पाकिस्तान की नई जंग – ड्रोन, ड्रग्स, और भारत के युवा
अब दुश्मन गोली से नहीं, नशे से वार करता है। भारत-पाकिस्तान के बीच 1947 से अब तक चार बड़े युद्ध हुए हैं। लेकिन आज भी पाकिस्तान हमसे यानी भारत से एक नई जंग लड़ रहा है – और इस जंग में गोलियाँ नहीं, नशा चलता है। ये जंग दिखाई नहीं देती, लेकिन इसके परिणाम घातक हैं। पाकिस्तान की ISI ने एक नई रणनीति बनाई है – भारत के युवाओं को नशे का आदी बनाने का ताकि भारत अंदर से कमजोर हो जाए। इसके लिए इस्तेमाल हो रहे हैं – ड्रोन। सीमा पर हर रोज़ चल रहा है अदृश्य युद्ध।
भारत-पाकिस्तान सीमा 3,323 किलोमीटर लंबी है। इसमें से कुछ हिस्से बेहद दुर्गम हैं – रेगिस्तान, पहाड़, जंगल, नदियाँ। पाकिस्तान इसी का फायदा उठा रहा है। तीन तरीकों से हो रही है तस्करी:
I. भूमि मार्ग से: रात के अंधेरे में तस्कर सीमा पार करते हैं
II. ड्रोन से: पाकिस्तान से ड्रोन के जरिए हेरोइन, हथियार, विस्फोटक गिराए जाते हैं
III. समुद्री मार्ग से: गुजरात और महाराष्ट्र के तटों पर हथियारों की तस्करी
इनमें सबसे खतरनाक है – ड्रोन तस्करी। पाकिस्तान का नया हथियार है – ड्रोन। ड्रोन छोटे होते हैं, तेज होते हैं, और चुपचाप आते हैं। रात के अंधेरे में, जब चारों ओर सन्नाटा होता है, पाकिस्तान से एक ड्रोन उड़ता है, भारतीय सीमा में घुसता है, और हेरोइन से भरा बैग गिराकर वापस चला जाता है। ये बैग फिर पहुँचता है तस्करों के पास। फिर पहुँचता है पंजाब, जम्मू-कश्मीर, राजस्थान के गाँवों में। और फिर पहुँचता है युवाओं के हाथों में। और युवा बर्बाद हो जाता है।
सोमवार, 27 अक्टूबर 2025।, सुबह के 6 बजे, जम्मू का आरएसपुरा सेक्टर, बॉर्डर आउटपोस्ट जतिंदर। BSF के जवानों ने देखा – एक पाकिस्तानी ड्रोन भारतीय सीमा में घुस रहा है। तुरंत एक्शन लिया गया। तलाशी शुरू हुई। और मिले – दो बैग, 10 पैकेट, 5.30 किलोग्राम हेरोइन। इसकी अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कीमत है ₹25 करोड़ रुपये से अधिक। लेकिन असली कीमत क्या है? अगर ये हेरोइन भारत के युवाओं तक पहुँच जाती, तो सैकड़ों जिंदगियाँ बर्बाद हो जातीं। BSF के जवानों की सतर्कता ने भारत के युवाओं को बचा लिया।
ध्यातव्य यह है कि सीमा की सुरक्षा करना केवल सेना की नहीं, पूरे देश की जिम्मेदारी है। ऐसी घटनाएँ दूरगामी प्रभाव डालती हैं और तीन बड़े सवाल उठाती है:
I. क्या हम सीमाओं के प्रति गंभीर हैं?
हम दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु में बैठे हैं – सुरक्षित, आरामदायक जीवन जी रहे हैं। लेकिन क्या हमने कभी सोचा है कि सीमाओं पर क्या हो रहा है? बीएसएफ के जवान माइनस 40 डिग्री में खड़े हैं। माइनस 50 डिग्री की गर्मी मेंवे पहरा दे रहे हैं। और हम क्या कर रहे हैं? हम सोशल मीडिया पर बैठकर राष्ट्रवाद की बातें करते हैं। सीमा सुरक्षा केवल सेना की जिम्मेदारी नहीं – ये पूरे देश की जिम्मेदारी है।
II. क्या सीमावासी जागरूक हैं?
सीमा की सुरक्षा तभी संभव है, जब सीमावर्ती गाँवों के लोग सजग हों।इसके लिए आवश्यक है कि वो संदिग्ध गतिविधियों की सूचना दें, तस्करों की मदद न करें, देशभक्ति को अपना धर्म मानें। इसके लिए जरूरी है – सीमा जागरण।
III. क्या सीमावर्ती क्षेत्र विकसित हैं?
अगर सीमावर्ती गाँवों में रोजगार नहीं है, तो युवा तस्करी के जाल में फँसेंगे। अगर शिक्षा नहीं है, तो युवा अपराध की ओर मुड़ेंगे। अगर स्वास्थ्य सुविधाएँ नहीं हैं, तो लोग पलायन करेंगे। क्योंकि सीमावर्ती क्षेत्रों का विकास – राष्ट्र-निर्माण का आधार है। सबसे बड़ी बात – उन्हें सब कुछ प्राप्त हो जाए तब भी वे इस जाल में फंसेंगे, अगर वो सीमा के प्रति जाग्रत नहीं हैं तो।
आगे की चुनौतियाँ भी ध्यातव्य हैं:
I. ड्रोन तस्करी को रोकना – एंटी-ड्रोन सिस्टम की तैनाती जरूरी है। रात में भी निगरानी होनी चाहिए। तकनीकी उन्नयन करना होगा।
II. खुफिया तंत्र को मजबूत करना – ISI के नेटवर्क की पहचान करनी होगी। सीमा पार तस्करी के रूट पकड़ने होंगे। स्थानीय सूचना तंत्र को सशक्त बनाना होगा।
III. नशा-मुक्ति और पुनर्वास – युवाओं को नशे से बचाना होगा। नशा-मुक्ति केंद्र खोलने होंगे। रोजगार, शिक्षा, जागरूकता देनी होगी।
सीमा सुरक्षा है राष्ट्र सुरक्षा
27 अक्टूबर 2025 की ये घटना एक बार फिर साबित करती है – सीमाएँ कमजोर हुईं, तो राष्ट्र खतरे में है। अगर सीमाएँ सुरक्षित हैं, तो:
I. युवा सुरक्षित हैं
II. समाज सुरक्षित है
III. भारत का भविष्य सुरक्षित है
इसलिए सीमा सुरक्षा राष्ट्र की प्राथमिकता होनी चाहिए। सीमा जागरण हर नागरिक का कर्तव्य है। सीमा संवर्धन राष्ट्र-निर्माण का आधार है।








