सीमा पर शांति का प्रहरी-गुंजी ग्राम
एक छोटा-सा गाँव – पर भूमिका इतनी बड़ी कि मानचित्र भी छोटा पड़ जाए। सीमांत गाँव गुंजी, पिथौरागढ़ का वह मोर्चा है, जहाँ भारत-नेपाल-तिब्बत की सीमाएं एक धुरी बनाती हैं। यहाँ आकर सद्यः अनुभूति होती है कि हिमालय-हृदय की कंदरा में बसा यह ग्राम गुंजी राष्ट्र-प्राण का अनुनाद है। यह भारत के संकल्प, पड़ोस के देशों के साक्ष्य, और शिखरों के शील का संगम स्थल है। यह ग्राम, श्रद्धा का तीर्थ है, सुरक्षा का व्रत है। कैलाश-मानसरोवर, आदि कैलाश की यात्राओं के पावन चरण यहीं से गुजरते हैं। यह सीमा का अमोघ रक्षक भी है। सीमांत जीवन का अनुशासन, ऊँचे आकाश की तरह यहाँ विस्तृत है। यहाँ संसाधन कम हैं, लेकिन संकल्प अडिग।
कठिन भू-आकृति, तेज़ हवाएँ, सीमित संसाधन – फिर भी चौकसी अक्षुण्ण। आईटीबीपी की पदचाप, स्थानीय युवाओं का सहयोग, और हर मोड़ पर जिम्मेदारी – यही गुंजी का ‘मूलमंत्र’ है। यहाँ सीमाओं की रक्षा, भूगोल की समस्या नहीं, मनोबल का समाधान है।
भारत का सीमांत गाँव गुंजी वह दीया है जो तूफ़ानों से नहीं, अपने धैर्य से जलता है; जिसकी लौ में राष्ट्रदीक्षा दीखती है।








