सीमा समाचारिका

‘धुरंधर’: राष्ट्र-चेतना का शंखनाद

  ‘धुरंधर’: नैरेटिव के मोर्चे पर भारत की सांस्कृतिक स्वाधीनता सिनेमा केवल मनोरंजन नहीं, एक वैचारिक अस्त्र है। जिसे हम ‘सॉफ्ट पावर’ कहते हैं, उसका सबसे प्रभावी माध्यम है सिनेमा। लेकिन दशकों तक भारतीय सिनेमा ने इस शक्ति का उपयोग भारत की ही जड़ों को खोदने में किया। महर्षि अरविन्द ने जिसे ‘चिन्मय शक्ति’ कहा…

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सीमा समाचारिका

‘धुरंधर’: राष्ट्र-संघर्ष का स्वर

फिल्म ‘धुरंधर’: सीमा-जागरण और राष्ट्र-संघर्ष के आख्यान धुरंधर वह पुरुषार्थी है जो युग का सबसे बड़ा बोझ अपने कंधों पर लेता है, विषम समय में झुकता नहीं, टूटता नहीं, वरन् ज्वालामुखी की भाँति भीतर से दहकते हुए भी बाहर से हिमालय की तरह स्थिर दिखाई देता है। इस शब्द की व्यंजना में बल, बुद्धि, दक्षता,…

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