सीमा समाचारिका

गाँव–गाँव संवाद: राष्ट्र–रक्षा का संकल्प

राष्ट्रीय चेतना और सामूहिक दायित्व का शंखनाद  सीमा जागरण का अभिनव आयोजन: उत्तरकाशी की सीमावर्ती गाँवों में संगोष्ठी उत्तरकाशी जनपद के भटवाड़ी प्रखंड की सीमांत धरती पर हाल ही में एक सार्थक वैचारिक संगोष्ठी का आयोजन हुआ, जहाँ सीमा जागरण मंच ने सीमावर्ती ग्रामों के जन-जीवन से प्रत्यक्ष संवाद स्थापित किया। हिमालय की शांत, किंतु…

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सीमा समाचारिका श्रीनगर के लाल चौक पर दीपोत्सव

दीयों से रौशन हुआ लाल चौक

“सीमाओं पर देशभक्ति का दीपक जलता रहे”-सीमा जागरण मंच जम्मू-कश्मीर की राजधानी श्रीनगर के लाल चौक पर कई वर्षों के बाद दीपोत्सव का त्योहार हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। यहां भव्य दीपोत्सव के साथ महाआरती का आयोजन भी किया गया। स्थानीय लोगों ने दीयों से ‘ऑपरेशन सिंदूर’ लिखा।दीयों की रौशनी में पूरा शहर जगमगा उठा।…

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सीमा समाचारिका

सीमा पर शांति का प्रहरी

सीमा पर शांति का प्रहरी-गुंजी ग्राम एक छोटा-सा गाँव – पर भूमिका इतनी बड़ी कि मानचित्र भी छोटा पड़ जाए। सीमांत गाँव गुंजी, पिथौरागढ़ का वह मोर्चा है, जहाँ भारत-नेपाल-तिब्बत की सीमाएं एक धुरी बनाती हैं। यहाँ आकर सद्यः अनुभूति होती है कि हिमालय-हृदय की कंदरा में बसा यह ग्राम गुंजी राष्ट्र-प्राण का अनुनाद है।…

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सीमा समाचारिका

भारत का नया अदृश्य कवच

भारत का नया अदृश्य कवच – सीमाओं पर विश्वास की अमिट छाप रक्षा तकनीक के क्षेत्र में एक नया युग आरंभ हो चुका है, और इसका नाम है Passive Coherent Location Radar (PCLR)। यह साधन Low Observable Detection Network का प्रमुख अंग है—एक ‘एंटी-स्टील्थ रडार ग्रिड’ जो पारंपरिक रडारों की कमजोरियों पर प्रहार करता है।…

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सीमा-दृष्टि

विकसित भारत का द्वार

उत्तर–पूर्व भारत: विकसित भारत का द्वार भारत की पावन भूमि पर उदीयमान सूर्य का प्रथम स्पर्श जहाँ होता है, वह उत्तर–पूर्व का यह दिव्य प्रांत आज राष्ट्र की नवीन आशाओं का केंद्र बन गया है। जो कभी केवल ‘फ्रंटियर रीजन’ कहा जाता था, वह आज विकास की ‘फ्रंट रनर’ बनने की दिशा में अग्रसर है।…

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सीमा-दृष्टि

जाग्रत सीमा, उज्ज्वल राष्ट्र

               जाग्रत सीमा, उज्ज्वल राष्ट्र: सुरक्षित सीमा, सजग नागरिक भारत की छब्बीस हज़ार दो सौ निन्यानवे दशमलव आठ किलोमीटर लंबी सीमा-रेखा केवल मानचित्र पर उठी कोई सूखी रेखा नहीं, वह तो मानो माता की देह पर स्नेह से डला हुआ एक वस्त्र है – जैसे माँ अपने आँचल से…

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