विशद विमर्श

सीमाओं के परे, भविष्य के संघर्ष

तकनीकी सामरिक युद्ध: सीमाओं के परे, भविष्य के संघर्ष   डॉ. आर. के. अरोड़ा (सीमा सुरक्षा, प्रौद्योगिकी, साइबर सुरक्षा तथा लोकनीति के विशेषज्ञ) आज दुनिया संघर्षों को लड़ने और प्रतिरोध को बनाए रखने के तरीके में आमूल-चूल परिवर्तन देख रही है। हाल ही में भारत-पाक के बीच जो तनाव बढ़ा, जिसमें पहलगाम आतंकी हमले के…

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विशद विमर्श

जलवायु सुरक्षा और पर्यावरणीय प्रवास

जलवायु सुरक्षा और पर्यावरणीय प्रवास: 21वीं सदी में उभरती वैश्विक चुनौती मेजर जनरल वी के तिवारी (Retd) हाल के वर्षों में, जलवायु सुरक्षा और पर्यावरणीय प्रवास के अंतर्संबंध ने नीति निर्माताओं, विद्वानों और वैश्विक संगठनों का ध्यान आकर्षित किया है। जैसे-जैसे जलवायु परिवर्तन तेज़ होता जा रहा है, इसके प्रभाव पर्यावरणीय क्षरण से आगे बढ़कर…

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विशद विमर्शसीमा समाचारिका

पंच परिवर्तन : आत्मा से राष्ट्र तक परिवर्तन की यात्रा

एक वैज्ञानिक, व्यवहारिक और सभ्यतागत रूपांतरण की परिकल्पना   भोगेन्द्र पाठक संघ का शताब्दी वर्ष उत्सव नहीं, बल्कि राष्ट्रीय चेतना के पुनर्जागरण का उद्घोष है। ‘पंच परिवर्तन’ इसी उद्घोष का मूर्त रूप है। यह एक ऐसा अभियान है जो भारत की आत्मा, सामाजिक ढाँचे और नागरिक संस्कारों को समग्र रूप से पुनर्गठित करने का संकल्प…

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विशद विमर्शसीमा समाचारिका

डिजिटल युद्ध और भारत की सुरक्षा

डेटा सुरक्षा, डार्क वेब और अवैध वित्तीय प्रवाह लेफ्टिनेंट जनरल आशीष रंजन प्रसाद (सेवानिवृत्त) वर्तमान युग में किसी भी राष्ट्र की सुरक्षा केवल भूमि, समुद्र, आकाश और अंतरिक्ष तक सीमित नहीं रही है। अब यह डिजिटल डोमेन में भी विस्तारित हो गई है। भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र और उभरती हुई तकनीकी महाशक्ति है।…

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विशद विमर्शसीमा समाचारिका

मंदिर: सीमा सुरक्षा का सनातन स्तंभ   

 देवालय से दुर्ग तक : मंदिरों की राष्ट्रीय सीमा–चेतना   भोगेन्द्र पाठक (5 नवम्बर 2025 को सीमा जागरण मंच के ‘मंथन’’ कार्यक्रम में दिल्ली में संतों और आचार्यों द्वारा लिया गया यह निर्णय कि पूर्वोत्तर की अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं पर प्रथम चरण में सौ मंदिर स्थापित किए जाएँ, केवल धार्मिक गतिविधि नहीं, बल्कि सहस्राब्दियों पुराने ‘मंदिर–सीमा–सुरक्षा-तंत्र’…

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विशद विमर्शसीमा समाचारिका

जाली मुद्रा: मौन खतरा

जाली मुद्रा: अर्थव्यवस्था की जड़ों पर प्रहार, राष्ट्र की सुरक्षा पर अदृश्य खतरा आशीष केसरवानी  एक देश की राष्ट्रीय प्रगति की रीढ़ उसकी वित्तीय प्रणाली होती है। हालांकि, इस प्रणाली में जाली मुद्रा का प्रवेश एक मौन लेकिन बहुआयामी खतरा पैदा करता है जो आर्थिक स्थिरता और राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डालता है। नकली…

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