विशद विमर्शसीमा समाचारिका

पंच परिवर्तन : आत्मा से राष्ट्र तक परिवर्तन की यात्रा

एक वैज्ञानिक, व्यवहारिक और सभ्यतागत रूपांतरण की परिकल्पना   भोगेन्द्र पाठक संघ का शताब्दी वर्ष उत्सव नहीं, बल्कि राष्ट्रीय चेतना के पुनर्जागरण का उद्घोष है। ‘पंच परिवर्तन’ इसी उद्घोष का मूर्त रूप है। यह एक ऐसा अभियान है जो भारत की आत्मा, सामाजिक ढाँचे और नागरिक संस्कारों को समग्र रूप से पुनर्गठित करने का संकल्प…

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डिजिटल युद्ध और भारत की सुरक्षा

डेटा सुरक्षा, डार्क वेब और अवैध वित्तीय प्रवाह लेफ्टिनेंट जनरल आशीष रंजन प्रसाद (सेवानिवृत्त) वर्तमान युग में किसी भी राष्ट्र की सुरक्षा केवल भूमि, समुद्र, आकाश और अंतरिक्ष तक सीमित नहीं रही है। अब यह डिजिटल डोमेन में भी विस्तारित हो गई है। भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र और उभरती हुई तकनीकी महाशक्ति है।…

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पूर्वोत्तर सीमा, व्यापार और समृद्धि

भूमि सीमाएँ और आर्थिक सुरक्षा: पूर्वोत्तर भारत में सीमा व्यापार और विकास कावेरी जैन भारत सात देशों के साथ कुल 15,106.7 किलोमीटर की भूमि सीमा साझा करता है। इसमें से 5,182 किलोमीटर, लगभग एक-तिहाई, पूर्वोत्तर क्षेत्र में है, जो बांग्लादेश, चीन, भूटान और म्यांमार के साथ सीमाएं साझा करता है। यह पूर्वोत्तर क्षेत्र को न…

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मंदिर: सीमा सुरक्षा का सनातन स्तंभ   

 देवालय से दुर्ग तक : मंदिरों की राष्ट्रीय सीमा–चेतना   भोगेन्द्र पाठक (5 नवम्बर 2025 को सीमा जागरण मंच के ‘मंथन’’ कार्यक्रम में दिल्ली में संतों और आचार्यों द्वारा लिया गया यह निर्णय कि पूर्वोत्तर की अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं पर प्रथम चरण में सौ मंदिर स्थापित किए जाएँ, केवल धार्मिक गतिविधि नहीं, बल्कि सहस्राब्दियों पुराने ‘मंदिर–सीमा–सुरक्षा-तंत्र’…

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कश्मीरी हिन्दुओं का अबतक जारी संघर्ष

कश्मीरी पंडितों की सुरक्षित पुनर्वापसी: इतिहास की सीख और वर्तमान की रणनीति   अश्विनी कुमार च्रोंगू (37वीं होलोकॉस्ट दिवस (19 जनवरी, 2026) पर) उन्नीस जनवरी 1990 को, आज से छत्तीस वर्ष पहले कश्मीर की धरती पर अपने ही घर में रहने वाले मूलनिवासी कश्मीरी पंडितों ने अपने इतिहास का सबसे काला अध्याय देखा था। दस…

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जाली मुद्रा: मौन खतरा

जाली मुद्रा: अर्थव्यवस्था की जड़ों पर प्रहार, राष्ट्र की सुरक्षा पर अदृश्य खतरा आशीष केसरवानी  एक देश की राष्ट्रीय प्रगति की रीढ़ उसकी वित्तीय प्रणाली होती है। हालांकि, इस प्रणाली में जाली मुद्रा का प्रवेश एक मौन लेकिन बहुआयामी खतरा पैदा करता है जो आर्थिक स्थिरता और राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डालता है। नकली…

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