- भारत–पाकिस्तान (3,323 किमी): परमाणु-सक्षम प्रतिद्वंद्विता, एलओसी व सर क्रीक विवाद, आतंकवाद, घुसपैठ, तस्करी; सियाचिन से थार तक बॉर्डर एरिया।(बीएसएफ)
- भारत–चीन (3,488 किमी): एलएसी विवाद, विस्तारवादी नीति, गलवान जैसी घटनाएँ, आधारभूत ढाँचे की कमी, विरल आबादी। (सेना, आईटीबीपी)
- भारत–नेपाल (1,751 किमी): खुली व बिना घेराबंदी की सीमा, कालापानी–सुस्ता विवाद, तस्करी व घुसपैठ। (एसएसबी)
- भारत–भूटान (699 किमी): कठिन भौगोलिक परिस्थिति, चीन का दबाव, रणनीतिक संवेदनशीलता। (एसएसबी)
- भारत–म्यांमार (1,643 किमी): घने जंगल, उग्रवादी ठिकाने, रोहिंग्या पलायन, कमजोर संपर्क। (असम राइफल्स, सेना)
- भारत–बांग्लादेश (4,096 किमी): लंबी सीमा व बड़ी नदी-डेल्टा क्षेत्र, बिना घेराबंदी की सीमा, घुसपैठ, तस्करी; एनक्लेव समझौते के बाद भी चुनौतियाँ। (बीएसएफ)
सीमा की प्रमुख चुनौतियाँ
- प्रमुख सीमाएँ व चुनौतियाँ
- पलायन
- घुसपैठिए
- आतंकवाद
- अतिक्रमण
- तस्करी
- सुरक्षा खतरा
- बेसिक संरचना की कमी
- नीतिगत ढांचा
- सीमांत नागरिकों का पलायन
- पड़ोसी राष्ट्रों का शत्रुतापूर्ण रवैया
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- अवैध घुसपैठिए
- सीमा पर डेमोग्राफिक बदलाव
- सीमा पार से प्रायोजित उग्रवाद
- सीमा पर अलगाववाद
- सीमा पार से आतंकवाद
सरकारी भूमि का अतिक्रमण
- मानव तस्करी
- ड्रग्स की तस्करी
- हथियार की तस्करी
- अवैध व्यापार से राजस्व की हानि
- ड्रोन के जरिए सुरक्षा खतरा
- सुरंग के माध्यम से सुरक्षा खतरा
- सीमांत क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं की कमी
- लोगों में सुरक्षा के प्रति उदासीनता
- “एक सीमा–एक बल” नीति (कारगिल के बाद)
- गृह मंत्रालय का बॉर्डर मैनेजमेंट डिवीजन
- BADP के जरिए स्थानीय सहभागिता व बुनियादी ढाँचे में सुधार
भारतीय सीमा की चुनौतियॉं


