सीमाएं किसी राष्ट्र के आत्मबोध का मूल आधार हैंये सीमाएं केवल नक्शे पर खिंची लकीरें भर नहीं, बल्कि जीवंत इतिहास हैं। यहाँ के सीमांतवासी अपना श्रम, संस्कृति और साहस लेकर हर दिन न जाने कितनी चुनौतियों से टकराते हैं। कड़े मौसम, कठिन भूगोल और सुरक्षा के गहन तनाव के बीच वे अपने जीवन की आभा से राष्ट्र की सीमाओं को सजाते हैं। इन्हीं सीमाओं पर राष्ट्ररक्षा का तेज, मानवता की संवेदना और संस्कृति की जड़ें मिलती हैं, जो पूरे देश को दिशा देती हैं।
सीमा संवाद’ – सीमा जागरण मंच की प्रमुख मासिक गतिविधि है। यही जीवंतता समाज के हर वर्ग तक पहुँचाने का निरंतर प्रयास है। यहाँ विशेषज्ञों के माध्यम से सुरक्षा जैसे सामयिक और गहन मुद्दों पर संवाद युवाओं, शोधकर्ताओं और नीतिनिर्माताओं तक पहुँचता है। संवाद का उद्देश्य एक हैसीमा से जुड़े हर सवाल को जनजन तक पहुंचाना और राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर समाज में जागृति की नई लहर फैलाना।
सीमा संवादमहज़ एक बैठक नहीं, बल्कि ज़मीन से जुड़े सवालों को जनता के विवेक तक ले जाने की लोकतांत्रिक प्रक्रिया है। ये आयोजन राष्ट्र की धड़कन को अभिव्यक्ति देता है, सीमांत की मिट्टी की महक को शब्दों में बांधता है और माँ भारती के प्रहरी सीमांतवासियों को सम्मान का मंच देता है।