‘धुरंधर’: राष्ट्र-चेतना का शंखनाद
‘धुरंधर’: नैरेटिव के मोर्चे पर भारत की सांस्कृतिक स्वाधीनता सिनेमा केवल मनोरंजन नहीं, एक वैचारिक अस्त्र है। जिसे हम ‘सॉफ्ट पावर’ कहते हैं, उसका सबसे प्रभावी माध्यम है सिनेमा। लेकिन दशकों तक भारतीय सिनेमा ने इस शक्ति का उपयोग भारत की ही जड़ों को खोदने में किया। महर्षि अरविन्द ने जिसे ‘चिन्मय शक्ति’ कहा…



