वन्दे मातरम् में रस, छंद और अलंकार
वन्दे मातरम् में रस, छंद और अलंकार का संगम महान राष्ट्रकवि बंकिम चंन्द्र चटर्जी का ‘वन्दे मातरम्’ केवल एक राष्ट्रगीत नहीं है। यह भारतीय चेतना की वह काव्यात्मक अभिव्यक्ति है, जिसमें भाषा, भावानुभूति और भौगोलिक यथार्थता एक अभूतपूर्व सामंजस्य हुआ है। इस कृति की सर्वाधिक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि बंकिम ने संस्कृत के तत्सम…





