सीमा-दृष्टि

वन्दे मातरम्: भारत की स्वाधीनता का मंत्र

वन्दे मातरम्: ब्रिटिश दमन से लेकर भारत की सीमा-रक्षा तक   -भोगेन्द्र पाठक, वरिष्ठ पत्रकार जब किसी राष्ट्र की चेतना पर विदेशी सत्ता की हथकड़ी बैठती है, तब कभी-कभी किसी संत के हृदय से ऐसी कविता फूट पड़ती है, जो इतिहास के सर्वाधिक क्रांतिकारी परिवर्तन का कारण बन जाती है। ‘वन्दे मातरम्’ ऐसा ही महामंत्र…

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सीमा समाचारिका

शौर्य और श्रम की नई गाथा खाजूवाला

श्रम और साहस से संवरता खाजूवाला का सीमांत जीवन बीकानेर की मरुभूमि के हृदय में, सीमा से तेईस किमी दूर खाजूवाला स्थित है। कभी बेड़ियावाली कहा जाने वाला यह इलाक़ा, इंदिरा गांधी नहर की एक धार से ऐसा बदला कि अब राजस्थान के कृषि–औद्योगिक नक़्शे में यह चमकता सितारा बन गया है। नहर का संबल…

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विशद विमर्श

रामध्वज के साए में जागती भारतीय अस्मिता

अयोध्या के आकाश पर रामध्वज: राष्ट्रचेतना, आस्था और सनातन पुनर्जागरण का घोष     – भोगेन्द्र पाठक, वरिष्ठ पत्रकार अयोध्या के श्रीराम मंदिर में मार्गशीर्ष की शुक्ल पंचमी यानी विवाह पंचमी, तदनुसार 25 नवम्बर 2025 को होने वाला ध्वजारोहण केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि राष्ट्रचेतना, धर्मनिष्ठा और सनातन संस्कृति की पुनर्पुष्टि का घोष है।…

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सीमा समाचारिकासीमा-दृष्टि

बुद्ध की भूमि पर दो सेनाओं का शांति-संकल्प

बोधगया में भारत-श्रीलंका सैन्य सहयोग का नया अध्याय बिहार के बोधगया में भारत और श्रीलंका के बीच सीमा सुरक्षा, संस्कृति, अध्यात्म और कूटनीति पर वार्ता संपन्न हो गई। यहां 18 से 20 नवंबर 2025 तक भारत-श्रीलंका आर्मी-टू-आर्मी स्टाफ टॉक्स (AAST) का 11वां दौर संपन्न हो गया। यह बैठक श्रीलंका के छह सदस्ययों की अगुवाई में…

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सीमा समाचारिका

बिशिंग : 70 जन 140 करोड़ की सुरक्षा

ब्रह्मपुत्र की प्रथम हुंकार और भारत सीमा का जीवित प्रहरी अरुणाचल प्रदेश का बड़ा हिस्सा चीन सीमा से लगा है। यहां की ऊपरी सियांग जनपद के सुदूरतम भाग में अवस्थित ‘बिशिंग’ एक ऐसा ग्राम है जहाँ भारत का एक छोर समाप्त होता है और चीन की सीमाएँ  आरम्भ होती हैं। यहाँ केवल 22 घर और…

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सीमा-दृष्टि

वन्दे मातरम् की अनादि यात्रा

वन्दे मातरम्: भारत की आत्मचेतना कभी-कभी इतिहास ऐसे विलक्षण क्षणों से गुजरता है, जहाँ एक कलम की नोक, एक विचार की चमक और एक शब्द का स्पर्श समूचे राष्ट्र को झकझोर कर उठा देता है। ऐसा ही एक ऐतिहासिक क्षण तब उदित हुआ, जब बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय की लेखनी से ‘वन्दे मातरम्’ जैसा अमर गीत प्रस्फुटित…

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