
भारत सीमा विकास: थल सीमा समग्र परिदर्शन
भारतीय सीमाओं के विकास की प्रक्रिया न केवल राष्ट्रीय सुरक्षा को मज़बूत करती है, बल्कि स्थानीय समुदायों की जीवन-शैली, अर्थव्यवस्था और सामाजिक समरसता को भी नया आयाम प्रदान करती है। कुछ विशिष्ट बिन्दु विशेष रूप से ध्यातव्य हैं –
1. सड़क विकास: गतिशीलता से रणनीतिक मजबूती
सरहदों पर प्रमुख चुनौतियाँ – रेत के टिलों, ऊबड़-खाबड़ रास्तों और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण तैनात जवानों की त्वरित तैनाती एवं आपूर्ति शृंखला प्रभावित होती थी। वर्तमान केंद्र सरकार ने बड़े पैमाने पर इस क्षेत्र में विकास के कार्य किए हैं-
i. 2280 किलोमीटर सीमा सड़क निर्माण – सितंबर 2024 में गृह राज्य मंत्री ने बताया कि राजस्थान और पंजाब की सीमावर्ती जिलों में 2280 किमी नई सड़कें मंजूर की गईं, जिनका काम गति से चल रहा है। इससे बीएसएफ और आईटीबीपी की तैनाती समय में 25–30 प्रतिशत तक तेज होगी।
ii. 1,450 किमी अस्फ़ाल्ट रोड परियोजना – इंडो-पाक सीमा के आसपास राजस्थान और पंजाब में 4,500 करोड़ रुपये की लागत से 1,450 किलोमीटर सड़कें तैयार की जा रही हैं। इससे स्मगलिंग रूट्स को रोकने में भी मदद मिलेगी, क्योंकि जवान वाहन एवं पैदल दोनों माध्यमों से सीमाओं का त्वरित अध्ययन कर पाएँगे।
iii. ICBR-III के अंतर्गत 875 किमी रणनीतिक मार्ग – भारत-चीन सीमा पर उठाए गए ICBR-III चरण में अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम और उत्तराखंड में 875 किलोमीटर नई सड़कें योजना के तहत बनाए जा रहे हैं, जिनमें से 70% सड़कों का निर्माण अरुणाचल में होगा।
iv. BRO की उपलब्धियाँ – बीआरओ ने पिछले एक दशक में 8,500 किलोमीटर से अधिक मार्ग व 400 स्थायी पुल तैयार किए हैं। अटल टनल (9.02 किमी) तथा सेला टनल (1.95 किमी) जैसे बिन्दु इस क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को वैश्विक मानकों के अनुरूप उन्नत बनाते हैं।
ये सड़क प्रकल्प न केवल जवानों की तैनाती गति बढ़ाएंगे, बल्कि स्थानीय व्यापार, कृषि उपज के परिवहन तथा आपातकालीन सेवाओं की पहुँच को सुगम बनाएँगे।
2. ग्राम विकास और बुनियादी सेवाएँ
2.1 प्रकाश एवं विद्युत् कनेक्टिविटी
220 केवी श्रीनगर-लेह बिजली लाइन परियोजना से लद्दाख की ग्राम पंचायतें राष्ट्रीय ग्रिड से जुड़ी हैं, जिससे दूरदराज के इलाके भी 24×7 बिजली प्राप्त कर रहे हैं। उत्तर पूर्वी राज्यों में ब्रहमपुत्र और गंगाजी बेसिनों के आसपास सबस्टेशन एवं ट्रांसमिशन मॉडर्नाइजेशन पर जोर दिया जा रहा है।
2.2 डिजिटल कनेक्टिविटी
भारत नेट ब्रॉडबैंड परियोजना के तहत 1,500 से अधिक सीमा गाँवों में हाई-स्पीड इंटरनेट पहुँचाया गया है। 2021–24 की अवधि में 7,000 से अधिक गाँवों में इंटरनेट कनेक्शन स्थापित हुआ, जिससे ऑनलाइन शिक्षा, टेलीमेडिसिन व ई-गवर्नेंस सेवाओं का विस्तार संभव हुआ।
2.3 ग्रामीण सड़कें (PMGSY)
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना अंतर्गत विशेष क्षेत्र जैसे पहाड़ी, रेतीले एवं उपजीविका आश्रित इलाकों में 163,000 से अधिक असंबद्ध बसाहटों को मुख्य मार्गों से जोड़ा गया है। इन ग्रामीण सड़कों ने किसान उत्पादों के बाज़ार तक पहुँचने का समय 40% तक कम किया है।
3. सुरक्षा व्यवस्था में स्थानीय सहभागिता
सीमा जागरण मंच स्वयं स्थानीय समुदायों को राष्ट्रीय सुरक्षा पहल में सक्रिय सहभागी बनाने का कार्य करता है। “वाइब्रेंट विलेज” कार्यक्रम के माध्यम से पंचायत स्तर पर नागरिक-सेना सहभागिता से सीमा प्रबंधन को मजबूती मिल रही है।
नागरिक चौकियाँ एवं बचाव दल: ग्राम व विकास समितियों द्वारा बनाए गए चौकी घरों को स्थानीय प्रहरी चौकियों के रूप में संचालित किया जा रहा है, जिससे इंटरसेप्शन समय घटता है।
एनसीसी एवं स्कूली युवक संवाद: शैक्षणिक संस्थानों में एनसीसी प्रशिक्षण से युवाओं को सीमा सुरक्षा का प्रशिक्षण देकर समर्पण की भावना जगाई जा रही है।
सीमांत सुरक्षा बल सहयोग: बीएसएफ और आईटीबीपी के साथ संयुक्त ड्रिल एवं आपदा-प्रबंधन अभ्यास स्थानीय निवासियों को युद्ध एवं प्राकृतिक आपदा दोनों स्थितियों में सहभागिता का अनुभव और प्रशिक्षण देते हैं।
4. पर्यटन विकास: राष्ट्रीय अखंडता के साथ सुदृढ़ीकरण
सीमा पर्यटन स्थानीय अर्थव्यवस्था का एक नया स्त्रोत बनकर उभरा है। प्राकृतिक सौंदर्य के बीच, निम्नलिखित पहलों से रोजगार एवं सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा मिला है:
4.1 रिवर्स माईग्रेशन – अरुणाचल प्रदेश के हुरी गाँव में विकास कार्यों से पलायन रुका और लोग वापस भी लौटे; 2023 तक स्थानीय रोजगार 35% बढ़ा।
4.2 स्वदेश दर्शन एवं उद्यान पर्यटन – लेह-श्रीनगर मार्ग पर पर्यटन की सुविधाएं विकसित होने से 2024 में 30% अधिक पर्यटक का आगमन हुआ, जिसके फलस्वरूप होटलों, होमस्टे और वाहन किराए पर उफलब्ध कराने से रोजगार की वृद्धि हुई।
4.3 स्वदेश दर्शन स्कीम – उत्तराखंड के गुविंदघाट–हेमकुंड रोपवे व केदारनाथ रोपवे परियोजनाओं से तीर्थयात्रा पर्यटन में 25% वृद्धि हुई है, जिससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को 500 करोड़ रुपये का लाभ मिला।
4.4 सीमांत सांस्कृतिक उत्सव – लद्दाख में होंड़दो पर्व तथा सिक्किम में त्सोमगो झील महोत्सव से स्थानीय हस्तशिल्प एवं लोकनृत्य को अंतर्राष्ट्रीय मंच मिला, जिससे 15% अतिरिक्त हस्तशिल्प निर्यात हुआ।
5. रोजगार सृजन और आर्थिक सशक्तिकरण
5.1 कृषि एवं संबद्ध उद्योग: सीमा क्षेत्र के किसानों को जैविक कृषि, फलोद्यान, औषधीय पौधों की खेती में प्रशिक्षित कर सहायक वृत्तांत कार्यक्रम चलते हैं। लद्दाख में अल्पाइन सब्ज़ियाँ एवं हिमालयी जड़ी-बूटियाँ 2025 तक 20% अतिरिक्त आय का स्रोत बन चुकी हैं।
5.2 ग्रामीण उद्यमिता: स्व-रोजगार योजनाओं जैसे मुद्रा एवं स्टैंड अप इंडिया के तहत सीमा गाँवों में 10,000 नए लघु उद्योग स्थापित हुए हैं। इनमें से 40% उद्योग स्थानीय महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा संचालित हैं, जिससे महिलाओं की आय में औसतन 30% वृद्धि हुई है।
5.3 कौशल विकास: नेशनल स्किल फाउंडेशन एवं आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय ने 2024–25 में सीमा क्षेत्रों में 25,000 युवाओं को होटेलियरिंग, गाइड ट्रेनिंग, ऑटोमैकेनिक्स और डीजीएमएस (ड्रोन ऑपरेटर) पाठ्यक्रमों में प्रमाणित किया। इससे बेरोज़गारी दर 10% से घटकर 6% हुई।
6. प्रमुख योजनाएँ और भविष्य की राह
6.1 वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम: उत्तरी सीमाओं (उत्तराखंड, हिमाचल, अरुणाचल) के गाँवों को मॉडल विलेज में परिवर्तित करना, 2025 तक 1,200 गाँवों को समावेशित कर लिया जाएगा।
6.2 बॉर्डर एरिया डेवलपमेंट प्रोग्राम (BADP): अत्यंत दूरस्थ सीमा क्षेत्रों में बुनियादी और सामाजिक अवसंरचना सुनिश्चित करना इसका उद्देश्य है। निरंतर बजटीय आवंटन से स्वास्थ्य केन्द्र, विद्यालय एवं सामुदायिक भवन 2025 में अब तक 500 तक बनाए गए हैं।
6.3 सीमा वातानुकूलित मेडिकल यूनिट्स: अत्यधिक ऊँचाई वाले इलाकों में मोबाइल मेडिकल यूनिट्स तैनात किए जाने हैं। 2025 तक 100 गाँवों तक स्वास्थ्य सेवाएँ उफलब्ध हो रही हैं।
6.4 इंटीग्रेटेड बॉर्डर इन्फ्रास्ट्रक्चर: सड़क, पुल, टनल एवं 5G नेटवर्क को एकीकृत प्लान के तहत विकसित कर ‘स्मार्ट सीमा’ के रूप में उन्नत कियाजा रहा है।
भारत सीमा विकास: समुद्री सीमा समग्र अवलोकन
भारत की 11,098.8 किमी समुद्री तटरेखा पर सड़क-जैसी कनेक्टिविटी, बंदरगाह अवसंरचना, तटीय सुरक्षा, पर्यटन और रोजगार – सब मिलकर एक समग्र सीमा-विकास इकोसिस्टम का निर्माण कर रहे हैं, जिसमें सागरमाला 2.0, भारतीय तटरक्षक की तटीय निगरानी शृंखला, क्रूज़-टूरिज्म, और बंदरगाह-आधारित औद्योगीकरण निर्णायक भूमिका निभा रहे हैं।
1. समुद्री सीमा क्यों निर्णायक
भारत का समुद्री भूभाग 12 मुख्य बंदरगाहों और 200+ गैर-मुख्य बंदरगाहों के साथ वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला, ऊर्जा सुरक्षा, और ब्लू इकोनॉमी का केंद्र है, जिसे पोर्ट-लेड डेवलपमेंट के जरिए “लॉजिस्टिक्स लागत कम, प्रतिस्पर्धा अधिक” की रणनीति पर पुनर्गठित किया जा रहा है।
2. सागरमाला 2.0: पोर्ट-लेड विकास का इंजन
सरकार ने सागरमाला के तहत 5.79 लाख करोड़ के 839 प्रोजेक्ट पहचाने, जिनमें से 19 मार्च 2025 तक 1.41 लाख करोड़ के 272 प्रोजेक्ट पूरे हो चुके हैं; सागरमाला 2.0 जहाज-निर्माण, रिपेयर, रीसाइक्लिंग और पोर्ट मॉडर्नाइजेशन में 40,000 करोड़ की बजटीय सहायता से अगले दशक में 12 लाख करोड़ निवेश लक्ष्यित करता है।
परिणाम: दशकीय अवधि में कोस्टल शिपिंग 118% बढ़ी, इनलैंड वॉटरवे कार्गो 700% उछला, 9 भारतीय पोर्ट्स विश्व के टॉप-100 में और विशाखापत्तनम टॉप-20 कंटेनर पोर्ट्स में शामिल हुआ।
3. इंडियन पोर्ट्स बिल/एक्ट अपडेट्स
भारतीय पोर्ट्स गवर्नेंस का आधुनिकीकरण 2025 के सुधार-पैकेज से तेज हुआ है, जिससे बंदरगाह नियमन, प्रतिस्पर्धा और ईज़-ऑफ-डूइंग-बिज़नेस के लिए सदी-पुराने कानूनों का ओवरहॉल हो रहा है।
4. गति-शक्ति और मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी
मंत्रालय की 2024-25 रिपोर्ट के अनुसार 101 गति-शक्ति प्रोजेक्ट्स में मेजर पोर्ट्स के 52 और राज्यों/इनलैंड वॉटरवेज के 49 प्रोजेक्ट्स अंतिम मील संपर्क, रेल-रोड लिंक और लॉजिस्टिक पार्कों से जोड़ रहे हैं, जिससे टर्नअराउंड टाइम घट रहा है।
5. तटीय सुरक्षा: 26/11 के बाद से “गैप-फ्री” विजिल की स्कीम
कॉस्टल सर्विलांस नेटवर्क: 46 रडार-एआईएस-ईओ कैमरा स्टेशन की चेन (फेज-1) चालू, फेज-2 में 38 अतिरिक्त रडार, 8 मोबाइल सर्विलांस सिस्टम और गल्फ ऑफ कच्छ/खंभात में वीटीएमएस कनेक्टिविटी जोड़ी जा रही है।
एनसी3आई नेटवर्क: नौसेना-तटरक्षक का एकीकृत नेटवर्क मल्टी-सेंसर फ्यूज्ड कॉमन ऑपरेशनल पिक्चर देता है; ज्वाइंट ऑपरेशन सेंटर्स से इंटेल-शेयरिंग रियल-टाइम होती है।
ऑपरेशनल इफेक्ट: बीते दशक में तटरक्षक ने 3,00,296 बोर्डिंग ऑपरेशंस कर क्लीयरेंस, पहचान और निवारक सतर्कता को मानक बनाया, जिससे अवैध गतिविधियों पर रोक मजबूत हुई।
क्षमता-वृद्धि: आईसीजी के “हब-एंड-स्पोक” परिप्रेक्ष्य में ईस्ट/वेस्ट कोस्ट पर नए स्टेशन, इंटरसेप्टर क्राफ्ट्स और एयर एसेट्स के साथ दिन-रात पेट्रोलिंग क्षमता बढ़ाई गई।
6. तटीय पुलिसिंग और CSS
कोस्टल सिक्योरिटी स्कीम फेज-1/2 के तहत मरीन पुलिस प्रशिक्षण, नाव-पंजीकरण, मछुआरों के बायोमेट्रिक कार्ड, और “सागर प्रहरि बल” के लिए 80 फास्ट इंटरसेप्टर क्राफ्ट्स तैनात किए गए; अब फेज-3 के कंटूर गैप-प्लगिंग पर केंद्रित हैं।
7. पोर्ट मॉडर्नाइजेशन और क्षमता विस्तार
2025 तक भारतीय पोर्ट क्षमता 2,500 एमएमटीपीए तक ले जाने की रोडमैप पर परिचालन सुधार, डीप-ड्राफ्ट, मेगा-क्रेन्स, और आईटी-ड्रिवन टर्मिनल मैनेजमेंट शामिल हैं।
निजी और मेजर पोर्ट्स में ऑटोमेशन, ग्रीन-एनर्जी, एलएनजी बंकरिंग, और जहाज-रिसाइक्लिंग ईकोसिस्टम को बढ़ावा दिया जा रहा है।
8. रोजगार और ब्लू इकोनॉमी
सागरमाला से सीधे-परोक्ष मिलाकर 1 करोड़ रोजगार का अनुमान, जिसमें निर्माण, ऑपरेशन, सुरक्षा, वेयरहाउसिंग, लॉजिस्टिक्स, कोल्ड-चेन, फिशरीज़, क्रूज़-टूरिज्म और पोर्ट-लिंक्ड इंडस्ट्रीज शामिल हैं।
मंत्रालय का अनुमान है कि 40 लाख सीधे और 60 लाख परोक्ष नौकरियाँ 2025 तक पोर्ट-लिंक्ड सेक्टर्स से संभव हैं, जिससे तटीय समुदायों के लिए स्किल्ड-नॉनस्किल्ड अवसर सृजित होते हैं।
9. मरीन पुलिस, मछुआरे और कम्युनिटी सेफ्टी
तटरक्षक SOPs के अनुसार संयुक्त अभ्यास (Sea Vigil, Sagar Kavach, Sajag), बोर्डिंग-ऑप्स, और पहचान-पत्र सत्यापन नियमित हैं; इससे मछुआरों की सुरक्षा और इंटेलिजेंस पाइपलाइन मजबूत होती है।
बायोमेट्रिक-आईडी, वीएचएफ-कॉम्स, और छोटे क्राफ्ट ट्रैकिंग सिस्टम से “व्हाइट शिपिंग” अवेयरनेस और SAR रिस्पॉन्स समय सुधरा है।
10. तटीय पर्यटन और क्रूज़ अर्थव्यवस्था
क्रूज़ भारत मिशन: सितंबर 2024 से शुरू मिशन क्रूज़-टर्मिनल्स, लाइटहाउस-टूरिज्म, और घरेलू-आंचलिक मार्गों पर फोकस कर रहा है; मंत्रालय ने 2025 में इसकी प्रगति पर लोकसभा उत्तर जारी किया।
लाइटहाउस टूरिज्म और रो-पैक्स: रो-पैक्स फेरीज से 40 लाख+ यात्रियों की आवाजाही और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी सुधरी; तटीय पर्यटन से हॉस्पिटैलिटी-गाइडिंग-ट्रांसपोर्ट में नए अवसर बने।
11. समुद्री पर्यावरण और जलवायु-लचीला इन्फ्रा
पोर्ट्स की ग्रीन-ट्रांज़िशन—शोर-पावर, सोलर/विंड, अपग्रेडेड ड्रेजिंग और ईंधन-इफिशेंसी मानकों से उत्सर्जन घटाना—वार्षिक रिपोर्ट्स और विज़न-2030 फ्रेमवर्क का केंद्रीय स्तंभ है।
तटक्षेत्र प्रबंधन योजनाओं में मैंग्रोव-रीस्टोरेशन, एरोशन-कंट्रोल और आपदा-पूर्व चेतावनी सिस्टम शामिल हैं, जो पोर्ट-ऑपरेशंस के साथ एकीकृत किए जा रहे हैं।
12. मत्स्य, जेट्टी और सप्लाई-चेन
सागरमाला में फिशिंग-हार्बर अपग्रेड, जेट्टी मॉडर्नाइजेशन, कोल्ड-चेन और मूल्य-वर्धन केंद्रों से मछुआ समुदाय की आय-संभावना बढ़ी; बेहतर ट्रेसबिलिटी और पोर्ट-कनेक्टिविटी ने निर्यात प्रतिस्पर्धा को बढ़ाया।
13. कानून, तालमेल और गवर्नेंस
इंडियन कोस्ट गार्ड को 2009 से तटीय सुरक्षा में नोडल समन्वय प्राधिकरण—तटीय पुलिस, कस्टम्स, इंटेल एजेंसियाँ, पोर्ट अथॉरिटी और राज्य समुद्री बोर्ड एक SOP-केंद्रित “वन ग्रिड” में काम करते हैं।
भारतीय पोर्ट्स बिल 2025 का प्रस्तावित ढांचा राष्ट्रीय पोर्ट-नियम, निवेश, और क्षमता-निर्माण में स्पष्टता लाकर प्रतिस्पर्धी-एकरूप इकोसिस्टम बनाता है।
14. द्वीपीय क्षेत्र: अंडमान-निकोबार और लक्षद्वीप
द्वीपीय स्टेशनों पर रडार-विस्तार, VTMS, इंटरसेप्टर तैनाती और एयरो-समर्थन से EEZ निगरानी और SAR क्षमता सुदृढ़ हुई; इससे IUU फिशिंग, स्मगलिंग और समुद्री प्रदूषण-प्रतिक्रिया पर तेज़ एक्शन संभव हुआ।
15. सामने की चुनौतियाँ
ग्रे-ज़ोन थ्रेट्स: छोटे क्राफ्ट, ड्रग-गन-गोल्ड स्मगलिंग, और हाइब्रिड टैक्टिक्स के लिए एआई-एनेबल्ड फ्यूज़न, समुद्री डोमेन अवेयरनेस और हार्ड-टार्गेटिंग की जरूरत है।
इंफ्रा बॉटलनेक्स: पोर्ट-कनेक्टिविटी और लैंड-अक्विज़िशन, ड्रेजिंग-इकोलॉजी बैलेंस और लॉजिस्टिक पार्क समेकन में समयबद्धता चुनौती है, जिस पर नीतिगत समाधान आगे बढ़ रहे हैं।
16. आगे की राह: 2030 का समुद्री विज़न
मैरिटाइम इंडिया विज़न-2030 के निवेश-रोडमैप से 20 लाख नौकरियों का लक्ष्य, पोर्ट-इफिशिएंसी, जहाज-निर्माण-रिपेयरिंग, और तटीय समुदाय विकास में समेकित प्रगति का आधार तय हुआ है।
सागरमाला 2.0, इंडियन पोर्ट्स बिल 2025, गती-शक्ति, और तटरक्षक-नौसेना के संयुक्त NC3I/CSN नेटवर्क से “सुरक्षित, सक्षम और समृद्ध समुद्री सीमा” का मॉडल उभर रहा है।
निष्कर्ष
समुद्र हमारे लिए सिर्फ पानी का फ़लक नहीं, बल्कि व्यापार, सुरक्षा और आजीविका का विशाल कॉरिडोर है—जहाँ बंदरगाह क्रेन्स की धड़कनें लॉजिस्टिक्स के टाइमटेबल से ताल मिलाती हैं, और तटरक्षक की निगाहें हर लहर का बहीखाता लिखती हैं।
जब सागरमाला 2.0 के ब्लूप्रिंट पर 272 प्रोजेक्ट्स की हकीकत उतरती है, 9 भारतीय पोर्ट्स दुनिया के टॉप-100 में जगह बनाते हैं, और 3 लाख से ज्यादा बोर्डिंग-ऑपरेशंस समुद्री शुचिता की सील लगाते हैं -तब समझ आता है कि समुद्री सीमा विकास कोई एक विभाग का प्रोजेक्ट नहीं, यह राष्ट्र-शक्ति का समेकित अनुशासन है।
अगला पड़ाव साफ है – गैप-फ्री सर्विलांस, प्रत्येक बंदरगाह पर बहु-आयामी परिवहन-मार्गों का सुसंगठित जाल, हर गोदी पर रोजगार, और हर तट पर सुरक्षित, स्वच्छ, और सक्षम ब्लू इकोनॉमी का इकोसिस्टम – यही भारत की समुद्री सीमाओं की नई पहचान बनेगी।

