लहरों के बीच अंडमान,लक्षद्वीप
द्वीपों की सीमा-संस्कृति और राष्ट्रीय अस्मिता नक्शों की रेखाओं से राष्ट्र नहीं बनते; राष्ट्र बनते हैं संकल्प से। भारत की सीमाएँ वही संकल्प हैं, जिन्हें इतिहास ने तपाया है और बलिदान ने अमर किया है। ये तो राष्ट्र–देह की वह प्रथम–दृश्यमान त्वचा है, जो किसी जीवंत शरीर की बाह्य-सीमा होती है। इससे परे सीमा का…







