पूर्वोत्तर भारत में डिजिटल और औद्योगिक विकास
भारत में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के पंजीकरण की यात्रा किसी आर्थिक क्रांति से कम नहीं रही है। बीते दो दशकों में यह तंत्र काग़जी दौर से निकलकर पूरी तरह डिजिटल स्वरूप में ढल चुका है – एम- II से उद्योग आधार तक और अब ‘उद्यम रजिस्ट्रेशन’ और ‘उद्यम असिस्ट’ प्लेटफ़ॉर्म तक। यह बदलाव सिर्फ़ प्रशासनिक नहीं बल्कि सामाजिक-आर्थिक प्रवाह में गहरी हलचल का संकेत है। खासतौर पर उत्तर-पूर्वी भारत में, जहाँ सीमाओं की संवेदनशीलता और रोज़गार की कमी दोनों ही विकास के हर सूत्र से जुड़ी हैं, डिजिटल उद्यमिता ने एक नई ऊर्जा पैदा की है।
असम, त्रिपुरा और मणिपुर जैसे राज्यों ने इस डिजिटल ढांचे के सहारे पहचान भी बनाई और भागीदारी भी बढ़ाई। सरकार के ‘उद्यम असिस्ट’ प्लेटफ़ॉर्म ने 2023 में उन छोटे उद्यमों को भी मुख्यधारा में लाने का रास्ता खोला जिनके पास पैन या जीएसटीआईएन नहीं था। यह एक ऐसी पहल बनी जिसने अनौपचारिक अर्थव्यवस्था को औपचारिक पहचान दी।
उत्तर-पूर्व के आठ राज्यों की कहानी इस बदले परिदृश्य में प्रेरक है। जहाँ 2007-08 में महज़ 1.9 प्रतिशत हिस्सेदारी थी, वहीं 2024-25 तक यह बढ़कर 3 प्रतिशत से अधिक हो गई। डिजिटल पहुँच, सरकारी हस्तक्षेप और स्थानीय उद्यमियों की बढ़ी जागरूकता—तीनों ने मिलकर आर्थिक नक्शे पर एक नई चमक दी है।
यह बदलाव केवल आंकड़ों की भाषा नहीं बोलता, यह सीमांत क्षेत्रों की सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की कथा भी है। जिस इलाक़े को पहले सीमाई तनाव, अव्यवस्था या पलायन के संदर्भ में देखा जाता था, वहीं अब छोटे-छोटे उद्योग रोज़गार, सामाजिक स्थिरता और आत्मविश्वास की नई परतें गढ़ रहे हैं।
डिजिटल भारत अभियान की लहर में एमएसएमई पंजीयन प्रणाली का रूपांतरण दिखाता है कि प्रशासनिक सरलीकरण कैसे विकास की गहराइयों को छू सकता है। उद्यम रजिस्ट्रेशन की नई परिभाषाएँ और पारदर्शी प्रक्रियाएँ सिर्फ़ व्यवसाय चलाने की सुविधा नहीं हैं, बल्कि यह छोटे लोगों के बड़े सपनों को औपचारिक दर्जा देने की कोशिश हैं।
उत्तर-पूर्व में इस डिजिटल समावेशन ने न सिर्फ़ पंजीकरण की संख्या बढ़ाई, बल्कि व्यापारिक आत्मनिर्भरता को एक सामरिक कवच भी बना दिया। सीमाई इलाक़े अब सिर्फ़ रक्षा के दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि आर्थिक आत्म-सुरक्षा के मॉडल के रूप में उभर रहे हैं। यह उसी भारत का चेहरा है जो अपने डिजिटल शासन के ज़रिए संतुलित क्षेत्रीय विकास की राह पर बढ़ रहा है।





