वार और निर्णायक विजय।
नौसेना दिवस केवल एक स्मृति नहीं, एक आदर-समर्पण है – उन भारतीय नौसैनिकों के लिए, जिन्होंने आँधियों को आलिंगन किया; उन जहाज़ों के लिए, जो लहरों को वशीभूत कर गए; और उस समुद्र के लिए, जिसने भारतीय साहस को अपनी गोद में प्रखर बना दिया।
हम गौरवान्वित हैं कि भारत की समुद्री सीमाओं की सुरक्षा में आज भी हमारी भारतीय नौसेना अदम्य, अजस्र और अतुल्य योगदान दे रही है।








