भारत का अदृश्य कवच: स्टील्थ युग का अंत निकट
भारत की रक्षा तकनीक अब एक नए आयाम में प्रवेश कर चुकी है। ‘भारत का अदृश्य कवच’ – यह कोई मिथक नहीं, बल्कि हकीकत बनता विज्ञान है। भारतीय रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने हाल ही में Passive Coherent Location Radar (PCLR) प्रणाली का सफल परीक्षण किया है, जो आने वाले समय में युद्ध की परिभाषा बदल सकती है। PCLR, दरअसल, एक ऐसी अत्याधुनिक रडार तकनीक है जो Low Observable Detection Network का हिस्सा है। पारंपरिक रडारों के विपरीत, यह अपने स्वयं के रेडियो तरंग प्रसारित नहीं करता, बल्कि वातावरण में पहले से मौजूद एफएम रेडियो, टीवी ब्रॉडकास्ट और अन्य संचार तरंगों को “रिफ्लेक्टेड सिग्नल” के रूप में ग्रहण कर लक्ष्य की पहचान करता है। यह Passive यानी निष्क्रिय है, Coherent यानी तरंगों के फेज़-संबंधों को पहचानने में सक्षम है, और Multistatic यानी कई स्रोतों से एक साथ सूचनाएँ प्राप्त करने में समर्थ है।
इस तकनीक की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह स्टील्थ (Stealth) विमानों को भी पकड़ सकती है – ऐसे विमान जिन्हें पारंपरिक रडार नहीं देख पाते। F-35 या B-2 जैसे स्टील्थ प्लेटफॉर्म उच्च-आवृत्ति रडारों से बचने के लिए डिज़ाइन किए जाते हैं, परंतु PCLR निम्न आवृत्ति (Low Frequency Band) में काम करता है, जहाँ से परावर्तन अवश्य मिलता है। यही इसे ‘एंटी-स्टील्थ’ बनाता है। इसके अतिरिक्त, PCLR जामिंग और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध तकनीकों के प्रति भी अत्यधिक प्रतिरोधी है, क्योंकि यह कोई सक्रिय तरंग नहीं भेजता जिसे शत्रु बाधित कर सके। इसकी मल्टी-स्टेटिक नेटवर्किंग इसे एक साथ अनेक भौगोलिक बिंदुओं से डेटा संग्रहित करने और 3D लोकेशन सटीकता के साथ लक्ष्य पहचानने की क्षमता देती है।
भारत के लिए यह तकनीक न केवल सीमा सुरक्षा में, बल्कि रणनीतिक निगरानी में भी क्रांतिकारी भूमिका निभाएगी। आने वाले वर्षों में जब यह प्रणाली भारतीय सीमाओं पर पूर्णतः तैनात होगी, तब दुश्मन का कोई भी स्टील्थ विमान, ड्रोन या मिसाइल भारत की नजर से छिप नहीं सकेगा। स्पष्ट है – अब ‘अदृश्य’ की अवधारणा भारत की सीमाओं पर समाप्त हो जाएगी। रक्षा के इस नए युग में भारत का संदेश साफ है: जो आकाश में होगा, वह निगाहों से ओझल नहीं रहेगा।








