आईएनएस विशाल: तीसरे स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर की तैयारी
हमारे समुद्र केवल हमारी देश की सीमाएँ नहीं हैं, ये राष्ट्र की शक्ति हैं। हम समुद्र-शक्ति से जितना सम्पन्न होंगे, उतनी ही सुरक्षित होंगी हमारी समुद्री सीमाएँ। समुद्र पर नियंत्रण का अर्थ है दुनिया की राजनीति पर नियंत्रण। हमारा हिंद महासागर भारत की सुरक्षा का विस्तारित प्रहरी है, लेकिन हिंद महासागर में चीन, अमेरिका, जापान – सभी अपनी शक्ति दिखा रहे हैं। साथ ही, दुनिया में एक नये महासागरीय युद्ध की आहट आ रही है। भारत इसे बेहतर जानता है, और इस क्षेत्र में अपना प्रभुत्व बढ़ाने का प्रबल प्रयास कर रहा है। हिन्द समहासागर में फैली हैं भारत की दक्षिणी सीमाएँ, जिसकी सुरक्षा के लिए भारत अपनी दूरदर्शिता से तीसरा स्वदेशी एयरक्राफ़्ट कैरियर तैयार कर रहा है, जिसका नाम है – आईएनएस विशाल।
यह सिर्फ़ एक जहाज़ नहीं है, यह एक सागरीय रणनीति है। इसमें तकनीक है, ताकत है, और है भारत के समुद्री भविष्य की दृष्टि। 65 हज़ार से 70 हज़ार टन का यह महाविराट पोत सिर्फ़ स्टील का ढाँचा नहीं है – यह भारत की समुद्री शक्ति का भविष्य है। इसके डेक से उड़ेंगे राफ़ेल के एडवांस वर्ज़न, UAV, और पाँचवीं पीढ़ी के स्टील्थ फ़ाइटर जेट। यानी यह सिर्फ़ युद्धपोत नहीं है – यह ‘एयरपावर का चलता-फिरता साम्राज्य’ है। महत्वपूर्ण बात यह है कि ब्रिटेन और फ्रांस – दोनों ही आईएनएस विशाल को बनाने के लिए भारत के दरवाज़े पर खड़े हैं। क्योंकि वे जानते हैं: जो देश ऐसा कैरियर बनाएगा, वही हिंद महासागर का स्वामी होगा।
आईएनएस विशाल सिर्फ़ तकनीकी छलांग नहीं है। यह भारत की आत्मनिर्भर नौसेना के संकल्प का डंका है। हिंद महासागर में अब भारत बोलेगा, और दुनिया सुनेगी। भारत लहरों को दिशा देने में लगा है, अब हमारे हाथों में होंगी सुरक्षित सीमाएँ और विश्व की भविष्य-नियति।








