विशद विमर्शसीमा समाचारिका

वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम का पुनरावलोकन

सीमाओं पर जीवन की लौ: वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम (VVP) का पुनरावलोकन   लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से.नि.), राज्यपाल, उत्तराखण्ड   “सीमा पर सूरज सबसे पहले उगता है, और वहीं से भारत हर रोज़ नया स्वप्न देखता है।” सीमाएँ किसी भी राष्ट्र की आँखें होती हैं – सजग, संघर्षशील और सर्द हवाओं में भी प्राणवान। एक…

Read article
विशद विमर्श

सीमावर्ती समुदाय: सांस्कृतिक एवं मनोवैज्ञानिक सुरक्षा

सीमावर्ती समुदायों में सांस्कृतिक, सामाजिक और मनोवैज्ञानिक सुरक्षा डॉ. मनीष सिंह, वैज्ञानिक ‘ई’, डीआरडीओ विश्वभर में सीमावर्ती समुदाय भौगोलिक और राजनीतिक विशिष्टताओं के कारण जटिल सामाजिक, मनोवैज्ञानिक और सांस्कृतिक चुनौतियों का सामना करते हैं। सीमाएं, चाहे भौतिक हों या रूपकात्मक, इन समुदायों के व्यक्तियों के जीवन और सामूहिक पहचान को गहराई से प्रभावित करती हैं।…

Read article
विशद विमर्शसीमा समाचारिका

पूर्वोत्तर सीमा, व्यापार और समृद्धि

भूमि सीमाएँ और आर्थिक सुरक्षा: पूर्वोत्तर भारत में सीमा व्यापार और विकास कावेरी जैन भारत सात देशों के साथ कुल 15,106.7 किलोमीटर की भूमि सीमा साझा करता है। इसमें से 5,182 किलोमीटर, लगभग एक-तिहाई, पूर्वोत्तर क्षेत्र में है, जो बांग्लादेश, चीन, भूटान और म्यांमार के साथ सीमाएं साझा करता है। यह पूर्वोत्तर क्षेत्र को न…

Read article
सीमा समाचारिका

हिमालय का प्रथम गाँव करज़ोक

करज़ोक: हिमालय की छाती पर भारत का पहला गाँव हिमालय के निस्तब्ध आकाश के नीचे, जहाँ हवा प्रार्थना-ध्वजाओं से संवाद करती है, वहीं त्सो मोरीरी झील के किनारे बसा है करज़ोक, यह केवल एक गाँव नहीं, बल्कि सीमांत पर खड़े उस राष्ट्रभाव का नाम है, जो प्रतिकूल परिस्थियों में भी मुस्कुराता है और भविष्य की…

Read article
सीमा समाचारिका

सब्रूम– सीमा के साँचे में रचा जीवन

सब्रूम: भारत-बांग्लादेश सीमा पर इतिहास, संस्कृति और राष्ट्र-चेतना का संगम आज आपको लिए चलते हैं भारत-बांग्लादेश सीमा पर स्थित त्रिपुरा राज्य के दक्षिणी छोर में बसे एक सुंदर, सजीव और संवेदनशील कस्बे सब्रूम की ओर। यह कोई साधारण सीमावर्ती नगर नहीं है; यहाँ का पूरा सामाजिक जीवन सीमा के साँचे में ढला हुआ है। दक्षिण…

Read article
सीमा समाचारिका

ग्नाथंग : पर्वत, परंपरा और सीमा का संगम

ग्नाथंग : सीमा के सिल्क रूट पर भारत का प्रथम गाँव पूर्वोत्तर का अनमोल रत्न और हिमालय की गोद में खिला पहाड़ों का फूल सिक्किम के पूर्वी छोर पर, 13,500 फीट की विराट ऊँचाई पर अवस्थित सीमांत ग्राम ग्नाथंग भारत का वह प्रथम घर है, जहाँ सूर्यदेव अपनी स्वर्णिम रश्मियों से सबसे पहले धरती का…

Read article