ब्रह्मपुत्र की प्रथम हुंकार और भारत सीमा का जीवित प्रहरी
अरुणाचल प्रदेश का बड़ा हिस्सा चीन सीमा से लगा है। यहां की ऊपरी सियांग जनपद के सुदूरतम भाग में अवस्थित ‘बिशिंग’ एक ऐसा ग्राम है जहाँ भारत का एक छोर समाप्त होता है और चीन की सीमाएँ आरम्भ होती हैं। यहाँ केवल 22 घर और लगभग 70 भारतीय नागरिक और अनंत पर्वत-शृंखलाओं की निःशब्द सीमा विद्यमान है। यह केवल एक ग्राम ही नहीं, बल्कि राष्ट्र-सीमा की प्रखर चेतना है- यह एक ऐसा स्थल है जहाँ आकाश पर्वतों का आलिंगन करता है और गर्जन करते हुए ब्रह्मपुत्र का जलप्रवाह पृथ्वी को स्पर्श करता है।

बिशिंग में ‘त्सांगपो’ नदी भारत की सीमा को स्पर्श करती है, जिसे यहां ‘ब्रह्मपुत्र’ कहते है। ‘ब्रह्मपुत्र’ नदी यहीं पर भारत की सीमा में प्रथम हुंकार के साथ प्रवेश करती है। यहीं से होकर मैकमोहन रेखा गुजरती है। LAC भी यहीं पर है। यह एक ऐसी अदृश्य विभाजक रेखा है जिस पर दोनों राष्ट्रों की सेनाएँ सदैव तैनात रहती हैं।
यह गाँव तूतिंग से 33 किलोमीटर तथा गेलिंग से 14 किलोमीटर दूर है। यद्यपि दूरी सुनने में सरल लग सकती है, परंतु यहाँ तक पहुँचना किसी तपस्या से कम नहीं। घने वनों, खड़ी चढ़ाइयों और फिसलनयुक्त पथों से होकर लगभग 3 से 4 घंटों की कठिन आरोहण-यात्रा करनी पड़ती है। मार्ग में जोंक, जलधाराएँ और कंदराएँ, प्रकृति की परख और मानव के धैर्य का परीक्षण करती प्रतीत होती हैं।
बिशिंग में
बिशिंग में 300 फीट ऊँचा बिशिंग जलप्रपात आकाश से अवतरित शुभ्र अग्निधारा-सा प्रतीत होता है। उसका प्रबल प्रवाह केवल जल नहीं, बल्कि भारत की अनन्त शक्ति, प्रकृति का सामर्थ्य और सीमा की अदम्य चेतना का प्रतीक है।
यहाँ की मेम्बा जनजाति के लोग शांत, परिश्रमी और अद्वितीय साहस से परिपूर्ण होते हैं। ये बौद्ध धर्म के अनुयायी हैं। शिकार, मत्स्य-ग्रहण और सीमित कृषि इनके जीवन के मूल आधार हैं। इस भूभाग में न तो बाज़ार है, न सहज उपलब्ध सुविधाएँ; परन्तु राष्ट्रभाव, संस्कृति और सीमा-गौरव ही इन्हें समर्थ बनाते हैं।
बिशिंग का रणनीतिक महत्त्व अपार है। 2018 में चीनी सेना द्वारा भारतीय भूभाग में लगभग एक किलोमीटर लंबी सड़क निर्माण की कोशिश की गई थी, परंतु भारतीय सेना एवं ITBP की सतर्कता ने समय रहते उसे विफल कर दिया। यह एक ग्रामवासी की देशभक्ति थी जिसने पूरी सीमा की सुरक्षा सुनिश्चित की।
यहाँ ITBP के जवान दिन-रात डटे रहते हैं। उनका कठोर जीवन, अटूट समर्पण और प्रतिकूल परिस्थितियों से जूझने का साहस बिशिंग को एक जीवित दुर्ग बनाते हैं। वे इन पर्वतों, नदियों और वनों को केवल भूगोल नहीं, बल्कि मातृभूमि के अंग मानकर रक्षा करते हैं। बिशिंग भारत की सीमा पर स्थित एक शांत परंतु शक्तिशाली गाँव है। यहाँ रहने वाले ये 70 नागरिक केवल अपने घरों की नहीं, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों की अखंड शांति और गौरव की रक्षा करते हैं। यह ग्राम सिद्ध करता है कि सीमाएँ केवल रेखाएँ नहीं, बल्कि लोगों की निष्ठा, त्याग और संकल्प से जीवित रहती है।
वन्दे मातरम्।








