विशद विमर्शसीमा समाचारिका

सोमनाथ मंदिर – विरासत, विध्वंस और पुनर्स्थापन

सोमनाथ: सीमा, सभ्यता और स्वाभिमान की सहस्राब्दी   – भोगेन्द्र पाठक सोमनाथ भारतीय सभ्यता की वह चेतना-धुरी है जिसके चारों ओर इतिहास की आँधियाँ घूमती रहीं, किंतु जिसकी ज्वाला कभी मंद नहीं पड़ी। सोमनाथ का नाम लेते ही भारतीय चेतना के अतल-पृष्ठों पर एक दीर्घ स्मृति-ज्योति प्रज्वलित हो उठती है, जैसे आदिगुरु शिव की ध्यान–निमीलित दृष्टि…

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विविध आयोजन

अखिल भारतीय बैठक 2025

अखिल भारतीय बैठक 2025, अहमदाबाद (7-9 नवम्बर ) ‘अभेद्य सीमा, अखंड भारत’ का उद्घोष दिशा, दृष्टि और दायित्व का महाजागरण   भारत की सीमाओं पर सतत जागरण में स्थित प्रहरियों की चेतना जब समवेत होती है, तब इतिहास को नई दिशा प्राप्त होती है। इसी समवेत चेतना का विराट अनुष्ठान सीमा जागरण मंच की अखिल…

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विशद विमर्श

माड धरा जैसलमेर : सामरिक पहलू

माड़ धरा जैसलमेर: रेगिस्तान और भारत की रणनीतिक शक्ति का सामरिक महत्व डॉ ममता भाटी प्राचीन साहित्य में थार प्रदेश को मरू , मरुमंडल , मरूदेश , मरूस्थल , मरुधन्व , मरूकान्तार  आदि शब्दों से सम्बोधित किया गया है, जिसका शाब्दिक अर्थ निर्जल प्रदेश से है। इस मरुधरा की ऐतिहासिकता इस प्रदेश में उपलब्ध पैलियोजोइक,…

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विशद विमर्श

रामध्वज के साए में जागती भारतीय अस्मिता

अयोध्या के आकाश पर रामध्वज: राष्ट्रचेतना, आस्था और सनातन पुनर्जागरण का घोष     – भोगेन्द्र पाठक, वरिष्ठ पत्रकार अयोध्या के श्रीराम मंदिर में मार्गशीर्ष की शुक्ल पंचमी यानी विवाह पंचमी, तदनुसार 25 नवम्बर 2025 को होने वाला ध्वजारोहण केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि राष्ट्रचेतना, धर्मनिष्ठा और सनातन संस्कृति की पुनर्पुष्टि का घोष है।…

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विशद विमर्श

सीमाएं टूटीं तो टूटे मंदिर

  सीमाएं टूटीं तो टूटे मंदिर – भोगेन्द्र पाठक, वरिष्ठ पत्रकार सीमाएँ किसी राष्ट्र की संप्रभुता की परिभाषा हैं। ये केवल भौगोलिक विभाजन नहीं हैं, बल्कि देश के अस्तित्व, सांस्कृतिक पहचान और राजनीतिक स्वतंत्रता के प्रतीक हैं। एक सुरक्षित सीमा के अभाव में राष्ट्र अपनी सार्वभौमिकता खो देता है। सीमा सुरक्षा में कोई समझौता राष्ट्रीय…

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सीमा समाचारिका

धुबरी: सीमा-सुरक्षा के नये आयाम

धुबरी: भारत की सीमा-सुरक्षा के नये आयाम राष्ट्रीय सीमाओं की रक्षा करना, एक जीवंत और स्वाभिमानी राष्ट्र की पहचान है। यह केवल सेना का कर्तव्य नहीं, बल्कि प्रत्येक देशवासी का पवित्र अधिकार और महान दायित्व है। असम के धुबरी जिले में जो नई सैन्य छावनी स्थापित की जा रही है, वह केवल एक सामरिक निर्णय…

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