लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश में रक्षा परियोजनाओं को राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की स्वीकृति :
हाल ही में राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति की 86वीं बैठक में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया, जिसके तहत लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश में 13 प्रमुख रक्षा परियोजनाओं को मंजूरी दी गई। यह निर्णय देश की सामरिक आवश्यकताओं को सुदृढ़ करने के साथ-साथ हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लिया गया है। इन परियोजनाओं के प्रस्ताव रक्षा मंत्रालय, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) और सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) द्वारा प्रस्तुत किए गए थे।
अरुणाचल प्रदेश में स्वीकृत परियोजनाएं
अरुणाचल प्रदेश के ईगलनेस्ट वन्यजीव अभयारण्य के इको-सेंसिटिव ज़ोन में 0.37 हेक्टेयर भूमि के उपयोग की अनुमति दी गई है। इस भूमि का उपयोग बालिपारा–चारदुआर–तवांग सड़क पर 158 मीटर लंबे स्थायी पुल के निर्माण के लिए किया जाएगा, जो प्रोजेक्ट वर्तक के अंतर्गत आता है। यह क्षेत्र वैश्विक स्तर पर जैव विविधता हॉटस्पॉट के रूप में जाना जाता है और एक महत्वपूर्ण हाथी गलियारे के रूप में कार्य करता है।

अरुणाचल प्रदेश
समिति ने परियोजना के साथ एक शमन योजना को भी स्वीकृत किया है, जिसमें निर्माण कार्य केवल दिन के समय में किए जाने, वाहनों की गति सीमा निर्धारित करने, तथा कचरा और शोर नियंत्रण के सख्त उपाय लागू करने का प्रावधान है। यह योजना विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखने का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
लद्दाख में स्वीकृत रक्षा परियोजनाएं
लद्दाख क्षेत्र में चांगथांग कोल्ड डेजर्ट और काराकोरम वन्यजीव अभयारण्यों के भीतर कई सामरिक परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है।
इनमें चुशुल क्षेत्र में 3.7 हेक्टेयर भूमि पर 315 फील्ड वर्कशॉप कंपनी की स्थापना शामिल है, जो वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के पास 142 इन्फैंट्री ब्रिगेड को तकनीकी सहायता प्रदान करेगी।
इसके अतिरिक्त, त्सोग्त्सालु में 24.2 हेक्टेयर भूमि पर एक फॉर्मेशन गोला-बारूद भंडारण सुविधा और काराकोरम अभयारण्य के केएम-47 पर 47.1 हेक्टेयर में एक अन्य सैन्य योजना को भी स्वीकृति मिली है।
तारा क्षेत्र में 48.6 हेक्टेयर भूमि पर एक प्रशिक्षण नोड क्षेत्र स्थापित किया जाएगा, जो समुद्र तल से लगभग 15,500 फीट की ऊँचाई पर स्थित है। यह प्रशिक्षण नोड सैनिकों को उच्च ऊँचाई पर वास्तविक सामरिक प्रशिक्षण प्रदान करेगा। इसके साथ ही, चुशुल में 40 हेक्टेयर भूमि पर 142 इन्फैंट्री ब्रिगेड का मुख्यालय और सहायक इकाइयों की स्थापना की भी अनुमति दी गई है।
अन्य प्रमुख स्वीकृतियाँ
काराकोरम अभयारण्य के भीतर केएम-148 पर 9.46 हेक्टेयर में एक तोपखाना बैटरी और केएम-120 पर 8.16 हेक्टेयर में एक सेना शिविर को स्वीकृति दी गई है। समिति ने क्वाज़ी लैंगर, बोपसांग लुंगपा और केएम-156 पर तीन नई आईटीबीपी सीमा चौकियों की स्थापना को भी मंजूरी दी है, जिनमें से प्रत्येक चौकी लगभग 1.62 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली होगी। इसके अलावा केएम-80 पर 0.1 हेक्टेयर भूमि पर एक ट्रांजिट डिटैचमेंट और नयोमा एडवांस्ड लैंडिंग ग्राउंड के पास मुद क्षेत्र में इंद्र नदी पर एक ह्यूम पाइप पुलिया के निर्माण की भी अनुमति दी गई है, जिससे सैनिकों और आपूर्ति की आवाजाही में आसानी होगी।
राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की इस स्वीकृति से स्पष्ट होता है कि भारत अपनी सीमाओं की सुरक्षा को मजबूत करने के साथ-साथ पर्यावरणीय संतुलन को भी समान महत्व दे रहा है। इन परियोजनाओं के माध्यम से सामरिक दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों में सैन्य अवसंरचना का विस्तार होगा, जिससे देश की रक्षा क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
वहीं, शमन योजनाओं के पालन से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि पर्यावरणीय क्षति न्यूनतम हो और हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र की जैव विविधता सुरक्षित रहे। इस प्रकार, यह पहल राष्ट्रीय सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।








