विशद विमर्शसीमा समाचारिका

बंगाल, विवेकानंद और सभ्यतागत संकट

    विवेकानंद दर्शन और भारत का सभ्यतागत संकट भोगेन्द्र पाठक स्वामी विवेकानंद का जन्म केवल एक महापुरुष का जन्म नहीं था, बल्कि वह क्षण था जब भारतीय चेतना ने आधुनिक युग में नई करवट ली। उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया कि अध्यात्म जीवन से पलायन नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति उत्तरदायित्व निभाने…

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विशद विमर्शसीमा समाचारिका

रक्षा शक्ति को नई धार

  79,000 करोड़ का भारत का संकल्प राष्ट्र भारत आज एक अभूतपूर्व सुरक्षा परिस्थिति का सामना कर रहा है। उत्तर में हिमालय की सर्वोच्च चोटियों से लेकर बांग्लादेश की समतल सीमाओं तक, और पश्चिमी मरुस्थलों से पूर्वी वनक्षेत्रों तक –  भारत की 15,106 किलोमीटर की सीमाएँ अनेक सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर रही हैं। पाकिस्तान…

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