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वन्दे मातरम् में रस, छंद और अलंकार

वन्दे मातरम् में रस, छंद और अलंकार का संगम महान राष्ट्रकवि बंकिम चंन्द्र चटर्जी का ‘वन्दे मातरम्’ केवल एक राष्ट्रगीत नहीं है। यह भारतीय चेतना की वह काव्यात्मक अभिव्यक्ति है, जिसमें भाषा, भावानुभूति और भौगोलिक यथार्थता एक अभूतपूर्व सामंजस्य हुआ है। इस कृति की सर्वाधिक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि बंकिम ने संस्कृत के तत्सम…

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वन्दे मातरम्: वर्षभर राष्ट्रीय उत्सव

राष्ट्रगीतः वन्दे मातरम् वर्षभर राष्ट्रीय उत्सव (2025-2026) 150 वर्षों की गौरव-गाथा 7 नवम्बर, 1875 – यह दिन भारतीय इतिहास में स्वर्णाक्षरों से अंकित है। जब पश्चिम बंगाल के नैहाटी नगर स्थित कंधालपाड़ा गाँव में, एक आम के पेड़ के नीचे बैठकर बंकिम चन्द्र चट्टोपाध्याय ने अक्षय नवमी के पावन अवसर पर वन्दे मातरम् की रचना…

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वन्दे मातरम् : एक अनूठा गीत

वन्दे मातरम् : विश्व-इतिहास में एक अनूठा गीत बंकिम चन्द्र चटर्जी की अमर रचना का वैश्विक महत्व  जब हम विश्व के इतिहास में झाँकते हैं, तब हमें अनेक राष्ट्रगीत, देशभक्ति-गीत और क्रांतिकारी गान मिलते हैं। फ्रांस का La Marseillaise, अमेरिका का The Star-Spangled Banner, ब्रिटेन का God Save the King –  ये सब अपने-अपने देशों…

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अमर राष्ट्रगीत के 150 वर्ष

वन्दे मातरम् : भारत की अमर चेतना का शाश्वत गीत सात नवम्बर, अठारह सौ पचहत्तर। यह तिथि, यह दिन, यह पल भारतीय चेतना के लिए कोई साधारण क्षण नहीं था। यह दिन भारतीय इतिहास में स्वर्णाक्षरों से अंकित है। पश्चिम बंगाल के नैहाटी नगर में, एक छोटे से गाँव कंधालपाड़ा में, एक आम के पेड़…

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