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स्वरोजगार
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स्वावलम्बन व स्वरोजगार-
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स्थानीय उद्यम संवर्धन – पारंपरिक जीविकोपार्जन, व्यवसाय और उद्योगों को प्रोत्साहन देकर ‘लोकल को वोकल‘ बनाना
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कौशल विकास – प्रशिक्षण शिविर एवं कैरियर काउंसलिंग/आजीविका परामर्श
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प्राकृतिक कृषि संवर्धन – जैविक खेती व पशुपालन का गुणात्मक विकास
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सहायक उद्योग विकास – ग्रामीणों को बड़े उद्योगों के पूरक बनाना व प्राथमिक प्रसंस्करण इकाई स्थापना
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स्वयं सहायता समूह – योजना का प्रभावी क्रियान्वयन
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सांस्कृतिक पर्यटन – लोक कला-संगीत-परंपरा और ग्रामीण पर्यटन आधारित स्वरोजगार (होम स्टे आदि
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सहकारिता व्यवसाय – सामूहिक उद्यमिता को प्रोत्साहन
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