चीन से आगे भारत: वायु-शक्ति का नया शिखर
विश्व के आसमान पर भारत का परचम अब और ऊँचा हो गया है। WDMMA की नवीनतम ग्लोबल एयर पावर रैंकिंग में भारतीय वायुसेना तीसरे स्थान पर प्रतिष्ठित हुई है – अमेरिका प्रथम, रूस द्वितीय, भारत तृतीय, और चीन चतुर्थ स्थान। यह क्रम मात्र गणना नहीं, बल्कि वीरत्व, तकनीकी परिष्कार और अटल संकल्प का जीवंत संतुलन है। भारत का चीन से ऊपर आना बताता है कि एयर डोमिनेंस अब सिर्फ संख्या नहीं, बल्कि कॉम्बैट-प्रूव्ड इंटेग्रेशन, मिशन-तैयारी और रणनीतिक दक्षता का परिणाम है।
राफेल की बहु-भूमिका एवं सटीकता, सुखोई-30MKI की दीर्घ-भुजा, मिराज की भरोसेमंद धार और तेजस का स्वदेशी आत्मविश्वास – यह सूची “एयर पावर आर्किटेक्चर” की रीढ़ है। इसी में AEW&C की सतर्क निगरानी, एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग की दीर्घ श्वास, ग्राउंड-बेस्ड एयर डिफेंस की ढाल, और नेटवर्क-सेंट्रिक वारफेयर की बुद्धि – सब एक साथ भारत की वायु-शक्ति को भविष्यगामी बनाते हैं। भारत अब केवल रिएक्टिव नहीं, प्री-एम्प्टिव और प्रेडिक्टिव एयर फोर्स है। बालाकोट जैसे अभियानों ने स्पष्ट कर दिया है कि दूर, तेज, सटीक और निम्न-प्रोफ़ाइल निर्णायकता भारतीय वायुसेना के मानक हैं।
पर असली कथा मशीनों की नहीं, मन और आत्मविश्वास की है – कॉकपिट में दीक्षा पाए पायलटों की, रात की योजना-बैठकों में सन्नद्ध स्क्वाड्रनों की, और हैंगरों में धड़कते लॉजिस्टिक्स-रखरखाव के अनुशासन की। जब मेंटेनेंस संस्कार बनता है, जब आपूर्ति-शृंखला निर्बाध चलती है, जब डेटा–अनुशासन–इंटेल की त्रिवेणी मिशन-योजना में बहती है – तभी कोई रैंकिंग सार्थक होती है।
आगे का पथ भी स्पष्ट है – स्वदेशी एयरोस्पेस की अगली छलांग: उन्नत तेजस, AMCA, बेहतर सेंसर-फ्यूज़न, AI-सहायक मिशन सिस्टम, और त्रि-सेन्य संयुक्तता की पूर्णता – थल, नभ, नील का सुव्यवस्थित समन्वय। संदेश सीधा है: ऊँचाई दिखाई दे चुकी है; अब उसे स्थायित्व देना है। मनोबल, मेंटेनेंस और मॉडर्नाइज़ेशन के बल पर तीनों को एक साथ साधकर अपनी वायुशख्ति बढ़ानी है। भारतीय वायुसेना का यह उदय सिर्फ विजय-घोष नहीं, विश्वास-पत्र है। भारत का आकाश सुरक्षित है, और रहेगा। भारत के लड़ाकू विमानों की स्टीलकाया में कर्तव्य का धड़कता दिल है, और हर उड़ान में राष्ट्र का स्वाभिमान।








