सीमा समाचारिका

अगरतला-अखौरा ICP: पूर्वोत्तर का नया द्वार

 हरियाली, भरोसा और पूर्वोत्तर के भविष्य का नया द्वार त्रिपुरा की शांत, घनी हरियाली और सीमा के उस पार फैली बांग्लादेश की उपजाऊ धरती के बीच स्थित अगरतला–अखौरा एकीकृत चेक पोस्ट (ICP) पूर्वी सीमा का वह सशक्त द्वार बन चुका है, जहाँ व्यापार, विश्वास और पड़ोसी सहयोग एक नई राह तैयार कर रहे हैं। 2013…

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विशद विमर्श

क्यों युग-धर्म की हुंकार लक्ष्मीबाई

क्यों लक्ष्मीबाई केवल इतिहास नहीं -भोगेन्द्र पाठक, वरिष्ठ पत्रकार इतिहास के विराट गगन में अनेक नारी–दीप्तियाँ उदित हुईं, जिनकी प्रकाश–रेखाएँ भारत–पथ को आलोकित करती रहीं। पर झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई का प्राकट्य तो ऐसा था, जैसे भारत–माता के ललाट पर गौरव का उज्ज्वल सिंदूर–चिह्न स्वयं उतर आया हो। वह एक ऐसा अदम्य व्यक्तित्व थीं जिनमें…

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सीमा समाचारिका

हिंदुमलकोट-पश्चिमी मोर्चे का रणक्षेत्र

हिंदुमलकोट: जहाँ से शुरू होती है भारत–पाक सीमा की कहानी राजस्थान के श्रीगंगानगर ज़िले में स्थित हिंदुमलकोट वह भौगोलिक बिंदु है जहाँ से भारत–पाकिस्तान की 1,070 किमी लंबी अंतर्राष्ट्रीय सीमा की शुरुआत होती है। अरावली से दूर, थार की धरती पर बसे इस शांत कस्बे ने भारत के इतिहास, सुरक्षा और कृषि—तीनों ही क्षेत्रों में…

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सीमा-दृष्टि महारानी लक्ष्मीबाई

मां भारती की वीर पुत्री की जयंती

जिसने शौर्य को इतिहास में दर्ज कर दिया- रानी लक्ष्मीबाई भारत के ऐतिहासिक आकाश में नारी–शौर्य के अनेक सूर्य उदित हुए, पर रानी लक्ष्मीबाई की उदीप्ति तो मातृभूमि के माथे पर  अविचल वीरता का कुमकुम–चिह्न बनकर चमकी – एक ऐसी राष्ट्रात्मा के रूप में जो पीढ़ियों को संकल्प और स्वाभिमान का संदेश दे रही हैं।…

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विशद विमर्श

अवैध प्रवासन और स्लीपर सेल्स

मूक विध्वंसकः अवैध प्रवासन और स्लीपर सेल्स – ले. जन. (रि.) डॉ. नितिन कोहली,अध्यक्ष, सीमा जागरण मंच, दिल्ली प्रांत भारत का विशाल भू-भाग, उसकी विस्तीर्ण सीमाएँ और विविध सांस्कृतिक विरासत एक अद्भुत संगम के समान हैं, जहाँ अनेक रंगों, भाषाओं और परंपराओं का मिलन हुआ है। इस पावन भूमि की सीमाएँ केवल भौतिक रेखाएँ नहीं,…

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सीमा-दृष्टि

वन्दे मातरम् – एक आध्यात्मिक शक्ति

वन्दे मातरम् – भारत की सुरक्षा की आध्यात्मिक शक्ति 7 नवंबर, 1975 की पवित्र बेला में, जब ब्रिटिश साम्राज्य की तुगलकी फरमान ‘गॉड सेव द क्वीन‘ भारतीय मस्तकों पर विदेशी पराधीनता की मुहर लगा रहा था, तब बंकिम चन्द्र चटर्जी की दिव्य कलम से निकला वह अमर नाद: ‘वन्दे मातरम्’। यह केवल गीत नहीं था,…

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