तक्सिंग गाँव: सीमांत विकास से आत्मनिर्भरता की मिसाल
अरुणाचल प्रदेश के तवांग ज़िले में स्थित तक्सिंग गाँव, सागरस्तर से लगभग 3,200 मीटर की ऊँचाई पर बसा एक छोटा सा कस्बा है। चीन की अक्साई चिन या दक्षिण तकलाकोटी सीमा रेखा से मात्र 8 किलोमीटर दूर रहने के कारण यह क्षेत्र सदैव सैन्य व सामरिक परिदृश्य का अंग रहा है। 1962 के भारत–चीन युद्ध के बाद से ही तक्षिंग की पगडंडियाँ पुलों और चौकियों से घिरी रहीं, पर विकास की धीमी चाल ने यहाँ के निवासियों को वर्षों तक सीमांत जीवन अनिवार्य कर दिया।
वर्ष 2024 में केंद्रीय सरकार द्वारा शामिल किया गया Vibrant Village Programme, 115 सीमावर्ती गाँवों में से एक, तक्सिंग को नई ऊर्जा से पूर्ण कर रहा है। पिछले बारह महीनों में यहाँ अभूतपूर्व कार्य हुए हैं:
- 12 किलोमीटर कच्ची सड़क का डामरकरण हुआ, जिससे प्रमुख बाजार तवांग तक यात्रा का समय 4 से 1.5 घंटे पर आ गया।
- 3 नए सस्पेंशन पुलों ने तीव्र नदियाँ पार करना सुरक्षित बनाया; बच्चों का विद्यालय जाना अब बर्फ व बहाव से अप्रभावित।
- 24×7 सौर ऊर्जा आधारित माइक्रो-ग्रिड प्रणाली ने 450 घरों में स्थायी बिजली पहुँचाई।
- 120 से अधिक होमस्टे – औसतन ₹1,200 प्रतिदिन से शुरू – स्थापित हुए; स्थानीय पैलेफ़ोनिया और लिकोरिया संस्कृति से परिचय दे रहे हैं।
- 75 महिलाओं ने स्वरोजगार आरंभ किया – कुटीर उद्योगों में बांस हस्तशिल्प, ऊनी कपड़े और जैविक चाय की पैकेजिंग शामिल।
शिक्षा क्षेत्र में परियोजना : “डिजिटल शाला” के तहत 80% विद्यार्थियों ने ऑनलाइन कक्षाओं में भाग लिया; 15 नए ई-लर्निंग कियोस्क स्थापित।
स्वास्थ्य क्षेत्र में 12 मोबाइल मेडिकल यूनिट व 4 स्थायी क्लिनिक, 1,000+ लाभार्थियों को प्रसवपूर्व देखभाल, टीकाकरण और दूरस्थ टेलीमेडिसिन सुविधा उपलब्ध कराई।
राजनीतिक दृष्टि से तवांग ज़िला, असम रेल व सड़क निगम के सहयोग से आर्थिक गलियारा “कलादान मल्टी-मॉडल ट्रांजिट” के तहत म्यांमार से भारत–बांग्लादेश तक व्यापार लिंक के नियोजन में मध्यवर्ती भूमिका अदा कर रहा है। पूर्वोत्तर क्षेत्र की GDP में 2020–25 के बीच 8.2% वार्षिक वृद्धि दर दर्ज की गई; पर्यटन, कृषि व हस्तशिल्प इसका मुख्य आधार बने। सीमा सुरक्षा बल (BSF) व Indo–Tibetan Border Police (ITBP) की 5 सामरिक चौकियाँ तक्सिंग एवं आसपास के गाँवों की निगरानी करती हैं, जिससे पिछले दो वर्षों में किसी प्रकार की सीमा-घुसपैठ की घटना दर्ज नहीं हुई।

चित्र: तक्सिंग, अरुणाचल प्रदेश
भौगोलिक चुनौती: ठंड, हिमस्खलन तथा खड्डों से अवरोध अब सामुदायिक आपदा तैयारी केंद्रों (Community Disaster Response Hubs) द्वारा स्थानीय स्वयंसेवक प्रशिक्षण से नियंत्रित की जाती है। “सीमा जागरण मंच” की पहल पर यहाँ के युवाओं को 48 घंटे का बुनियादी बचाव-कैम्प प्रशिक्षण प्रदान किया गया, जिससे 2025 के मानसून में निकटवर्ती गांवों में 30 जीवन बचाए गए।
ऐतिहासिक रूप से इस क्षेत्र में संगम का प्राचीन व्यापार मार्ग वंशी-राजाओं द्वारा इस्तेमाल किया जाता था। आज वही मार्ग ‘Act East Policy’ के तहत आधुनिक राजमार्ग व रेल नेटवर्क से जुड़कर एक बार फिर राष्ट्र-रक्षा और आर्थिक प्रगति का सेतु बनता दिख रहा है। यह पहल केवल भौतिक निर्माण नहीं, आत्मनिर्माण का जीता जागता प्रमाण है—जहाँ सीमांत भारत ‘विकसित भारत’ की अस्मिता का संदेश देश-विदेश में फैलाता है। विकास का प्रहरी तक्षिंग गाँव अब न सिर्फ आत्मनिर्भरता की मिसाल, बल्कि समूचे सीमावर्ती भारत के लिए प्रेरणा स्रोत बन चुका है।








