विशद विमर्शसीमा समाचारिका

जम्मू-कश्मीर: जनसांख्यिकीय संतुलन अत्यावश्यक

“जम्मू-कश्मीर की सामाजिक-राजनीतिक स्थिरता की कुंजी: जनसांख्यिकीय संतुलन”- अश्विनी कुमार च्रोंगू      (जम्मू-कश्मीर का प्रश्न केवल एक प्रशासनिक या राजनीतिक विषय नहीं, बल्कि राष्ट्र की सीमा-सुरक्षा और सांस्कृतिक अखंडता से जुड़ा मूल मुद्दा है। अश्विनी कुमार च्रोंगू द्वारा प्रस्तुत यह विचारपुंज बताता है कि घाटी में जनसांख्यिकीय असंतुलन ने न केवल कश्मीरी पंडित समुदाय…

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विशद विमर्शसीमा समाचारिका

मंदिर: सीमा सुरक्षा का सनातन स्तंभ   

 देवालय से दुर्ग तक : मंदिरों की राष्ट्रीय सीमा–चेतना   भोगेन्द्र पाठक (5 नवम्बर 2025 को सीमा जागरण मंच के ‘मंथन’’ कार्यक्रम में दिल्ली में संतों और आचार्यों द्वारा लिया गया यह निर्णय कि पूर्वोत्तर की अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं पर प्रथम चरण में सौ मंदिर स्थापित किए जाएँ, केवल धार्मिक गतिविधि नहीं, बल्कि सहस्राब्दियों पुराने ‘मंदिर–सीमा–सुरक्षा-तंत्र’…

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