सीमा-दृष्टि

मातृभूमि की सीमाओं का संरक्षण

माता का आंचल: सीमाएँ, संस्कृति और राष्ट्र-रक्षा मानव-सभ्यता के उषाकाल से लेकर आज के इस आधुनिक काल तक, मानवता की समस्त संस्कृतियों के हृदय में एक ऐसा अमर सत्य निहित रहा है, जो कालातीत है, सीमाहीन है, और जिसकी गहराई अथाह है। वह सत्य यह है कि धरती को माता के रूप में पूजने की…

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सीमा समाचारिका

हिंदुमलकोट-पश्चिमी मोर्चे का रणक्षेत्र

हिंदुमलकोट: जहाँ से शुरू होती है भारत–पाक सीमा की कहानी राजस्थान के श्रीगंगानगर ज़िले में स्थित हिंदुमलकोट वह भौगोलिक बिंदु है जहाँ से भारत–पाकिस्तान की 1,070 किमी लंबी अंतर्राष्ट्रीय सीमा की शुरुआत होती है। अरावली से दूर, थार की धरती पर बसे इस शांत कस्बे ने भारत के इतिहास, सुरक्षा और कृषि—तीनों ही क्षेत्रों में…

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सीमा समाचारिका

धुबरी: सीमा-सुरक्षा के नये आयाम

धुबरी: भारत की सीमा-सुरक्षा के नये आयाम राष्ट्रीय सीमाओं की रक्षा करना, एक जीवंत और स्वाभिमानी राष्ट्र की पहचान है। यह केवल सेना का कर्तव्य नहीं, बल्कि प्रत्येक देशवासी का पवित्र अधिकार और महान दायित्व है। असम के धुबरी जिले में जो नई सैन्य छावनी स्थापित की जा रही है, वह केवल एक सामरिक निर्णय…

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सीमा-दृष्टि

अक्षय सीमा, अखंड राष्ट्र

अक्षय सीमा, अखंड राष्ट्र: भू-सीमा-सुरक्षा के सूत्र भारत की भू-सीमाओं का प्रबंधन राष्ट्रीय सुरक्षा की आधारशिला है। 15,106 किलोमीटर भूमि सीमा और 11,098 किलोमीटर तटीय सीमा के साथ भारत की सीमा प्रबंधन व्यवस्था में निहित जटिलताओं, चुनौतियों और समसामयिक समाधानों का विस्तृत विवरण जानना आवश्यक है। ‘एक सीमा, एक बल’ के सिद्धांत पर आधारित वर्तमान…

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